देवघर: शंकर दत्त द्वारी द्वारा बनाया गया राजा राम शांति अखाड़ा पहचान का मुहताज नहीं है. यहां देश के कई प्रांतों के पहलवान ने अपना दमखम दिखाया है. कई पहलवान प्रभावित होकर देवघर में ही रह गये. यहां सुबह-शाम दोनों समय पहलवान अभ्यास करते हैं. सुबह में कुश्ती का अभ्यास अभी भी संचालित होती है. वर्तमान में सुभाष दत्त द्वारी व बबुआ जी झा अभी भी पहलवानों को नये दावं सिखाने आते हैं.
अखाड़ा समिति के अध्यक्ष जवाहर दत्त द्वारी ने बताया कि इस अखाड़ा का इतिहास 150 वर्षों से भी पुराना है. अखाड़ा का सोंटा समाज जिला में प्रचलित था. वह समाज के दबे-कुचले लोगों को इंसाफ दिलाता है. उस समय लोग सोंटा समाज के निर्णय को अंतिम निर्णय मानते थे. बिहार के भोलू सिंह, कमलधारी सिंह, विष्णु देव सिंह, बंगाल के स्वामी बाबू प्रभावित होकर देवघर के ही हो कर रह गये. सरदार पंडा उमेशानंद ओझा, ब्रह्मा पांडेय, चंडी पांडेय, शंभू दत्त द्वारी, छोट पंडा, बुढ़ा चक्रवर्ती, गोरे मिश्र इसी अखाड़ा में अभ्यास करते थे.
क्या-क्या है औजार :डंडवार, मुदगल, गदा, वेट लिफ्टर, तलवार, भाला, फरसा
कौन हैं प्रशिक्षक : बबुआ जी झा व सुभाष दत्त द्वारी
सदस्य : मनीष कुमार झा, अभय नाथ मिश्र, बालक मणि कुंजिलवार, महेश श्रृंगारी, गुड्डू द्वारी, प्रकाश शांडिल्य, विकास मिश्रा, आशीष खवाड़े, आयूष झा, , राहुल कुमार, सोनू परिहस्त, शेखर पलिवार, शुभम झा, आनंद मिश्र हैं.
