Chaibasa News : मागे पर्व हमारी संस्कृति : मधु कोड़ा

Published by : ATUL PATHAK Updated At : 13 Feb 2026 11:07 PM

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जगन्नाथपुर. पाताहातु में सिंहबोंगा की गोवारी में शामिल हुए पूर्व सीएम व पूर्व सांसद

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जगन्नाथपुर. मागे पर्व पर पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और पूर्व सांसद गीता कोड़ा शुक्रवार को सपरिवार पाताहातु गांव पहुंचे और दियुरियों के साथ आदिवासी परंपरा के अनुसार सिंहबोंगा की गोवारी में शामिल हुए. पर्व के दौरान दोनों नेताओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की. दियुरियों ने विधिवत पूजा संपन्न करायी, जिसमें गांव की सुख-शांति, खुशहाली और समृद्धि के लिए देशाउली से प्रार्थना की गयी. इस अवसर पर गांव के बुजुर्गों, महिलाएं और युवा भी उत्साहपूर्वक शामिल हुए. पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक वातावरण ने पूरे गांव को त्योहारी रंग में रंग दिया. पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने कहा कि मागे पर्व हमारी सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक है. उन्होंने ग्रामीणों को पर्व की शुभकामनाएं देते हुए आपसी भाईचारे और विकास की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया. पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने भी गांववासियों के साथ मिलकर पूजा-अर्चना की और क्षेत्र की प्रगति एवं लोगों के कल्याण की कामना की.

सुख-समृद्धि के लिए हुई विशेष पूजा

गुवा. पश्चिमी सिंहभूम के गुवासाई गांव के देशाउली सरना स्थल पर शुक्रवार को आदिवासी ””हो”” समाज का पारंपरिक ””मागे पर्व”” हर्षोल्लास के साथ शुरू हुआ. इस अवसर पर पूरा क्षेत्र पारंपरिक गीतों व वाद्य यंत्रों से गूंज उठा.

विधि-विधान से हुई पूजा-अर्चना

कार्यक्रम का नेतृत्व गांव के दियुरी सुशील पूर्ति ने किया. उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाज और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करायी. परंपरा के अनुसार, गांव की सुख-शांति, समृद्धि और आगामी अच्छी फसल की कामना की. सरना स्थल पर ग्रामीणों ने अपनी संस्कृति के प्रति अटूट आस्था और एकता को प्रदर्शित किया.

विभिन्न क्षेत्रों से उमड़ा जनसैलाब

इस अवसर पर स्थानीय ही नहीं, बल्कि गुवा, ठाकुरा, रोवाम, छोटानागरा, जोजोगुटू, राजाबेड़ा, जामकुंडिया, नुइया, घाटकुड़ी आदि जगहों से भी श्रद्धालु शामिल हुए.

पारंपरिक परिधानों में थिरके ग्रामीण

मागे पर्व को लेकर बच्चों, महिलाओं और पुरुषों में जबरदस्त उत्साह देखा गया. महिलाएं और बच्चे नये पारंपरिक परिधानों में सुसज्जित होकर ढोल, नगाड़े और मांदर की थाप पर सामूहिक नृत्य करते नजर आए. सामूहिक नृत्य के दौरान युवाओं के उत्साह ने पर्व की रौनक दोगुनी कर दी. मौके पर देयुरी सुशील पूर्ति, मुंडा मंगल पूर्ति, जगमोहन पूर्ति, लंका पूर्ति, विकास पूर्ति ऐदि उपस्थित थे.

देशाउली में पूजा कर खुशहाली मांगी

चाईबासा. आदिवासी हो समुदाय का सबसे बड़ा और पवित्र त्योहार ”मागे परब” इन दिनों तांतनगर और मंझारी प्रखंड के गांवों में पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. तांतनगर प्रखंड के उलीडीह, कोकचो, रोलाडीह और मंझारी के जलधर सहित कई गांवों में हर्षोल्लास का माहौल है. ग्रामीणों ने अपने घरों और अखाड़ों को आकर्षक झालरों से सजाया है, जिससे गांव की रौनक बढ़ गयी है. उलीडीह स्थित जायरा में शुक्रवार को दियुरियों ने पूजा-अर्चना करायी. परंपरा के अनुसार सामूहिक रूप से खिचड़ी प्रसाद बनाकर ग्रहण किया गया. ग्रामीणों ने इस दौरान प्रकृति और पूर्वजों से गांव की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की. पूजा के बाद शाम को ”दिउरी दारोम” की रस्म निभायी गयी. इसमें पारंपरिक परिधानों में सजे ग्रामीणों ने नाचते-गाते हुए दिउरी का स्वागत किया. उन्हें सम्मानपूर्वक उनके घर तक पहुंचाया. इसके बाद मांदल और नगाड़ों की थाप पर रात भर मागे नृत्य चलता रहा. इसमें बच्चे और बूढ़े सभी थिरकते नजर आये. शुक्रवार को विशेष रूप से ”कूकड़ा उड़ा” कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस दौरान दिउरी ने विशेष मंत्रोच्चार के बाद सफेद मुर्गे को उड़ाया. यह इस पर्व की महत्वपूर्ण रस्म है. उत्सव का समापन रविवार को होने वाले छाता मेला के साथ होगा, जो समूचे क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र रहता है.

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