देवघर: बाबा मंदिर के जलार्पण के बाद के जल (नीर) को अब व्यर्थ बहने से बचाया सकता है. बाबा मंदिर प्रभारी के पत्राचार पर जसीडीह बीआइटी मेसरा की तीन सदस्यीय टीम ने प्रोफेसर अनिल शर्मा के नेतृत्व में इस पर विचार करना शुरू कर दिया है. टीम ने मंगलवार को बाबा मंदिर सहायक प्रभारी दीपक मालवीय के साथ बाबा मंदिर से निलने वाले नीर के कुंड का निरीक्षण किया. इसके बाद नीर के प्रसंस्करण पर चर्चा करते हुए कहा कि जांच के बाद ही इस विषय में कुछ कहा जा सकता है.
उन्होंने कहा कि रिसाइकिलिंग कर इसे पीने योग्य बनाया जा सकता है या नहीं इस संभावना पर शोध की जरूरत है. इसे बोतल में पैक कर आने वालों भक्तों को प्रसाद के रूप वितरीत करने की संभावना पर विचार किया जा सकता है.
कहा कि दस से पंद्रह दिनों के अंदर इसकी रिपोर्ट तैयार की जायेगी. नीर का सैंपल लेकर अधिक मात्रा में नीर जमा करने के लिये व इसे साफ करने के लिये जगह की बात भी हुई. इसी के मद्देनजर जलसार का निरीक्षण किया गया. टीम में श्री निनवास राव,गोपी सेठ्ठी व शाशी कुमार तिवारी भी शामिल थे.

