देवघर : 2.7 सेमी ऊपर आया जलस्तर 60 प्रतिशत कुओं में लौटा पानी

Published at :09 Jul 2019 8:24 AM (IST)
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देवघर : 2.7 सेमी ऊपर आया जलस्तर 60 प्रतिशत कुओं में लौटा पानी

जल संचयन की मिसाल है देवघर का सत्संग आश्रम एक वक्त सूख चुके थे आश्रम के सभी कुएं, चापाकल भी हो गये थे बेकार, जल संचय के संकल्प ने बदले हालात दूषित जल की रिसाइक्लिंग कर किया जाता है उपयोग जल संचयन के लिए हर 50 फीट पर बना है एक कुआं देवघर : एक […]

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जल संचयन की मिसाल है देवघर का सत्संग आश्रम

एक वक्त सूख चुके थे आश्रम के सभी कुएं, चापाकल भी हो गये थे बेकार, जल संचय के संकल्प ने बदले हालात

दूषित जल की रिसाइक्लिंग कर किया जाता है उपयोग जल संचयन के लिए हर 50 फीट पर बना है एक कुआं

देवघर : एक तरफ जहां वर्तमान में देश भर में जल संकट से निबटने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं. वहीं दूसरी ओर देवघर के सत्संग आश्रम ने जल संकट की पहचान बहुत पहले ही कर ली थी. इसलिए समय रहते इसका निदान भी शुरू कर दिया गया था. यही वजह है कि सत्संग आश्रम आज धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्र के साथ-साथ जल संचयन का एक बड़ा केंद्र बन चुका है.

सत्संग आश्रम आज ऐसे तमाम लोगों के लिए प्रेरणा बना हुआ है, जो जल संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं. आश्रम में पानी की एक-एक बूंद का सदुपयोग हो रहा है. बारिश के अलावा आश्रम की सड़कों पर बहनेवाले पानी का भी संचय किया जा रहा है. सड़क पर बरसात के पानी को पाइप के माध्यम से कुओं में डाला जाता है. इसके अलावा सत्संग की गलियों, मैदानों, बाथरूम और किचेन के गंदे पानी को रिसाइकिल कर दोबारा उपयोग में लाया जा रहा है. इसके बाद पुन: साफ कर जमीन के अंदर भेजा जा रहा है.

श्रीश्री बबाय दा ने की थी पहल

एक वक्त था जब सत्संग आश्रम का एरिया ड्राइ जोन बन गया था. आश्रम के 43 कुएं सूख चुके थे और 40 चापाकल ने पानी देना बंद कर दिया था. श्रीश्री बबाय दा ने इस समस्या को स्थायी रूप से दूर करने का निश्चय किया. उन्होंने सभी ऋत्विकों से बात कर जल संचय की दिशा में कदम उठाया. इसी का परिणाम है कि वर्तमान में यहां के 60 प्रतिशत कुओं और चापाकलों में पानी लौट आया है.

20 फुट गहरा है हर कुआं

आश्रम के हर परिसर में छह से आठ कुआं बनवाया जा रहा है. हर 50 फुट पर एक कुआं बनाया गया है. यह पांच फुट से लेकर 12 फुट तक चौड़ा व 20 फुट गहरा है. हर कुआं का निर्माण ओड़िशा के निलाद्री वरण समल व बैंगलुरु के डॉ एस विश्वास की देखरेख में किया जा रहा है.

इन जगहों पर हो रहा जल संचयन

ठाकुरबाड़ी कैंपस, फिलांस ऑफिस, मनमोहनी धाम कैंपस, आनंद बाजार कैंपस, विश्वास बाटी कैंपस, अशोक आश्रम कैंपस, दा टाउन कैंपस, बी सरकार कैंपस, तपोवन स्कूल कैंपस, काली कृष्ण बाड़ी कैंपस, गैराज कैंपस.

रेन वाटर हार्वेस्टिंग से ही कर सकते हैं जल संरक्षण

रांची : नगर आयुक्त मनोज कुमार ने सोमवार को वार्ड-3 और 4 का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने वार्ड-4 के प्रह्लाद अपार्टमेंट में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की शुरुआत की. साथ ही लोगों से आह्वान किया कि अगर हम जल संकट से निबटना चाहते हैं, तो हमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग अपनाना होगा. उन्होंने ब्रांबे आवास के समीप व्यापक पैमाने में सफाई अभियान चलाने का निर्देश दिया. मौके पर अपर नगर आयुक्त गिरिजा शंकर प्रसाद, हेल्थ ऑफिसर डॉ किरण, पार्षद हुस्ना आरा आदि उपस्थित थे.

श्रीश्री बबाय दा की दूर दृष्टि के कारण सत्संग में पानी की समस्या नहीं है. वाटर हार्वेस्टिंग के कारण सत्संग क्षेत्र में वाटर लेवल 2.7 सेंटीमीटर ऊपर आ चुका है. यहां के 60 प्रतिशत चापाकल व कुआं में पानी लौट आया है. आश्रम में अप्रैल 2019 में जल संचयन के कार्य को विस्तार रूप दिया गया. छोटे-बड़े कुल 80 कुएं बनाने पर काम हो रहा है.

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