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Chatra: लापता दिव्यांग मुन्नी का शव नौकीबांध पहाड़ पर मिला, ईनाम की घोषणा के बाद भी सफलता नहीं; SIT भी फेल

24 Jan, 2026 9:37 pm
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जांच में जुटी पुलिस और लाल घेरे में मुन्नी की फाइल फोटो.

जांच में जुटी पुलिस और लाल घेरे में मुन्नी की फाइल फोटो.

Chatra: चतरा के गिद्धौर थाना क्षेत्र के गांगपुर गांव से लापता हुई दिव्यांग बच्ची मुन्नी कुमारी का शव मिला है. बच्ची का शव मिलने से पूरे इलाके के लोग आक्रोशित हैं और पुलिस के काम पर सवाल उठा रहे हैं.

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Chatra: 28 दिनों से लापता 14 साल की दिव्यांग बच्ची मुन्नी कुमारी को चतरा पुलिस बचा नहीं पायी. गिद्धौर थाना क्षेत्र के गांगपुर गांव से लापता हुई मुन्नी का शव आखिरकार शनिवार को नौकीबांध पहाड़ के चट्टान के पास बरामद किया गया. जिस स्थान पर मुन्नी का शव पड़ा था, वह उसके घर से साढ़े तीन किमी की दूरी पर है. शव को सबसे पहले जय गुरुदेव के तांत्रिक पत्थलगड्डा थाना क्षेत्र के जोरी मेराल गांव निवासी बिरसा मुंडा ने देखा. इसकी जानकारी उन्होंने मुन्नी के घरवालों को दी. शव की पहचान कर परिजनों ने चौकीदार अनिल कुमार को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस को जानकारी मिली.

माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल

सूचना मिलने के बाद सिमरिया एसडीपीओ शुभम खंडेलवाल दल-बल के साथ वहां पहुंचे. फोरेंसिक की टीम को भी बुलाया गया. स्थल की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी गयी. पुलिस ने तांत्रिक और मुन्नी के पिता से पूछताछ की. पुलिस ने घटनास्थल पर डॉग स्क्वाइड की टीम को भी बुलाया. शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गयी. लोगों में यह चर्चा होने लगी कि पैर से दिव्यांग होने के बाद भी किशोरी इतनी ऊंचाई पर कैसे पहुंची. मुन्नी का शव देखने के बाद से पिता निर्मल राणा बदहवास हैं.

28 दिसंबर को लापता हुई थी मुन्नी

मुन्नी के पिता ने कहा- शव देखने से ऐसा लग रहा जैसे एक-दो दिन पहले ही इसकी हत्या की गई है. जबकि बेटी 28 दिनों से लापता थी. उसके हाथ की अंगूली में खरोंच के निशान थे. उन्होंने कहा के पुत्री कि तलाश के लिये वह जिस तांत्रिक के पास गये थे, उसी तांत्रिक ने मुन्नी के शव के पास पहुंचाया. मुन्नी कुमारी 28 दिसंबर-2025 से लापता थी. गांव के कुछ बच्चे बगल में पिकनिक मनाने गये थे. पीछे से मुन्नी भी गयी थी, लेकिन वह न तो पिकनिक स्थल पर पहुंची और न ही घर वापस लौटी. परिजन और पुलिस लगातार मुन्नी की खोजबीन कर रहे थे. 15 जनवरी के बाद पुलिस की खोजबीन अभियान तेज हो गयी थी.

50 हजार रुपये का रखा था इनाम

पुलिस ने लापता मुन्नी कुमारी की सूचना देनेवालों के लिए शुरुआत में 10 हजार इनाम की घोषणा की थी. बाद में 20 हजार किया. उसके बाद 21 जनवरी को इनाम की राशि बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी थी.

पुलिस के सभी प्रयास विफल

मुन्नी की खोजबीन के लिए पुलिस के सभी प्रयास विफल रहे. पुलिस लगातार क्षेत्र में सर्च अभियान चला रही थी. प्रचार वाहन से लगातार सूचना दी जा रही थी. ग्रामीणों के बीच पंपलेट बांटे जा रहे थे. मुन्नी के गांव के कुछ दूरी पर स्थित बड़की तालाब में चौपारण के गोताखोरों द्वारा भी खोजबीन की गयी थी. जिले के लगभग 100 चौकीदारों को भी खोजबीन के लिए लगाया गया था. ड्रोन कैमरे से क्षेत्र की तलाशी ली गयी थी. एसआइटी भी लगी थी, लेकिन परिणाम शून्य रहा. चतरा के एसपी सुमित कुमार अग्रवाल ने कहा कि बच्ची का शव मिलने के बाद जांच शुरू कर दी गयी है. हर पहलू की पुलिस जांच कर रही है. पब्लिक के कमेंट पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं.

मुन्नी तो नहीं रही, लेकिन छोड़ गयी कई सवाल

24 दिनों से लापता गिद्धौर के गांगपुर की मुन्नी कुमारी का शव मिलने से लोग आक्रोशित भी हैं. लोगों में गुस्सा इस बात का है कि पैर से दिव्यांग होने के बाद भी मुन्नी पहाड़ पर कैसे पहुंच गयी. पिता भी परेशान हैं कि उनकी पुत्री यहां तक कैसे पहुंची. क्षेत्र के लोग भी तरह-तरह की चर्चा कर रहे हैं. बच्ची का शव मिलने के बाद परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. परिजनों को रो-रोकर बुरा हाल है. परिजन भी इस आस में थे कि उनकी बच्ची एक न एक दिन बरामद कर ली जायेगी, लेकिन उनकी आस उस समय टूट गयी, जब बच्ची का शव मिलने की सूचना मिली. सूचना मिलते ही घर में कोहराम मच गया. परिजन दहाड़े मार कर रो रहे थे. आसपास के लोग उन्हें सांत्वना दे रहे थे. गांव के लोग भी इस बात से परेशान हैं कि बच्ची के परिवार वालों का किसी से कोई विवाद नहीं था. ऐसे में क्या बच्ची का किसी ने अपहरण किया है. यही सवाल दिन भर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा.

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AmleshNandan Sinha

लेखक के बारे में

By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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