Deoghar News : 108 एंबुलेंस के चालक गये अनिश्चितकालीन हड़ताल पर, पहले दिन 15 गर्भवती महिलाओं को नहीं मिली सुविधा

Published by : AMRENDRA KUMAR Updated At : 18 Jun 2025 2:03 AM

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जिले के 108 एंबुलेंस चालक व कर्मी अपनी मांगों को लेकर मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गये. इस दौरान सभी एंबुलेंस चालक व कर्मियों ने सदर अस्पताल परिसर में बैठक कर कंपनी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

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संवाददाता, देवघर : जिले के 108 एंबुलेंस चालक व कर्मी अपनी मांगों को लेकर मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गये. इस दौरान सभी एंबुलेंस चालक व कर्मियों ने सदर अस्पताल परिसर में बैठक कर कंपनी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. इधर, एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल से जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गयी है. विभाग से मिली जानकारी अनुसार, जिले में वर्तमान में 108 एंबुलेंस की संख्या 20 है, जिनसे जिले भर के मरीजों को नि:शुल्क सुविधा दी जा रही है. साथ ही दुर्घटना में घायल मरीजों को भी 108 एंबुलेंस की ही सुविधा मिलती है. स्वास्थ्य सेवा चरमरायी : जिले में 108 एंबुलेंस के चालक व कर्मियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने के बाद जिले भर के मरीजों को काफी परेशानी हो रही है. विभाग से मिली जानकारी अनुसार 108 के कंट्रोल रूम को मंगलवार की शाम तक 15 कॉल आये थे, जिनमें सभी गर्भवती महिलाएं थीं, जिन्होंने अस्पताल पहुंचाने को लेकर कॉल किया गया था. इस दौरान कंट्रोल रूम से सभी गर्भवती महिलाओं के परिजनों को कहा गया कि एंबुलेंस चालक व कर्मी हड़ताल पर हैं, इसलिए एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल सकेगी. इसके बाद परिजनाें ने निजी एंबुलेंस व अन्य वाहनों से गर्भवती महिलाओं को विभिन्न अस्पतालों में पहुंचाया. इस दौरान उन्हें काफी परेशानी हुई. एंबुलेंस चालकों की क्या हैं मांगें देवघर जिला 108 एंबुलेंस चालक व कर्मी संघ के अध्यक्ष मुकेश पंडित, उपाध्यक्ष अभय कुमार, कोषाध्यक्ष संजीव कुमार, दिनेश कुमार समेत अन्य कर्मियों ने बताया कि पूर्व में भी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर गये थे, इसके बाद विभाग ने आश्वासन दिया था कि उनकी मांगें जल्द पूरी की जायेगी. लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद न तो मांगें मानी गयी और न ही किसी तरह की पहल की गयी. उन्होंने कहा कि पांच फरवरी को सम्मान फाउंडेशन कंपनी की ओर से झारखंड में 108 एंबुलेंस के कर्मचारियों को गुमराह कर काम ले रही हैं. 108 कर्मचारी को झारखंड सरकार की न्यूनतम मजदूरी दर नहीं दी जा रही है. किसी को 2600 रुपये तो किसी को 6000 रुपये और किसी को 9000 रुपये मानदेय के रूप में दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अबतक ज्वाइनिंग लेटर नहीं दिया गया है. हमें ज्वाइनिंग लेटर और आई कार्ड दिया गया. हम सभी को बकाये पीएफ और इएसआइ के पैसा दिये जायें. उन्होंने कहा कि नवंबर 2017 में आयी जेडएचएल कंपनी जाते समय कोरोना की प्रोत्साहन राशि और ग्रेच्यूटी लेकर चली गयी है, उन राशियों का भुगतान किया जाये. अगस्त 2023 में आयी जीवीके कंपनी जाते समय पीएफ और 74 दिनों की सैलरी लेकर चली गयीं, उसका भुगतान किया जाये. पांच फरवरी 2025 में आया सम्मान फाउंडेशन की ओर से फरवरी, मार्च, अप्रैल और मई की सैलरी नहीं दी गयी है, उसका भुगतान किया जाये. इसके अलावा भी कई प्रकार की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं. उधर मामले को लेकर सिविल सर्जन डाॅ युगल किशोर चौधरी ने बताया कि चालकों से मांग पत्र मांगा गया है. उसे विभाग को भेजा जायेगा, ताकि समस्या का समाधान हो सके.

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