पश्चिमी सिंहभूम में डीएमएफटी फंड की जांच हो, माननीयों ने चहेते ठेकेदारों को दिया काम : गीता कोड़ा

Updated at : 11 May 2024 11:48 PM (IST)
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पश्चिमी सिंहभूम में डीएमएफटी फंड की जांच हो, माननीयों ने चहेते ठेकेदारों को दिया काम : गीता कोड़ा

गीता ने केंद्र सरकार के 10 साल के कामकाज को गिनाया

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चाईबासा. लोकसभा चुनाव के चौथे चरण (13 मई) को सिंहभूम संसदीय सीट पर भी मतदान होना है. भाजपा प्रत्याशी गीता कोड़ा ने शनिवार को चुनावी कार्यालय में प्रेसवार्ता कर केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए गठबंधन पर भी निशाना साधा. पत्रकारों से बात करते हुए भाजपा प्रत्याशी गीता कोड़ा ने केंद्र सरकार के 10 साल के कामकाज को गिनाया. उन्होंने अपनी भावी कार्य योजना के बारे में भी जानकारी दी. कहा कि यह आदिवासी बहुल क्षेत्र है. हो भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग लंबे समय से उठ रही है.आगामी मानसून सत्र में वह सबसे पहले इस विषय को सदन में रखेंगी. यह माइनिंग क्षेत्र है, इसलिए खदानों को खुलवाने और इंडस्ट्री के विकास के दिशा में काम करना है. गीता कोड़ा ने जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट की राशि की लूट का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की. कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी शुरुआत की थी. ताकि स्थानीय लोगों के विकास में सीएसआर के तहत ज्यादा से ज्यादा लाभ फायदा उपलब्ध हो सके. लेकिन यहां के माननीयों ने अपने पॉकेट भरने के लिए चहेते ठेकेदारों को काम दिया. 60-40 के अनुपात का पालन भी नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए.

जिले में बने सुपर अस्पताल

उन्होंने जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में काम स्पेशलिटी अस्पताल बनवाना उनकी प्राथमिकता होगी. स्वास्थ्य की स्थिति को और बेहतर बनाने के लिए प्रयास किया जायेगा.

राज्य सरकार में इच्छा शक्ति की कमी

गीता कोड़ा ने कहा कि क्षेत्र में सड़कों की स्थिति खराब है. 2019 में केंद्र सरकार को इससे आगाह कराया गया था कि उच्च स्तरीय राष्ट्रीय राजमार्ग बनाया जाना चाहिए. यहां जो फ्लाइओवर है जहां भी रेलवे फ्लाइओवर बनाने के काम था केंद्र सरकार ने इसकी स्वीकृति भी दी थी. लेकिन राज्य सरकार की काम करने की इच्छा शक्ति नहीं थी. इसी वजह से काफी देर हुआ.

प्राथमिक से लेकर हायर एजुकेशन रहेगी प्राथमिकता

गीता कोड़ा ने शिक्षा को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा आंकड़े के मुताबिक पश्चिमी सिंहभूम में सबसे ज्यादा ड्राॅप आउट बच्चे हैं. लगभग 30 से 40 हजार बच्चे ड्रॉप आउट हैं. इतने बच्चों के ड्रॉप आउट होने का क्या कारण है. इतने बच्चे जो शिक्षा से वंचित है. जबकि सारी सुविधाएं यहां पर होते हुए भी ये बच्चे ड्रॉप आउट हैं लेकिन राज्य सरकार के पास इसका कोई विजन नहीं है. उच्च शिक्षा में भी केंद्र सरकार ने नयी शिक्षा नीति लागू की है. यहां के बच्चों को यह अपनी भाषा में शिक्षा को अपने भाषा में पढ़ सकते हैं. प्राइमरी एजुकेशन दुरुस्त होना मेरी प्राथमिकता रहेगी. हायर एजुकेशन के लिए यहां पर कोल्हान यूनिवर्सिटी है. इस यूनिवर्सिटी को और मजबूत किया जायेगा.

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