14 वर्षों में ही दरकने लगा रांची से देवघर को जोड़ने वाला पुल
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 May 2018 6:14 AM
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देवघर : काशी विश्वनाथ में तो निर्माणाधीन पुल ढहने से कई जानें चली गयीं, वहीं बैद्यनाथधाम में एक पुल ऐसी अवस्था में पहुंच गया है जो कई जिंदगी छिन सकता है. रांची व दिल्ली के एनएच से देवघर को जोड़ने वाला सत्संग-भिरखीबाद रोड स्थित डढ़वा नदी के उच्चस्तरीय पुल का निचला हिस्सा टूट-टूटकर गिर रहा […]
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देवघर : काशी विश्वनाथ में तो निर्माणाधीन पुल ढहने से कई जानें चली गयीं, वहीं बैद्यनाथधाम में एक पुल ऐसी अवस्था में पहुंच गया है जो कई जिंदगी छिन सकता है. रांची व दिल्ली के एनएच से देवघर को जोड़ने वाला सत्संग-भिरखीबाद रोड स्थित डढ़वा नदी के उच्चस्तरीय पुल का निचला हिस्सा टूट-टूटकर गिर रहा है. पुल में लगी छड़ें पूरी तरह दिखने लगी है.
पुल पर कई जगह दरारें पड़ चुकी है. इसके बाद भी विभाग बेखबर बना हुआ है. क्या काशी के तर्ज पर बाबाधाम में भी विभाग बड़े हादसे का इंतजार हो रहा है. आरइओ से राज्य संपोषित योजना के तहत 1.88 करोड़ की लागत से इस पुल का निर्माण 2003 में शुरू हुआ था, 31 जनवरी 2006 को पुल का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा व तत्कालीन आरइओ मंत्री हरिनारायण राय ने किया था. अब तो महज 14 वर्षों में ही पुल टूटने लगा है.
पुल पर बालू चोर व ठेकेदार के लूट के निशान : डढ़वा नदी से पिछले कुछ वर्षों में बालू की चोरी इतने बड़े पैमाने पर हुई कि जियोलॉजिकल टीम ने सर्वे में डढ़वा नदी में बालू की कमी बता दी गयी. डढ़वा नदी के पुल के पास से बालू चोरों व ठेकेदार की लूट किस प्रकार हुई है. यह पुल के पाये के पास टूटे का निशान बता रहा है. ठेकेदारों ने पहले पुल के गुणवत्ता में घालमेल किया, पुल बनने के बाद बालू चारों ने बालू उठा लिया. इस पर प्रशासन ने कभी गंभीरता से रोक नहीं लगायी.
100 टन क्षमता वाले पुल पीडब्ल्यूडी के हवाले
आरइओ से जब यह पुल बनी थी, उस समय यह सड़क भी ग्रामीण सड़क के तौर आरइओ की थी. आरइओ के पुल की क्षमता 100 टन रहती है. कुछ वर्षाें बाद इस सड़क को पीडब्ल्यूडी को हैंडओवर कर दिया गया. अब यह सड़क टू लेन बन चुकी है. इसमें वाहनों का दबाव भी बढ़ गया है. पीडब्ल्यूडी के पुल में 300 टम क्षमता वाली पुल की जरूरत होती है. पीडब्ल्यूडी को हैंडओवर होने के बाद पुल का मेंटेनेंस भी वर्षों से नहीं हुआ है.
रोज गुजरती है 1800 गाड़ियां
सत्संग-भिरखीबाद रोड में करीब 1800 की संख्या में रोज बड़ी गाड़ियां गुजरती है. एक तरह से इस सड़क को कॉमर्शियल मार्ग भी कहा जाता है. डुमरी के पास एनएच से जुड़ने वाली इस मार्ग से बड़ी संख्या में भारी वाहनों का भी आवागमन होता है. वाहन जब डढ़वा पुल से गुजरती है तो पुल तेज गति से हिलता भी है. पुल में पिलर के लोहे का नीचला हिस्सा तीन से चार फीट बाहर निकल चुका है. पिलर जमीन से उपर आ चुका है.
कौन-कौन मार्ग को जोड़ती है डढ़वा पुल
यह पुल देवघर से रांची जोड़ने वाली मुख्य मार्ग के साथ-साथ धनबाद समेत देश भर के शहरों को जोड़ती है. डुमरी के पास एनएच से जुड़ने के कारण इस मार्ग से पटना, बनारस, कानपुर, आगरा, दिल्ली समेत कई शहरों का लिंक रोड है. यह पुल देवीपुर में एम्स को जोड़ने वाली मुख्य मार्ग में है.
पहले भी डढ़वा का पुल गिर चुका है
डढ़वा नदी पर जसीडीह-देवघर मार्ग में भी पुल 2011 में गिर चुका है. इस बड़े हादसे में लोग बाल-बाल बचे थे. यह पुल गिरने से देवघर आने-जाने वाला मुख्य मार्ग बाधित हो गया था. हालांकि, उस वक्त बारिश के कारण आवागमन नहीं होने के कारण तो कोई बड़ी घटना नहीं हुई. लेकिन, यदि समय रहते ही सत्संग-भिरखीबाद रोड के पुल को भी तकनीकी रुप से मजबतू नहीं किया गया तो बड़ा हादसा हो सकता है.
ऐसे तो पुल हो जायेंगे जमींदोज
मधुपुर. मनमाने ढंग से पुल के नजदीक से बालू उठाव के कारण कई पुलों की नींव खोखली होती जा रही है. जैसे-तैसे बालू उठाव होने से कई जगह निर्मित पुलों को खतरा है. मधुपुर व मथुरापुर के बीच नवाम पतरो हॉल्ट के बीच से नियमित रूप से सुबह से ही अवैध रूप से बालू उठाव शुरू हो जाता है.
इससे अंग्रेजों के जमाने के बने सौ से अधिक पुराने पुल का पाया भी धीरे-धीरे खोखला होता जा रहा है. इसे रोकने के लिए रेलवे प्रशासन ने बड़े-बड़े बोल्डर नींव में लगा कर व तार की जाली बिछा दी गयी है. साथ ही एइएन से इसे रोकने के लिए कई बार स्थानीय प्रशासन को पत्राचार भी पूर्व में किया गया है.
ऐसा ही कुछ हाल मधुपुर-देवघर मुख्य पथ पर मोहनपुर घाट पर पतरो नदी पर बने उच्च स्तरीय पुल के पास देखने को मिल रहा है. यहां बालू उठाव और पानी बहाव के बाद पुल खोखला होता जा रहा है. इसके अलावा पतरो नदी के कसाठी-बेलटेकरी, टंडेरी घाट पर भी बड़े पैमाने पर पुल के निकट से वर्षों से वैध-अवैध ढंग से बालू उठाव होता आया है.
aपूर्व में कसाठी-बेलटेकरी घाट व लोहड़ाजोर घाट का खनन विभाग द्वारा बालू उठाव के लिए पट्टा भी दिया गया था, लेकिन नियम के अनुसार बालू का उठाव पुल के पांच सौ मीटर आसपास नहीं का निर्देश दिया था. कहीं भी इसका पालन नहीं हुआ.
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