संगोष्ठी के संयोजक मणिकांत झा के कुशल संचालन में आयोजित संगोष्ठी में करीब दो दर्जन प्रतिनिधियों ने विषय के पक्ष व विपक्ष में अपने विचार प्रकट किये. प्रो डीके झा ने सरकार के इस कदम से राजनीतिक पारदर्शिता बलवती होने, सस्ते दर में आवास उपलब्ध होने आतंकवाद पर लगाम लगने व हवाला कारोबार के ठप होने पर विस्तार से चर्चा की. पत्रकार डॉ इंद्रमोहन झा ने कहा कि विमुद्रीकरण से सरकार बहुप्रतिक्षित कालाधन पर रोक लगाने की कोशिश पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा.
हरिशचंद्र हरित ने कहा कि विमुद्रीकरण के कारण वर्षों से अस्थिरता का दंश झेल रहे रोजगार के क्षेत्र में स्थिरता आयेगी. मैथिली सम्मेलन के डॉ बुचरू पासवान ने कहा कि विमुद्रीकरण से देश में जमाखोरी, रिश्वतखोरी अौर भ्रष्टाचार पर रोक लग जायेगा, ऐसा कहना बेमानी होगी. मैथिली हास्य कवि डॉ जनक प्रसाद जनक ने चुटीले अंदाज में की टिपणी को लोगों ने खूब सराहा. प्रवीण झा ने विमुद्रीकरण के मास्टर स्ट्रोक से सरकार आतंकवाद, नक्सलवाद व हवाला पर अंकुश लगाने में कामयाब होगी. इनके अलावा गौरीशंकर झा गोविंद, रामसेवक झा, रचना कुमारी आदि ने भी अपने विचार रखे. जबकि मैथिली सम्मेलन के पदाधिकारी विष्णुदेव झा विकल की शुभकामना संदेश का वाचन मणिकांत झा ने किया.

