देवघर में महज तीन हजार गो-माता पर 75 हजार लीटर दूध पिलाने की जिम्मेवारी !
झारखंड में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने व पशुपालन से रोजगार सृजित करने की योजना मंथर गति से चल रही है. देवघर प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थल है. बाबा नगरी में दूध व अन्य दुग्ध उत्पादों की बड़ी मांग है. दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गठित झारखंड मिल्क फेडरेशन इस मांग की पूर्ति […]
फेडरेशन के माध्यम ये दूध को रिफाइन कर अलग-अलग उत्पाद बना कर मार्केट में बेचने की व्यवस्था की गयी. ब्रांड का नाम दिया गया- मेधा. इसे किसानों को घर बैठे बैंक खाते के माध्यम से पेमेंट करने का जिम्मा दिया गया. इसके बावजूद विभाग देवघर में दूध की खपत के अनुरूप इसकी मांग पूरी नहीं कर पा रहा है. एक रिपोेर्ट के अनुसार देवनगरी में हर दिन 70 से 75 हजार लीटर दूध की खपत है. श्रावणी मेले में यह मांग दोगुनी से भी अधिक हो जाती है. झारखंड मिल्क फेडरेशन की ओर से हर दिन मेधा ब्रांड का दूध उत्पादन 14 हजार लीटर ही है. जिसमें फेडरेशन आठ हजार लीटर दूध व दो हजार लीटर लस्सी, छेना, पनीर व घी आदि को मार्केट में बेच रहा है. शेष बचा दूध रांची भेज दिया जाता है. रिपोर्ट के अनुसार मार्केट में दूसरे राज्यों की कंपनियों का दूध अधिक बिकता है. देव नगरी में हर दिन करीब आधा दर्जन कंपनियों का दूध मार्केट में पहुंच रहा है.
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