महिला की चोट देख सारठ में ही डॉक्टर ने लिखी जांच, देवघर में नहीं हुआ एक्सरे व अल्ट्रासाउंड
Updated at : 05 Aug 2019 9:05 AM (IST)
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चितरा : चितरा के गबड़ा पुल के पास बोरा में बंदकर पुल से फेंकने व दुष्कर्म के प्रयास के मामले में चितरा पुलिस ने पीड़िता को दो चौकीदार के भरोसे इलाज के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया. दोपहर करीब पौने बारह बजे सदर अस्पताल में डॉक्टर ने उसकी हालत देखकर पुर्जा पर कई जांच […]
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चितरा : चितरा के गबड़ा पुल के पास बोरा में बंदकर पुल से फेंकने व दुष्कर्म के प्रयास के मामले में चितरा पुलिस ने पीड़िता को दो चौकीदार के भरोसे इलाज के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया. दोपहर करीब पौने बारह बजे सदर अस्पताल में डॉक्टर ने उसकी हालत देखकर पुर्जा पर कई जांच भी लिखे थे.
लेकिन, दिनभर महिला की जांच नहीं कराकर उसे सदर अस्पताल के वार्ड रख दिया गया. जांच नहीं होने के बारे में पूछे जाने पर चौकीदार ने बताया कि उनके पास महिला के एक्सरे व जांच के लिए पैसे नहीं हैं. इतने संवेदनशील मामले में एक बार फिर चितरा पुलिस संवेदनहीन बनी रही.
इधर, पीड़िता के बयान पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है. दर्ज प्राथमिकी में पीड़िता ने बताया कि उसकी शादी दो साल पूर्व बिहार के चकाई अंतर्गत पहाड़िया निवासी राजेश रजक के साथ हुई थी. पिता जीवित नहीं रहने के कारण शादी में मेरी मां व भाई ने दहेज के रूप में तीन लाख रुपये देकर किया था. कहा कि शादी के बाद में ससुराल में रही. सात माह की पुत्री मनसा कुमारी भी हुई.
पीड़िता ने कहा कि उसके पति का किसी दूसरी लड़की से चक्कर है. उस लड़की से मिलने से मना करने पर पति मारपीट करता था. कुछ दिनों पहले पति तारापुर मामू घर गये तो वहा लड़की भी गयी थी. यह जानकारी भतीजा संतोष ने दी. इस बारे में पति से बात करने पर बेरहमी के साथ पीटा गया.
दो अगस्त की शाम छह बजे पति मुझे बोला कि रांची चलो वहीं रहेगी. पति ने उसे बेटी के साथ बोलेरो गाड़ी में बिठाया. जहां गांव के ही चाचा हारु राय व हारु के मामा के साथ गाड़ी में लेकर जाने लगे. रास्ते में हारू राय ने दुष्कर्म का प्रयास किया. विरोध करने पर पति, हारु व उसके मामा ने मारपीट की व गला दबा दिया.
फिर मरा समझकर हाथ पैर बांधकर बोरे में डालकर पुल से फेंक दिया.इस संबंध में चितरा थाना कांड संख्या 69/19 के तहत मामला दर्ज किया गया है. इधर, मामला दर्ज होने के चितरा थाना के जेएसआइ ललन कुमार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए उसके गांव में चकाई पुलिस के साथ पहुंची.लेकिन इसके पहले गीता के ससुवार फरार हो गए.
बेड पर दर्द से कराह रही महिला, दवा व स्लाइन के भरोसे इलाज
देवघर. हाल ही में उन्नाव में हुई घटना के बाद भी चितरा थाने की पुलिस ने सबक नहीं लिया. गीता के मामले में दूसरे दिन भी चितरा थाने की पुलिस लापरवाह बनी रही. दोपहर 11:41 बजे उसे सदर अस्पताल लाकर भर्ती तो करा दिया. किंतु गीता का क्या इलाज हुआ, उसकी पुख्ता सुरक्षा है या नहीं इसकी परवाह चितरा पुलिस को नहीं रही.
यहां तक कि सारठ सीएचसी के डॉक्टर द्वारा गीता के अल्ट्रासाउंड, एक्सरे व ब्लड जांच कराने की सलाह के बाद भी चितरा थाने की पुलिस ने मानवता के आधार पर जांच कराना उचित नहीं समझा. सदर अस्पताल में भर्ती कर अस्पताल से मिलने वाली जो दवा-स्लाइन गीता को चढ़ रहा है.
उसके अलावे पुलिस ने और कुछ नहीं कराया. शुक्रवार की रात गीता के साथ मारपीट कर उतने ऊंचे पुल से फेंक दिया गया जिससे उसके शरीर में कई जगह गंभीर चोट लगी होगी ऐसे में मानवता के नाते भी उसकी मेडिकल जांच करानी चाहिए थी. लेकिन, ऐसा नहीं किया गया.
अस्पताल में गीता की पुख्ता सुरक्षा भी नहीं है. सुरक्षा के नाम पर चितरा थाने की पुलिस ने एक महिला व एक पुरुष चौकीदार सदर अस्पताल में छोड़ रखा है. दोनों चौकीदार बाहर कुर्सियों पर बैठकर समय काट रहे हैं और गीता बेड पर बेसुध पड़ी है. साक्ष्य मिटाने के मकसद से उसके साथ कभी अनहोनी हो सकती है.
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