देवघर से साहिबगंज तक बनेगा हाथी कॉरिडोर
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :18 Jun 2018 6:09 AM
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देवघर : हाथियों के जीवन को सुरक्षित करने व मानव से टकराहट रोकने के लिए पहली बार संताल परगना में हाथियों के लिए कॉरिडोर बनाने की रूपरेखा तैयार की गयी है. लगातार देवघर समेत संताल परगना में हाथियों के रास्ता भटकने से जान-मान का नुकसान हो रहा है. कई लोगों की मौत तक हो चुकी […]
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देवघर : हाथियों के जीवन को सुरक्षित करने व मानव से टकराहट रोकने के लिए पहली बार संताल परगना में हाथियों के लिए कॉरिडोर बनाने की रूपरेखा तैयार की गयी है. लगातार देवघर समेत संताल परगना में हाथियों के रास्ता भटकने से जान-मान का नुकसान हो रहा है. कई लोगों की मौत तक हो चुकी है.
वन विभाग ने देवघर, दुमका, गोड्डा व साहिबगंज में हाथियों के लिए कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है. पिछले वर्ष पीसीसीएफ स्तर के अधिकारियों के साथ देवघर में संताल परगना व गिरिडीह के वन विभाग के पदाधिकारियों की बैठक में हाथियों का कॉरिडोर बनाने पर बिंदुवार रिपोर्ट ली गयी थी. इसके बाद उच्चस्तीय कमेटी ने संताल परगना में वन भूमि, जंगल व मार्गों का सर्वे कर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण संस्थान को हाथियों के लिए कॉरिडोर का प्रस्ताव भेज दिया. यह एक तरह से हाथियों का गलियारा होगा.
गिरिडीह से देवघर होकर गुजरेगा कॉरिडोर : वन विभाग के अनुसार, हाथियों का कॉरिडोर बोकारो व धनबाद के जंगलों से गिरिडीह होते हुए देवघर से दुमका, गोड्डा व साहिबगंज तक बनेगा. इस कॉरिडोर में इन जिलों के बड़े जंगलों को शामिल किया गया है. देवघर के साथ-साथ दुमका के काठीकुंड, गोड्डा के सुंदरपहाड़ी के जंगलों में बड़े क्षेत्र में कॉरिडोर निर्माण की योजना है. हाथियों का यह गलियारा हाथियों के झुंड को वृहद पर्यावास से जोड़ेगा. यह हाथियों के आवागमन के लिए पाइप लाइन का कार्य करेगा.
क्या होता है हाथी कॉरिडोर
हाथी का गलियारा भूमि का एक संकीर्ण भाग होता है, जो दो बड़े जंगलों को आपस में जोड़ता है. वन विभाग के अनुसार हाथी अपने परंपरागत रास्ते का ही उपयोग करते हैं. पीढ़ी दर पीढ़ी एक ही रास्ते से आना-जाना करते हैं. रास्ते में थोड़ा बदलाव हाथियों को भड़का सकता है.
हाथी जमीन में होने वाले हलचल को पकड़ लेते हैं. यदि उनको एहसास हो गया कि आवागमन वाले मार्ग पर या उसके नीचे किसी तरह की हलचल है, तो उत्पात मचा सकते हैं. इसलिए उनके लिए बिल्कुल अलग से रास्ता बनेगा. कॉरिडोर में ऊंचाई पर सड़कों का निर्माण होगा. वाहन गुजरने वाली सड़कों पर फ्लाइओवर बनेगा. गलियारे के किनारे अधिक से अधिक जंगल लगाये जायेंगे. रेल मार्ग व नहरों के किनारे कॉरिडोर का बिल्कुल अलग मार्ग होगा.
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