कैसे मिले न्याय: परेशान हैं दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट के मामलों के पीड़ित, रिपोर्ट लिखने में डॉक्टर करते हैं देरी
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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देवघर: जिले के विभिन्न थानों में दुष्कर्म व पॉक्सो के तहत दर्ज कांडों के अनुसंधान की मेडिकल रिपोर्ट समय पर नहीं मिलने की वजह से पुलिस के लिए कई मुश्किलें खड़ी हो गयी हैं. कई कांडों का अनुसंधान अटका पड़ा है. इन कांडों की पीड़िता की चिकित्सकीय व उम्र की जांच सदर अस्पताल में करायी […]
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देवघर: जिले के विभिन्न थानों में दुष्कर्म व पॉक्सो के तहत दर्ज कांडों के अनुसंधान की मेडिकल रिपोर्ट समय पर नहीं मिलने की वजह से पुलिस के लिए कई मुश्किलें खड़ी हो गयी हैं. कई कांडों का अनुसंधान अटका पड़ा है. इन कांडों की पीड़िता की चिकित्सकीय व उम्र की जांच सदर अस्पताल में करायी जाती है. किंतु सदर अस्पताल से रिपोर्ट मिलने में पुलिस को देर हो रही है.
मेडिकल रिपोर्ट के बिना कांडों के अनुसंधानकों को डायरी लिखने में कठिनाई होती है. जून माह से अब तक के दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट की 18 पीड़िता की चिकित्सीय जांच करायी गयी है. इनमें से 10 कांडों में पीड़िता की चिकित्सीय व उम्र जांच रिपोर्ट सदर अस्पताल से आइओ को नहीं मिली. इससे कांडों के निष्पादन में कठिनाई हो रही है. विभिन्न थानों के आइओ सदर अस्पताल का चक्कर काट रहे हैं.
महिला चिकित्सक से स्पष्टीकरण
सदर अस्पताल की एक महिला डॉक्टर द्वारा छह दुष्कर्म व पॉक्सो कांडों की चिकित्सीय जांच की गयी है. उक्त मामलों में अब तक रिपोर्ट नहीं लिखी गयी है. इस वजह से सदर अस्पताल के डीएस विजय कुमार द्वारा उन्हें कारणपृच्छा भी की गयी है. उधर जानकारों की मानें तो रेप व पोक्सो कांडों की पीड़िता की जांच रिपोर्ट तीन दिनों के अंदर अस्पताल द्वारा दी जानी चाहिये.
इन 10 कांडों में रिपोर्ट है पेंडिंग
चितरा थाना कांड संख्या 56/17, पालोजोरी थाना कांड संख्या 91/17 व 92/17, मोहनपुर थाना कांड संख्या 180/17, मधुपुर महिला थाना कांड संख्या 17/17, मधुपुर थाना कांड संख्या 216/17, कुंडा थाना कांड संख्या 85/17, करौं थाना कांड संख्या 58/17, सारठ थाना कांड संख्या 132/17 व जसीडीह थाना कांड संख्या 301/17 में सदर अस्पताल के डॉक्टर द्वारा चिकित्सकीय रिपोर्ट नहीं लिखी गयी है.
कहते हैं उपाधीक्षक
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ विजय कुमार का कहना है कि पैथोलॉजिकल व एक्सरे आदि की रिपोर्ट नहीं मिलने से देर होती है. एक मामले में महिला चिकित्सक से स्पष्टीकरण मांगा गया है. किन कारणों से चिकित्सीय जांच रिपोर्ट पेंडिंग है, इसका पता करेंगे.
कहती हैं एसपी
देवघर एसपी ए विजयालक्ष्मी कहती हैं कि पॉक्सो कांडों में पीड़िता की चिकित्सीय जांच रिपोर्ट नहीं मिलने से अनुसंधान में कठिनाई होती है. इसका लाभ आरोपित को भी मिलने की संभावना रहती है. वहीं साक्ष्य नष्ट होने का डर भी बना रहता है. रिपोर्ट में देर की वजह से आरोपित गवाह को भी प्रभावित कर सकते हैं. दुष्कर्म व पॉक्सो की मेडिकल रिपोर्ट में देरी पर डीसी से पत्राचार किया गया है, ताकि सिविल सर्जन को निर्देश दिया जा सके.
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