.चतरा पशु मेला की मिटती जा रहा है पहचान, दायरा भी सिमटा

चतरा पशु मेला की पहचान मिटता जा रही है.
28 सीएच 14- मेला में आया पशु. 16 लाख में हुआ डाक, नहीं हैं कोई सुविधा चतरा. चतरा पशु मेला की पहचान मिटता जा रही है. दायरा सिमटता जा रहा है. मेला में कम पशु व्यापारी पहुंच रहे हैं. एक माह तक चलने वाला यह पशु मेला 10-15 दिनों में तक ही चल पा रहा है. यहां दो दशक पूर्व दूसरे राज्यों से पशु व्यापारी मवेशियों की खरीद-बिक्री करने आते थे. अब कम लोग ही पहुंच रहे है. उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल में इस मेले की अलग पहचान थी. मेला में एक से बढ़ कर नस्ल के पशु पहुंचते थे. मनोरंजन के भी कई तरह का साधन होते थे. जिलेभर के लोग खरीदारी करने आते थे. लेकिन नवमी, दशमी, 11वीं के दिन सबसे अधिक भीड़ रहती है. पहले जतराहीबाग से लेकर नगवां तक मेला लगता था. समाहरणालय बनने के बाद विनय भारती पार्क के पास मेला लगता था. लेकिन वहां भी डीसी, एसपी व पीडीजे आवास बनने से मेला आगे बढ़ गया. फिलहाल चतरा कॉलेज व जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के इर्द गिर्द मेला लग रहा है. मेला का नगर पालिका द्वारा डाक कराया गया है. 16 लाख में डाक हुआ है, लेकिन व्यापारियों व मेला पहुंचने वाले लोगो को काई सुविधा नहीं मिल रही है. मेला में दुकान लगाने वाले लोगों को भी अधिक राशि देनी पड़ रही है. सुरक्षा भी भगवान भरोसे है. चतरा-इटखोरी पथ में मेला लगता है. सड़क पर हमेशा भीड़ लगी रहती है. वाहनो के परिचालन में परेशानी होती है.
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