पोड़ैयाहाट में 275 एकड़ जमीन पर बनेगा कृषि विश्वविद्यालय

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देवघर: गोड्डा व संतालपरगना के लिए खुशखबरी है. गोड्डा जिले में केंद्र सरकार कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना करेगी. इसकी स्वीकृति केंद्र ने दे दी है. अब यहां के छात्रों को कृषि या एनिमल साइंस आदि की पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा. इस आशय का पत्र भारत सरकार के कृषि सचिव सह महानिदेशक त्रिलोचन […]

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देवघर: गोड्डा व संतालपरगना के लिए खुशखबरी है. गोड्डा जिले में केंद्र सरकार कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना करेगी. इसकी स्वीकृति केंद्र ने दे दी है. अब यहां के छात्रों को कृषि या एनिमल साइंस आदि की पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा. इस आशय का पत्र भारत सरकार के कृषि सचिव सह महानिदेशक त्रिलोचन महापात्र ने झारखंड की कृषि सचिव पूजा सिंघल को भेज दिया है. मिली जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय की स्थापना पर तकरीबन 1200 करोड़ तक का निवेश होगा.
गोड्डा के लिए नियम को शिथिल किया गया : केंद्रीय सचिव ने कहा है कि वैसे तो कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए तकरीबन 1000 एकड़ जमीन की जरूरत होती है.
लेकिन संताल परगना के गोड्डा में इस विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए नियमों को शिथिल किया गया है. केंद्र यहां 275.31 एकड़ जमीन पर कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना करेगी. केंद्रीय सचिव ने कहा कि बाद में जैसे-जैसे जमीन की जरूरत होगी, उसे विकसित किया जायेगा. केंद्र ने झारखंड सरकार से जमीन जल्द उपलब्ध कराने की बात कही है.
कृषि, एनिमल साइंस व अन्य विषयों की होगी पढ़ाई
विश्वविद्यालय में कृषि से संबंधित विषयों के अलावा एनिमल साइंस व अन्य विषयों की भी पढ़ाई होगी. इस कारण इस विश्वविद्यालय को कंजोजिट कृषि विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित होगा. ज्ञात हो कि पूर्व से देवघर के रिखिया में कृषि कॉलेज बनकर तैयार है. वहीं गोड्डा में भी कृषि कॉलेज है. इसी तरह संताल के अन्य जिले में भी कॉलेजों की स्थापना होने की बात है. इस तरह संताल परगना का यह विश्वविद्यालय इस क्षेत्र के किसानों व एग्रीकल्चर की पढ़ाई करने वालों के लिए वरदान साबित होगा.
क्या-क्या होगा कृषि विश्वविद्यालय में
कृषि विश्वविद्यालय और एलायड साइंस कॉलेजों की स्थापना भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आइसीएआर) के गाइडलाइन के अनुसार होता है. इसमें रिसर्च फार्म के लिए खेती योग्य जमीन जरूरी है. यह संस्थान वैसे स्थान पर विकसित किया जाता है जहां की 70 फीसदी आबादी कृषि पर निर्भर है. संताल परगना जहां अनुसूचित जन जाति बहुल इलाका है. ऐसे किसानों को अधिक से अधिक लाभ इस संस्थान से मिलेगा.
2010 से चल रहा प्रयास रंग लाया : निशिकांत
जब झारखंड के राज्यपाल एमओएच फारुक थे, उसी समय से संताल परगना में कृषि विश्वविद्यालय स्थापना का प्रयास शुरू हुआ. आग्रह पर उन्होंने एक अगस्त 2010 को तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखा था. उसके बाद मैंने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखा और संताल में विश्वविद्यालय मांगा. उक्त बातें गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने कही. उन्होंने कहा कि इसी पत्र के आधार पर संताल में आइसीएआर की स्थापना की स्वीकृति मिली. लेकिन तत्कालीन कृषि मंत्री योगेंद्र साव इसे संताल से उठा कर हजारीबाग ले गये. फिर मामला लटका रहा. प्रधानमंत्री जब नरेंद्र मोदी बने तब उक्त आइसीएआर के लिए राशि मिली और वहां खुला. निशिकांत ने कहा कि जब राज्य के सीएम रघुवर दास बने. उन्हें मैंने पूरी जानकारी दी, तब का पत्र देखकर निर्णय लेने का आग्रह किया. फिर इसमें लोगों ने अड़ंगा लगाया. कोई दुमका तो कोई साहेबगंज तो कोई अन्यत्र इस विश्वविद्यालय को खोलना चाह रहे थे. तब सीएम के निर्देश पर संताल के सभी जिले के डीसी से 600 एकड़ जमीन की उपलब्धता संबंधी प्रतिवेदन मांगा गया. सिर्फ गोड्डा के डीसी ने कहा कि 275 एकड़ जमीन उपलब्ध है. इसी क्रम में कृषि मंत्री से भी मेरी बात हुई. उन्होंने दवाब बनाया कि गोड्डा में ही विश्वविद्यालय की स्थापना होगी. तब राज्य केबिनेट ने गोड्डा में इस संस्थान की स्थापना की स्वीकृति दी और केंद्र को पत्र भेजा गया. अमूमन गाइडलाइन के अनुसार 1000 एकड़ से कम में इस संस्थान की स्थापना नहीं होती है. लेकिन संताल की जनता के लिए केंद्र ने नियम कि शिथिल किया और 275 एकड़ में ही इसे स्थापित करने की स्वीकृति दी. इस तरह इतने दिनों का प्रयास रंग लाया है. यह गोड्डा व संताल के लोगों की जीत है.
कब-कब बढ़ी फाइल
01.08.2010 को तत्कालीन राज्यपाल एमओएच फारुक ने केंद्र को भेजा पत्र
05.08.2010 को सांसद ने लिखा केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार से मांगा विश्वविद्यालय
01.09.2010 को तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने निशिकांत को पत्र लिख दी जानकारी
07.03.2011 को गोड्डा सांसद ने पुन: वर्तमान पीएम को पत्र लिख मांगा कृषि विश्वविद्यालय
16.03.2011 को केंद्रीय कृषि सचिव ने दिया जवाब
10.08.17 झारखंड के विशेष सचिव ने केंद्रीय कृषि सचिव को भेजा पत्र
08.11.17 को मुख्य सचिव ने फाइनली पौड़ेयाहाट में स्थापना की स्वीकृति देने की बात कही
2017 में सीएम रघुवर की केबिनेट ने दी स्वीकृति
09.09.2017 को केंद्रीय कृषि सचिव ने दी स्वीकृति की जानकारी
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