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49 साल पुराना है संत तेरेसा चर्च

Updated at : 21 Dec 2024 9:24 PM (IST)
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49 साल पुराना है संत तेरेसा चर्च

क्रिसमस आने में अब कुछ दिन ही शेष है. शहर से सटे बभने में स्थित संत तेरेसा चर्च में तैयारी शुरू हो गयी है. चरनी सजने लगी है. संत तेरेसा चर्च 49 साल पुराना है.

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चतरा. क्रिसमस आने में अब कुछ दिन ही शेष है. शहर से सटे बभने में स्थित संत तेरेसा चर्च में तैयारी शुरू हो गयी है. चरनी सजने लगी है. संत तेरेसा चर्च 49 साल पुराना है. कैथोलिक आश्रम परिसर में बना इस चर्च का निर्माण वर्ष 1975 में किया गया था. तब से लेकर आजतक चर्च में प्रार्थना, भजन व अराधना किया जाता है. साथ ही हर वर्ष 25 दिसंबर को क्रिसमस डे मनाया जाता हैं, जिसमें काफी संख्या में ईसाई धर्मावलंबी शामिल होते हैं. 1975 के पूर्व नाजरेथ विद्या निकेतन स्कूल परिसर में क्रिसमस डे मनाया जाता था. मर्दनपुर गांव में क्रिसमस डे मनाया जाता था, जहां हजारीबाग से फादर आते थे. इसके बाद 1975 में चर्च बना, तब से चर्च में ही क्रिसमस डे मनाया जाता हैं. चर्च का प्रथम फादर स्व फुलजेंस कुजूर थे. वर्तमान में दो फादर चर्च में हैं, जिसमें फादर नबोर कुजूर व फादर तिलेसफोर बाड़ा शामिल हैं. फादर नबोर 2015 से चर्च में हैं. इससे पूर्व फादर विजय टेटे थे. क्रिसमस डे के अवसर पर चर्च में रात 11 बजे अराधना व बाइबल पाठ किया जाता हैं. मनन चिंतन व प्रभु यीशु के संदेश को सुनाया जाता हैं. प्रेम, भाईचारा, शांति व न्याय के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है. साथ ही प्रभु यीशु के बताये मार्ग पर चलने का आह्वान किया जाता है. रात 12 बजे प्रभु यीशु का बाल अवस्था अवतार लेते हैं. इसके बाद पूरा चर्च रोशनी से जगमगा उठता है. साथ ही एक दूसरे से मिलते-जुलते हैं और क्रिसमस डेर की बधाई देते हैं. अराधना होती हैं. प्रभु यीशु के दर्शन के लिए चरनी में भीड़ उमड़ती हैं. रातभर यह सिलसिला चलता रहता हैं. सुबह आठ बजे प्रार्थना किया जाता हैं. इसके बाद दिनभर चर्च गुलजार रहता हैं. दूसरे धर्मावलंबियों के लोग भी काफी संख्या में यहां पहुंचते हैं. प्रभु यीशु का दर्शन करते हैं. क्रिसमस डे के शेष तीन दिन बजे हैं. क्रिसमस डे को लेकर तैयारी जोरो से की जा रही है. चर्च को सजाया जा रहा हैं. साफ-सफाई व रंग-रोगन किया जा रहा हैं.

कई गांवों से पहुंचते हैं लोग

क्रिसमस डे पर संत तेरेसा चर्च में लगभग 500 ईसाई धर्मावलंबी पहुंचते हैं. यहां गेरी, मर्दनपुर, गिद्धौर के खलारी, कान्हाचट्टी के कठौतिया, सिमरिया के जरही, देल्हो, शिवराजपुर, बगरा मोड़, संघरी, लरकुआ, पकरिया, बभने, डाढ़ा, सजना गांव से ईसाई धर्मावलंबी पहुंचते हैं.

प्रभु यीशु प्रेम व भाइचारे का संदेश दिया : फादर

फादर नबोर कुजूर ने कहा कि 25 दिसंबर को प्रभु यीशु का जन्म पर क्रिसमस डे मनाया जाता है. इस दिन विशेष रूप से उन्हें याद किया जाता है. ईश्वर की योजना मनुष्य को बचाने के लिए थी, इसी को लेकर प्रभु यीशु मनुष्य का अवतार लिया. ईश्वर मानव के रूप में अवतार लिये. हम मनुष्यों को पाप से बचाने के लिए आये. जोसेफ मरियम से जन्म लिया. वे एक गरीब परिवार में जन्म लिया था. वे काफी शक्तिशाली थे. इनमें मानव के साथ-साथ ईश्वर का स्वभाव भी था. यीशु ईश्वर होते हुए भी मनुष्य के रूप में जन्में. मनुष्य के रूप में दुख तकलीफ सहा और ईश्वर के रूप में प्रेम, भाईचारे, न्याय, शांति व आनंद का संदेश दिया. उनके हाथों से बड़े-बड़े चमत्कार हुए. अंधों को आंख दिया. मुर्दों को जिंदा किया और लोगो को पाप की गुलामी से मुक्त किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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