Chaibasa News : भगवान चित्रगुप्त की पूजा कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि व खुशहाली मांगी

Published by : ATUL PATHAK Updated At : 23 Oct 2025 9:52 PM

विज्ञापन

प. सिंहभूम में भक्तिभाव से हुई पूजा, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन

विज्ञापन

चाईबासा

. पश्चिमी सिंहभूम अखिल भारतीय कायस्थ महासभा इकाई के तत्वावधान में गुरुवार को स्थानीय बिहारी क्लब परिसर में भगवान चित्रगुप्त की पूजा भक्तिभाव से संपन्न हुई. कार्यक्रम की शुरुआत भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा पर माल्यार्पण और विधिवत पूजा-अर्चना हुई. पारंपरिक विधि-विधान के तहत पुरोहित द्वारा पूजा का महत्व बताया गया तथा भगवान चित्रगुप्त के मंत्रों का उच्चारण कर सबको उनसे परिचित कराया गया. पूजा के पश्चात पंचामृत, लड्डू, फल और अन्य नैवेद्य का वितरण किया गया. श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप भोजन भी कराया गया. इसके साथ ही भजन-संकीर्तन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के बच्चों और युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. संध्या में आर्केस्ट्रा कार्यक्रम ने वातावरण को और उल्लासमय बना दिया. महासभा के अध्यक्ष उदय शंकर प्रसाद, संरक्षक संजीव मल्लिक, नितिन प्रकाश, राजीव नयनम और अन्य गणमान्य लोगों ने अपने उद्बोधन में कहा कि चित्रगुप्त पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को एकजुट करने और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने का माध्यम है. उन्होंने कहा कि कायस्थ समाज शिक्षा, सेवा और संगठन में सदैव अग्रणी रहा है. अंत में सामूहिक प्रसाद वितरण और भोजन के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ. मौके पर मुख्य रूप से अनिल कुमार सिन्हा, संजय कुमार सिन्हा, विवेक कुमार सिन्हा, महेश सिन्हा, सुरेश सिन्हा, दिनेश लाल, दीलिप सिन्हा, अनंत शयनम, अरबिंद सिन्हा, मनोज सिन्हा, प्रताप सिन्हा आदि उपस्थित थे.

गुवा में कायस्थ समाज ने की चित्रगुप्त पूजा

गुवा. गुवा में गुरुवार को भैया दूज और चित्रगुप्त पूजा की धूम रही. बहनों ने अपने भाइयों की लंबी आयु की कामना करते हुए भाई दूज की पूजा की. इसी के साथ कायस्थ समाज के सदस्यों ने गुवा के योगनगर स्थित चित्रगुप्त मंदिर में भगवान चित्रगुप्त की पूजा-अर्चना की. गुवा बाजार, सेवानगर, स्टेशन कालोनी, विवेक नगर, कल्याण नगर, हिरजीहाटिंग, कैलाश नगर और बड़ाजामदा के अलग-अलग क्षेत्रों में बहनों ने पारंपरिक गीतों के साथ भाई दूज की पूजा की और यम भगवान से भाइयों की लंबी उम्र की प्रार्थना की. पूजा में बहनों ने गोधन की कुटाई की, जिसमें चना और रेंगनी के कांटे का विशिष्ट प्रयोग होता है. रेंगनी का कांटा अपने जीभ में चुभोने की परंपरा भी निभायी गयी. भाई को चना (बजरी) और लड्डू खिलाकर आशीर्वाद लिया गया. कायस्थ समाज ने अपने आराध्य देव चित्रगुप्त महाराज की विशेष पूजा की, जिसमें कलम-दवात की पूजा भी शामिल थी. बड़ाजामदा के चित्रगुप्त मंदिर में भव्य रूप से पूजा और आरती का आयोजन किया गया, जिसमें बही-खाता, पुस्तक, फल-फूल समेत पूजा सामग्री का विशेष महत्व रहा. मौके पर नागेंद्र पाठक, भूषण लाल, अजीत श्रीवास्तव, इंद्राणी वर्मा, राकेश नंद कोलियर, संजीव सिन्हा, अरुण कुमार वर्मा, सतीश श्रीवास्तव, निरंजन प्रसाद, मनीष वर्मा आदि शामिल रहे.

भाइयों की लंबी आयु की कामना की

चाईबासा. चाईबासा में भाई-बहन का त्योहार गोवर्धन पूजा एवं भाई फोटा पूरे उल्लास से मनाया गया. इस दौरान बहनों ने रूई से बने माला बनाकर भाइयों को अर्पित की. साथ ही जीभ पर रेगनी का कांटा चुभा कर गोबर से यम, सांप, बिच्छू आदि की आकृति बनायी व भाइयों को दीर्घायु होने के लिए शाप भी दिया. साथ ही शाप से मुक्ति के लिए ईश्वर से कामना भी की व जीभ में कांटा चुभा कर शाप का प्रायश्चित किया गया. गाय के गोबर से बने गोधन में करी चना आदि डालकर लकड़ी से बने मूसल से कुटाई की गयी व उस गोबर के गोले को आपस में बांट ली. गोधन कूटने के बाद बहनों ने भाइयों को चना और फल आदि दिया ग्रहण करायी. इसके पीछे तर्क दिया कि यम से लड़कर हम लोगों ने अपने भाइयों को लंबी आयु देने के लिए कामना की जाती है. वहीं बहनों द्वारा भाइयों को तिलक लगाकर और आरती उतार कर प्रसाद के रूप में किरी चना एवं मिठाईयां ग्रहण करवाकर भाइयों की सुख-समृद्धि, सफलता व दीर्घायु होने की कामना की. वहीं भाइयों ने भी बहनों को सुरक्षा देने का भरोसा दिलाया. इसी तरह बंगाली समाज के लोगों ने भी भाइयों के मस्तक पर तिलक कर उनके दीर्घायु होने की कामना की व मिठाई और पकवान खिलाएं. वहीं भाइयों ने बहनों को उपहार भेंट किया.

बहनों ने तिलक कर आरती उतारी, सुख व समृद्धि मांगी

नोवामुंडी. भाई दूज का पर्व नोवामुंडी के विभिन्न क्षेत्रों में गुरुवार को धूमधाम से मनाया गया. बहनों ने अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर आरती उतारी और उनकी लंबी उम्र की कामना की. यह पर्व कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर मनाया जाता है और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक माना जाता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन यमुना ने अपने भाई यमराज को तिलक लगाया था, जिससे वे प्रसन्न हुए और यह वरदान दिया कि जिस भी बहन अपने भाई को तिलक लगायेगी, उसके भाई की उम्र लंबी होगी. इसी कारण इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है. इस पर्व पर बहनें अपने भाई के माथे पर बाएं हाथ से तिलक लगाती हैं और उन्हें कुछ भी खाने से पहले भोजन कराती हैं. कुछ स्थानों पर गोबर से गोधन कुट्टा बनाया गया, जो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है. लखनसाई की सरिता मिश्रा, रेणु मिश्रा, दीपिका पाठक, सिंपू कुमारी, उर्मिला देवी, पूजा मिश्रा, श्रेया मिश्रा, सौम्या मिश्रा, सुहानी मिश्रा, रूबी देवी, गीता देवी, अनिता सिन्हा, मीना देवी, श्वेता सिंह, सोनाली सिंह, किरण देवी, मां मनसा मंदिर टोला की पूजा देवी, सुमन ठाकुर, मीरा देवी, गुड़िया देवी, गीता देवी, मुनि देवी, रीता देवी, सोनी देवी, खुशी कुमारी, तृषा कुमारी, पूजा कुमारी, बंगाली पड़ा टोला की ललिता सिंह, संगीता देवी, प्रभा पाठक, नीलिमा पाठक आदि उपस्थित थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
ATUL PATHAK

लेखक के बारे में

By ATUL PATHAK

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola