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Chaibasa News : भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊंचा है : आनंद प्रधान

Updated at : 11 Jul 2025 11:00 PM (IST)
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Chaibasa News : भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊंचा है : आनंद प्रधान

पद्मावती जैन सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में श्रद्धापूर्वक मनी गुरु पूर्णिमा

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चक्रधरपुर. शहर के पंप रोड स्थित पद्मावती जैन सरस्वती शिशु विद्या मंदिर (इंग्लिश मीडियम ) में वेद व्यास जयंती सह गुरु पूर्णिमा उत्सव हर्षोल्लास से मनाया गया. सर्वप्रथम विद्यालय प्रबंध कारिणी समिति की उपाध्यक्ष दमयंती नाग एवं प्रधानाचार्य आनंद चंद्र प्रधान ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया. मौके पर आनंद प्रधान ने कहा कि व्यास जी ने ही वेद एवं महाभारत की रचना की है. महर्षि वेदव्यास का संक्षिप्त जीवन परिचय देते हुए कहा कि वेदव्यास जिन्होंने वेदों को चार भागों में विभक्त किया. 18 पुराण एवं महाभारत जैसे ग्रंथों की रचना की. उनकी जयंती को ही हम गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं. भारतीय परंपरा में गुरु का स्थान सर्वोच्च है. जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में गुरु की आवश्यकता पड़ती है. कहा कि गुरु का शाब्दिक अर्थ होता है जो अंधकार रूपी अज्ञान को ज्ञान रूपी प्रकाश से आलोकित करता है. विद्यालय समिति द्वारा इस पावन अवसर पर आचार्यों व कर्मचारियों को सम्मानित किया गया. कार्यक्रम का संचालन सौभिक घटक ने किया. मौके पर जयश्री दास, शांति देवी, निशा स्वास्तिक सोय, भारती कुमारी, चांदनी जोंको, जयंती तांती एवं काफी संख्या में अभिभावक एवं भैया- बहन उपस्थित थे.

प्रतियोगिता से बच्चों में बढ़ता है आत्मविश्वास : समीर

संत जेवियर इंग्लिश स्कूल, कीतापीड़ में बुधवार को रंगारंग फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. यह प्रतियोगिता विद्यालय के एलकेजी एवं यूकेजी कक्षा के नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए रखी गयी थी. इसमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. बच्चों ने अपनी प्रतिभा से सबका मन मोह लिया. कार्यक्रम का संचालन मिस अनुष्का ने अत्यंत कुशलता के साथ किया. कार्यक्रम में सिस्टर त्रितमा कुजूर एवं रोजर रॉड्रिक्स ने निर्णायक की भूमिका निभाई. बच्चों की वेशभूषा, आत्मविश्वास और प्रस्तुति के आधार पर उनका मूल्यांकन किया गया. प्रतियोगिता में बच्चों ने फौजी, स्वतंत्रता सेनानी, फल-सब्जियां, पेड़-पौधे, माता-पिता, मां दुर्गा, डॉक्टर, सेंटा क्लॉज, परी जैसी रोचक वेशभूषा में मंच पर अपनी प्रस्तुति दी. उनकी मासूम अदाएं, सजीव अभिनय और सुंदर परिधान दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने में सफल रहे. बच्चों की प्रस्तुति और वेशभूषा की सभी ने सराहना की. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्कूल के प्राचार्य फादर समीर सोरेंग थे. उन्होंने कहा बच्चों के सर्वांगीण विकास में स्कूल और परिवार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. इस प्रकार के आयोजन बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक होते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ATUL PATHAK

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