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सुविधा शुल्क के बदले मिलती है असुविधाहाल नगर निगम देवघर का- 2फाेटो सुभाष की. देवघर तीर्थ नगरी है. श्रावणी मेले में लाखों तीर्थयात्रियों के अलावा हर माह यहां हजारों की संख्या में तीर्थयात्रियों का आवागमन होता है. लेकिन, यहां साफ-सफाई एवं कूड़ा-कचरा को ठिकाना लगाने का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है. नगर निगम गठन का […]

सुविधा शुल्क के बदले मिलती है असुविधाहाल नगर निगम देवघर का- 2फाेटो सुभाष की. देवघर तीर्थ नगरी है. श्रावणी मेले में लाखों तीर्थयात्रियों के अलावा हर माह यहां हजारों की संख्या में तीर्थयात्रियों का आवागमन होता है. लेकिन, यहां साफ-सफाई एवं कूड़ा-कचरा को ठिकाना लगाने का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है. नगर निगम गठन का दूसरा कार्यकाल चल रहा है. नगर निगम में 44 गांवों को शामिल किया गया है. निगम का क्षेत्रफल बढ़ा, आबादी भी बढ़ी. लेकिन, नागरिक सुविधा उपलब्ध कराने एवं शहर की सफाई व्यवस्था का मुकम्मल इंतजाम कराने में नगर निगम विफल रहा. आखिर नगर निगम क्याें नहीं लोगों के भरोसे पर खरा उतर रहा है. इस बारे में प्रभात खबर ने व्यापक पड़ताल की. प्रस्तुत है किस्तवार रिपोर्ट- देवघर नगर निगम की आबादी करीब दो लाख, 44 गांव भी हैं शामिल – नगर निगम वसूलता है हर प्रकार का सुविधा शुल्क – श्रावणी मेले में हर दिन लाखों की संख्या में कांवरियां पहुंचते हैं देवघर- नगर निगम के पिछले कार्यकाल के बोर्ड मीटिंग में कई दफे उठा मामला – डंपिंग ग्राउंड की तलाश में समन्वय का अभाव, नागरिक है मुश्किल में संवादाता, देवघर देवघर नगर निगम में देवघर एवं मोहनपुर प्रखंड के कुल 44 गांवों को शामिल किया गया. आबादी भी करीब दाे लाख के करीब है. निगम नागरिकों से हर प्रकार के सुविधा शुल्क वसूल करता है. लेकिन, नियमित साफ-सफाई एवं कूड़ा-कचरा उठाव का पुख्ता इंतजाम अब तक नहीं किया गया है. नतीजा हर दिन न तो शहर के सभी हिस्सों की साफ-सफाई हो पाती है न ही कूड़ा-कचरा को सही तरीके से ठिकाना ही लगाया जाता है. विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में भी हर रोज लाखों की संख्या में कांवरिये देवघर पहुंचते हैं. मेले के दौरान मेला क्षेत्र एवं कांवरिया पथ में साफ-सफाई तो होती है. लेकिन, निगम के सफाई कर्मी एक क्षेत्र से कूड़ा-कचरा उठा कर दूसरे क्षेत्र में जमा कर देते हैं. इसका विरोध भी नागरिकों द्वारा लगातार किया जाता रहा है. लेकिन, निगम प्रशासन अब भी कोई ठोस उपाय नहीं कर पाया है. नगर निगम के पिछले कार्यकाल में तत्कालीन मेयर, डिप्टी मेयर, पार्षदों ने संपूर्ण बोर्ड की बैठक में डंपिंग ग्राउंड के लिए प्रस्ताव भी लिया था. निगम प्रशासन को डंपिंग ग्राउंड के लिए आगे की कार्रवाई पूरी करनी थी. लेकिन, समन्वय के अभाव में डंपिंग ग्राउंड का काम पूरा नहीं हो सका. नगर निगम के नये बोर्ड गठन का पांच माह पूरा हो गया. पांच माह के दौरान दो बार बोर्ड मीटिंग में भी डंपिंग ग्राउंड का मामला उठाया गया. लेकिन, अबतक कोई नतीजा नहीं निकला है.

Prabhat Khabar Digital Desk
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