शिवलिंग पर अबीर चढ़ाने पर लगे प्रतिबंध : सरदार पंडा
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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देवघर : उज्जैन के महाकाल मंदिर में शिवलिंग के क्षरण को देखते हुए आरओ पानी से जलाभिषेक संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देवघर के बाबा मंदिर में भी इस तरह की चर्चाएं शुरू हो गयी है. इस पर तीर्थ पुरोहितों की अपनी-अपनी राय है. बाबा मंदिर के सरदार पंडा अजीतानंद ओझा ने कहा […]
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देवघर : उज्जैन के महाकाल मंदिर में शिवलिंग के क्षरण को देखते हुए आरओ पानी से जलाभिषेक संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देवघर के बाबा मंदिर में भी इस तरह की चर्चाएं शुरू हो गयी है.
इस पर तीर्थ पुरोहितों की अपनी-अपनी राय है. बाबा मंदिर के सरदार पंडा अजीतानंद ओझा ने कहा कि कोर्ट का फैसला है. कोर्ट के फैसले पर कुछ नहीं कहना, लेकिन यह दुख की बात है कि शिवलिंग का क्षरण हो रहा था और मंदिर कमेटी ने कुछ नहीं किया. शिवलिंग की रक्षा के लिए कोर्ट को आगे आना पड़ा. जहां तक बाबा बैद्यनाथ मंदिर की बात है, यहां गंगाजल से बाबा का अभिषेक होता है. वहीं आजकल रंग-बिरंगे अबीर चढ़ाने की परंपरा बढ़ती जा रही है. यह शिवलिंग के लिए हानिकारक है. अबीर में एसिड की मात्रा होने के अलावा तरह-तरह का केमिकल होता है.
अबीर से होता है शिवलिंग को नुकसान : दुर्लभ
अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के वरीय उपाध्यक्ष दुर्लभ मिश्र का कहना है कि आरओ के पानी में मैग्नीशियम, कैल्शियम, आयरन आदि निश्चित मात्रा में उपलब्ध रहता है. इसके जल से पत्थर पर रियेक्शन की पूरी संभावना होती है. महाकाल में हजारों वर्ष पूर्व भोलेनाथ की भस्म आरती मुर्दा के भस्म से होती थी. बाद में गाय के गोबर से बने गोयठे से भस्म आरती का प्रचलन शुरू हुआ. इस कारण लिंग में क्षरण प्रारंभ हुआ. मंदिर कमेटी को दोनों भस्मों की जांच कर निर्णय लेना चाहिए. वहीं बाबा मंदिर की बात करें, तो यहां पर सुल्तानगंज व इलाहबाद का जल चढ़ता है. लेकिन शिवलिंग को एसिड युक्त अलग-अलग रंगों के अबीर से नुकसान हो रहा है. मंदिर प्रबंधन को इन चीजों पर प्रतिबंध लगाना चाहिए.
बाबा पर अबीर की जगह चढ़ाया जाये चंदन : डॉ सुरेश
पंडा धर्मरक्षिणी सभा के अध्यक्ष डॉ सुरेश भारद्वाज ने कहा कि बाबा मंदिर में सबसे पहले अबीर चढ़ाने की परंपरा को बंद कर बाबा पर चंदन चढ़ाने की परंपरा शुरू होनी चाहिए. रही बात शुद्ध जल की, तो बाबा पर अधिकतर गंगाजल ही चढ़ता है. सुल्तानगंज में गंगा के जल में फूल सहित अन्य सामग्री डाल दी जाती है. इससे दो से तीन दिन में जल प्रदूषित हो जाता है. इस पर रोक लगनी चाहिए. इसे लेकर संस्था की ओर से भी जागरूकता अभियान चलाया जायेगा.
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