एलइडी लाइट की टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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अधर में योजना. दो माह से पड़े हैं 3.72 करोड़ जिप की बैठक में लिया गया था ऑनलाइन टेंडर का निर्णय निकाला गया ऑफलाइन मुहरबंद टेंडर देवघर : जिला परिषद से गांवों में लगने वाली एलइडी लाइट अब तक नहीं लग पायी है. करीब 3.72 करोड़ रुपये जिला परिषद को मुहैया कराये गये हैं, इस […]
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अधर में योजना. दो माह से पड़े हैं 3.72 करोड़
जिप की बैठक में लिया गया था ऑनलाइन टेंडर का निर्णय
निकाला गया ऑफलाइन मुहरबंद टेंडर
देवघर : जिला परिषद से गांवों में लगने वाली एलइडी लाइट अब तक नहीं लग पायी है. करीब 3.72 करोड़ रुपये जिला परिषद को मुहैया कराये गये हैं, इस राशि से प्रत्येक जिप सदस्यों की अनुशंसा पर 14.5 लाख रुपये की एलइडी लाइट लगायी जानी है.
जिला परिषद को दो माह पूर्व ही यह राशि मुहैया करा दी गयी है, लेकिन जिला परिषद अब तक एलइडी लाइट के टेंडर का ही निष्पादन नहीं कर पायी है. मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा एक दिसंबर को एलइडी लाइट का जो टेंडर निकाला है, अब उस टेंडर प्रक्रिया पर ही सवाल खड़ा हो गया है. इस टेंडर प्रक्रिया पर कई जिप सदस्यों ने आपत्ति दर्ज की है. जिप सदस्य कविता चौधरी, नूतन सिंह व इमरान अंसारी ने दर्ज आपत्ति में कहा है कि एलइडी लाइट का टेंडर ऑफलाइन आमंत्रित किया गया है, जो पूरी तरह से नियमों के विरुद्ध व मनमानी है. जिला परिषद की बैठक में ब्रांडेड कंपनी के एलइडी लाइट का टेंडर ऑनलाइन करने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया था, लेकिन
डिजिटलाइजेशन के इस दौर में ऑफलाइन टेंडर आमंत्रित कर बैठक के प्रस्ताव की अवहेलना की गयी है. ऑनलाइन टेंडर में पारदर्शिता की संभावना बनी रहती है.
क्या है टेंडर प्रक्रिया में
एक दिसंबर को निकाले गये टेंडर के अनुसार संवेदकों को एलइडी लाइट, तार, स्विच, एंगल व क्लेंप का मुहरबंद टेंडर आठ दिसंबर को विकास भवन में दोपहर तीन बजे तक जमा करना है. टेंडर के साथ 25 हजार रूपये का बैंक ड्रॉफ्ट मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के नाम से जमा करना है.
अॉनलाइन का है मापदंड
नेशनल इन्फॉर्मेशन सेंटर(एनआइसी) ने योजनाओं के टेंडर निष्पादन में पारदर्शिता बनाये रखने के लिए सरकार का कोई भी टेंडर ऑनलाइन करने का मापदंड तय किया है. ताकि कहीं से भी कोई कोई संवेदक बगैर कोई दबाव के टेंडर डाल सकते हैं. टेंडर वीलो डाले जाने पर इसमें सरकार के राजस्व को भी लाभ होता है. इसमें टेंडर मैनेज करने की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाती है.
कहते हैं जिला अभियंता
जिला अभियंता विजय कुमार सर्राफ ने कहा कि एलइडी लाइट का टेंडर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के स्तर से निकला है. जिला परिषद में ऑनलाइन टेंडर की सुविधा नहीं है, संसाधन के अभाव में ऑनलाइन टेंडर नहीं हो पा रही है. जिला परिषद में ऑनलाइन टेंडर की सुविधा चालू करने का प्रस्ताव तैयार किया जायेगा.
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