ePaper

देवघर : साइबर अपराध की कमाई से पांच साल में बने कई आलीशान मकान

Updated at : 03 Jan 2019 9:12 AM (IST)
विज्ञापन
देवघर : साइबर अपराध की कमाई से पांच साल में बने कई आलीशान मकान

संजीत मंडल करमाटांड़ के लोगों का बदल गया लाइफ स्टाइल, महंगी गाड़ियों पर घूमते हैं युवा, अॉनलाइन शॉपिंग से खरीदते हैं एशोआराम की चीजें देवघर : जामताड़ा जिले का छोटा सा इलाका करमाटांड़, जहां तकरीबन 151 गांव हैं. 10 साल पहले तक कच्चे औ खपरैल घरों वाले करमाटांड़ में अब आलीशान मकान बन गये हैं. […]

विज्ञापन
संजीत मंडल
करमाटांड़ के लोगों का बदल गया लाइफ स्टाइल, महंगी गाड़ियों पर घूमते हैं युवा, अॉनलाइन शॉपिंग से खरीदते हैं एशोआराम की चीजें
देवघर : जामताड़ा जिले का छोटा सा इलाका करमाटांड़, जहां तकरीबन 151 गांव हैं. 10 साल पहले तक कच्चे औ खपरैल घरों वाले करमाटांड़ में अब आलीशान मकान बन गये हैं. करमाटांड़ के कई गांवों में नये-नये मकान का निर्माण हो रहा है. गांव तक जाने के लिए सड़क भले न हो, लेकिन जो घर बन रहे हैं, वह सभी सुविधाओं से लैस हैं.
10 साल पहले तक करमाटांड़ नशाखुरानी गिरोह के अड्डे के रूप में जाना जाता था. गिरोह के सदस्य ट्रेनों में लोगों को नशा खिलाकर लूटपाट करते थे.
लेकिन 2008 से करमाटांड़ के युवाओं ने साइबर क्राइम की दुनिया में कदम रखा. सबसे पहले स्थानीय युवाओं ने मोबाइल से बैलेंस चोरी करना शुरू किया. लोगों से सौ रुपये लेकर दो सौ, तीन सौ रुपये तक के मोबाइल में बैलेंस देते थे. यह धंधा इतना पॉपुलर हुआ कि अच्छे लोग भी आधी दाम पर दोगुना मोबाइल बैलेंस या रिचार्ज पाने की होड़ में शामिल हो गये. इससे इस साइबर अपराध को शह मिलता गया. 2010 के बाद करमाटांड़ में अन्य राज्यों की पुलिस पहुंचने लगी और खुलासा हुआ कि करमाटांड़ से देश भर में साइबर ठगी हो रही है.
साइबर अपराध की दुनिया में कदम रखते ही बरसने लगे पैसे, काफी संख्या में धंधे से जुड़ने लगे युवा
करमाटांड़ व नारायणपुर में युवाओं ने जब से साइबर अपराध की दुनिया में कदम रखा, यानी 2008 से इन लोगों ने बैंक अधिकारी बन फोन करके लोगों के खाते से पैसे उड़ाना शुरू किया. धीरे-धीरे ये तकनीकी रूप से और समृद्ध हुए और अब पांच सालों से करमाटांड़ में खूब पैसा बरस रहा है. इसकी साफ झलक करमाटांड़ युवाओं के बदलते लाइफ स्टाइल और परिदृश्य में दिखती है. पैदल चलने वाले लोग अचानक महंगी चमचमाती गाड़ियों में घूमने लगे हैं.
ये लोग दैनिक जीवन में पानी की तरह पैसे खर्च करते हैं. इससे जहां नयी पीढ़ी गुमराह हो रही है, वहीं परिवार व समाज के लोग भी इनका समर्थन करने लगे हैं. यहां के समाज में यह संदेश जा रहा है कि बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने से अच्छा है साइबर अपराधी बनाना. जितना धन आम लोग जिंदगी भर में नहीं कमा पाते हैं, साइबर ठग कुछ महीनों में ही कमा ले रहे हैं.
1000 से अधिक युवाओं का सिंडिकेट
करमाटांड़ थाना क्षेत्र में कुल 151 गांव हैं. पुलिस के आंकड़ों की मानें, तो 100 गांवों के युवा साइबर अपराध से जुड़ गये हैं. इस काम में 12 से 25 साल के करीब 80 प्रतिशत युवा जुड़े हुए हैं. 1000 से अधिक युवाओं का सिंडिकेट भी चल रहा है. किसी भी व्यक्ति से एटीएम नंबर व पिन जानने के बाद उनके खाते से रुपये उड़ाने में इन्हें महज तीन मिनट का ही समय लगता है.
थाने में जब्त वाहन दे रहे साइबर अपराध से कमाई की गवाही
पिछले पांच सालों से साइबर अपराधियों पर जो कार्रवाई हुई है, उसमें और तेजी आयी है. देश भर के साइबर स्पेशल सेल की दबिश बढ़ी है. नतीजा हुआ कि साइबर अपराधियों पर कार्रवाई हुई.
उन लोगों के पास से महंगी फोर व्हीलर, टू व्हीलर, सामान आदि जब्त हुए हैं, जो थाने में रखे गये हैं. ये साइबर अपराध की काली कमाई की गवाही दे रहे हैं. एक बार जो वाहन साइबर अपराधियों से पुलिस ने जब्त कर लिया है, उसे छुड़ाने आज तक कोई भी नहीं आया.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola