सात गांवों में पुनासी नहर का काम रोका
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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नयी दर से मुआवजे की मांग पर अड़े ग्रामीण, विभाग बेबस देवघर : पहले तो पुनासी डैम व स्पील-वे का काम वर्षों तक विभिन्न कारणों से बंद रहा, जब हाइकोर्ट की निगरानी में डैम व स्पील-वे का काम चालू हुआ, तो अब पुनासी नहर का काम बाधित हो गया है. मोहनपुर प्रखंड से नहर के […]
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नयी दर से मुआवजे की मांग पर अड़े ग्रामीण, विभाग बेबस
देवघर : पहले तो पुनासी डैम व स्पील-वे का काम वर्षों तक विभिन्न कारणों से बंद रहा, जब हाइकोर्ट की निगरानी में डैम व स्पील-वे का काम चालू हुआ, तो अब पुनासी नहर का काम बाधित हो गया है. मोहनपुर प्रखंड से नहर के गुजरने वाले सात गांवों में ग्रामीणों ने पुनासी नहर का काम रोक दिया है. इसमें हिरणाटांड़, लोढ़ीवरण, विराज कुरुमटांड, शहरपुरा, गढ़यारी, ओंराबारी व देवथर गांव है. जिन रैयतों की जमीन से नहर गुजर रही है, उन रैयतों ने नयी दरों से जमीन व मकान का मुआवजा देने की मांग को लेकर काम बंद करा दिया है. जल संसाधन विभाग के अभियंता व ठेकेदार जब मशीन लेकर काम कराने पहुंचे, तो उन्हें अपनी जमीन पर एक इंच खुदाई नहीं करने दी. विरोध के बाद विभाग के अभियंता भी बेबस होकर वापस लौट आये. इन सात गांवों में करीब 65 एकड़ रैयती जमीन पर नहर की खुदाई होनी है.
जमुआ के रैयतों को नये दर से पैसा मिलने के बाद तेज हुई मांग : कटवन के समीप जमुआ मौजा के रैयतों को भूमि अधिग्रहण नीति 2013 के तहत नये दरों से मुआवजा राशि का भुगतान हुआ है. जुलाई 2017 में विभाग से उन्हें भुगतान किये जाने के बाद इन सात गांवों के रैयतों ने भी नयी दरों से मुआवजों की मांग तेज कर दी. विशेष भू-अर्जन पदाधिकारी द्वारा जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता को भेजी गयी रिपाेर्ट के अनुसार इन सात गांवों में 65 एकड़ भूमि के रैयतों की जमीन अधिग्रहण के लिए 1988 में ही अधियाचना कर दी गयी थी. इसमें विराजकुरुमटांड़ में एक, हिरणाटांड़ में पांच, लोढ़ीवरण में चार रैयतों ने पुराने दरों से मुअावजा भी प्राप्त किया है. जिन लोगों ने जमीन का मुआवजा नहीं लिया था, उनका पैसा पुराने दरों से ही कोषागार में 2015 में जमा कर दिया गया है.
विभाग ने प्रशासन से मांगी मदद
विशेष भू-अर्जन विभाग के अनुसार रैयतों में विराजकुरुमटांड़ में एक, हिरणाटांड़ में पांच व लोढ़ीवरण में चार रैयतों ने पुराने दरों से मुअावजा भी प्राप्त किया है. पुराने नियमों के अनुसार, अगर किसी मौजा में भूमि अधिग्रहण के बाद कोई रैयत ने मुआवजा राशि प्राप्त कर लिया, तो उस मौजा में सभी रैयतों को पुराने दरों से ही मुआवजा मिलेगा. केवल जुमआ गांव के एक भी रैयतों ने मुआवजा प्राप्त नहीं किया था, इसलिए उन्हें नये सिरे से भूमि अधिग्रहण नीति 2013 के तहत भुगतान हुआ. अधिग्रहित जमीन पर काम करने के लिए सुरक्षा-व्यवस्था की मांग को लेकर जल संसाधन विभाग ने प्रशासन से मदद भी मांगी है. पिछले दिनों कार्यपालक अभियंता जय प्रकाश चौधरी ने डीसी की बैठक में भी स्थिति से अवगत कराया था.
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