आमदनी हजारों में, खर्च लाखों में, साल में छह बार भी नहीं होता है बुक

Updated at : 17 Sep 2018 8:35 AM (IST)
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आमदनी हजारों में, खर्च लाखों में, साल में छह बार भी नहीं होता है बुक

देवघर : देवघर के शयनशाला में आमदनी अट्ठनी, खर्चा रुपैया वाली कहावत चरितार्थ हो रही है. शयनशाला से जितनी आय हो रही है, उससे अधिक उसकी मरम्मत पर खर्च किया जा रहा है. यह विवाह भवन सालोभर खाली रहता है. विवाह व भोज में शायद ही कोई बुकिंग करता हो. यह शिवगंगा के पूर्वी तट […]

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देवघर : देवघर के शयनशाला में आमदनी अट्ठनी, खर्चा रुपैया वाली कहावत चरितार्थ हो रही है. शयनशाला से जितनी आय हो रही है, उससे अधिक उसकी मरम्मत पर खर्च किया जा रहा है. यह विवाह भवन सालोभर खाली रहता है. विवाह व भोज में शायद ही कोई बुकिंग करता हो. यह शिवगंगा के पूर्वी तट पर स्थित हरिहरबाड़ी में बनाया गया है.
जिस समय यह भवन बनाया गया था, उस समय आसपास कोई विवाह भवन नहीं था. इससे डिमांड अधिक थी, लेकिन सुविधा बढ़ाने की बजाय मरम्मत पर अधिक ध्यान दिया जाने लगा. इससे धीरे-धीरे लोग यहां कम पहुंचने लगे हैं. लोग सुविधायुक्त भवन खोजते हैं. इससे पुराना देख कर अब कोई बुक करना नहीं चाहता है. बावजूद निगम अपनी ओर से मरम्मत पर काफी पैसा खर्च करना समझ से परे है.
देखभाल में हो रहे हजारों खर्च: शयनशाला की देखभाल के लिए दैनिक वेतन पर एक कर्मी को रखा गया है. इसकी सैलेरी लगभग सात हजार रुपये है. इसके अलावा बुकिंग के लिए निगम कार्यालय में एक कर्मी है. दोनों की सैलेरी को जोड़ दे, तो प्रति वर्ष एक लाख से अधिक है.
साल में छह दिन भी नहीं होता है बुक : शयनशाला साल में छह बार भी बुक नहीं हो पाता है. इसके चारों ओर विवाह भवन हैं. सभी विवाह भवन हमेशा बुक रहता है. सभी जगह बुकिंग करने के लिए तीन-चार माह पहले नंबर लगाना पड़ता है.
अब तक मरम्मत में हो चुके हैं लाखों खर्च: इसकी मरम्मत में लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं. पहली बार 2007 में एक लाख से अधिक खर्च किया गया था. इसके बाद पुन: 2012-2013 में 16.58 लाख खर्च किये गये. एक बार फिर मरम्मत की बात चल रही है.
पुलिस बल रखने के आता है काम : वर्तमान में शयनशाला में केवल पुलिस बल को रखा जाता है. श्रावणी मेला में पुलिस ठहरते हैं. इसके बाद 11 माह खाली रहता है.
पार्षद ने कहा
क्षेत्र की पार्षद शुभलक्ष्मी देवी ने कहा कि शयनशाला बहुत ही अच्छी जगह पर है. इसे आधुनिक सुविधाओं से युक्त विवाह भवन बनाने की जरूरत है. निगम के पास विवाह भवन का फंड भी आया है. इससे निगम की आमदनी में बढ़ोतरी होगी. वह बोर्ड की बैठक में पहले भी मुद्दा उठा चुकी है. बावजूद हर बार मरम्मत करके जनता की गाढ़ी कमाई को बर्बाद किया जा रहा है. लोग सुविधा मिलने से पैसा देने में पीछे नहीं हटते हैं. शयनशाला के आस-पास के सभी विवाह भवन बुक रहता है. शयनशाला खाली रहता है.
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