गृह विभाग से चिन्हित गांवों में नन-आइएपी का फंड खर्च किये जाने के बजाये सामान्य क्षेत्रों में खर्च कर दी गयी है. इसमें सारठ प्रखंड में अधिकांश तालाब निर्माण पर राशि खर्च की गयी है. पिछले वित्तीय वर्ष में इन योजनाओं का काम तो चालू हुआ, लेकिन कार्य अब तक अधूरा है. पुलिस की सूची में सारठ का इलाका उग्रवाद प्रभावित नहीं है.
बावजूद नन-आइएपी का फंड सारठ ट्रांसफर किया गया. हालांकि मोहनपुर प्रखंड में कई गांव उग्रवाद प्रभावित के रुप में चिन्हित है, लेकिन पिछले दो वित्तीय वर्ष में मोहनपुर प्रखंड के उन गांवों में नन-आइएपी से तालाब व सड़कों की योजनाओं का चयन किया गया, जो पुलिस की सूची में कभी उग्रवाद प्रभावित इलाका नहीं रहा है. जिला परिषद की बैठक में बुधवार को नन-आइएपी का फंड बिहार से सटे देवघर, देवीपुर व मोहनपुर प्रखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में खर्च करने का मुद्दा उठा था. लेकिन मोहनपुर प्रखंड के उन क्षेत्रों में तालाब व सड़क निर्माण में राशि खर्च हुई है, जो बिहार से सटा हुआ इलाका ही नहीं है. जबकि सारठ का इलाका तो बिहार के सीमा से सटे होने का सवाल ही नहीं उठता.

