मकर संक्रांति पर जयदा शिव मंदिर में उमड़ते हैं श्रद्धालु और साधु-संत, भगवान राम से ये है कनेक्शन

चांडिल का जयदा शिव मंदिर
Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पर प्राचीन जयदा शिव मंदिर में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु और साधु-संत पहुंचते हैं. सुवर्णरेखा नदी में स्नान कर बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं. यहां पांच दिवसीय मेला भी लगता है. कहते हैं कि वनवास के दौरान भगवान राम, माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ यहां रुके थे.
Makar Sankranti 2025: चांडिल (सरायकेला खरसावां), हिमांशु गोप– मकर संक्रांति पर प्राचीन जयदा शिव मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं. श्रद्धालु सबसे पहले सुवर्णरेखा नदी में स्नान करते हैं फिर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं. यहां पांच दिवसीय जयदा मेला लगता है. इसे छोटा कुंभ मेला के नाम से भी जाना जाता है. यहां पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार और झारखंड के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचते हैं. जयदा शिव मंदिर चांडिल के राष्ट्रीय उच्च पथ (एनएच-33) सुवर्णरेखा नदी किनारे पहाड़ की गोद में बसा है. कहा जाता है कि वनवास के दौरान भगवान राम, मां सीता और भाई लक्ष्मण के साथ जयदा सुवर्णरेखा नदी के किनारे रुके थे.
मकर संक्रांति पर देशभर के साधु-संत पहुंचते हैं
14 साल के वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता के साथ जयदा सुवर्णरेखा नदी के किनारे रुके थे. इसके निशान अब भी यहां पर हैं. माना जाता है कि पांडवों ने भी जयदा शिव मंदिर में आकर बाबा भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की थी. सावन महीने में यहां दूर-दराज से काफी श्रद्धालु पहुंचते हैं और बाबा का आशीर्वाद लेते हैं. एनएच-33 सुवर्णरेखा नदी किनारे स्थित जयदा शिव मंदिर में मकर संक्रांति पर लगने वाले मेले में देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों जैसे तारापीठ, गया, वृंदावन, अयोध्या से साधु-संत पहुंचते हैं. 14 जनवरी को मकर संक्रांति धूमधाम से मनायी जाएगी.
ऐसे हुई थी जयदा शिव मंदिर की स्थापना
जयदा शिव मंदिर का इतिहास काफी पुराना है. कैरा (खरसावां) के महाराज को स्वप्न आया. इसके बाद कैरा महाराज जयदेव सिंह ने ईचागढ़ के राजा विक्रम आदित्यदेव से जयदा स्थित बूढ़ा बाबा की इच्छा जाहिर की. ईचागढ़ के राजा की देखरेख में जयदा मंदिर की स्थापना हुई थी. इस पावन तीर्थधाम पर 1966 में महंत ब्रम्हानंद सरस्वती का आगमन हुआ था. खुदाई के दौरान मिले प्राचीन पत्थर की मूर्तियां और शिलालेख से मालूम होता है कि यह मंदिर 13वीं शताब्दी में भगुल्ल के पुत्र दमप्पा द्वारा बनाया गया था.
जयदा शिव मंदिर कैसे पहुंचें?
टाटा-रांची मुख्य मार्ग एनएच-33 जमशेदपुर से लगभग 45 किमी और रांची से 100 किमी दूर पर्वत की गोद में प्राचीन जयदा शिव मंदिर है. जमशेदपुर से आने के दौरान चांडिल गोलचक्कर पार करने बाद महज 4 किमी और रांची से आने के क्रम में चौका पार करने बाद 6 किमी पर जयदा शिव मंदिर है. रांची और जमशेदपुर से आने दौरान जयदा ब्रिज से एनएच-33 से एक किमी की दूरी पर है.
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लेखक के बारे में
By Guru Swarup Mishra
मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.
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