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Chaibasa News : प्रभावित क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित शिफ्ट कर दो दिन में हाथी को खदेड़ेंगे

Updated at : 06 Jan 2026 11:11 PM (IST)
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Chaibasa News : प्रभावित क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित शिफ्ट कर दो दिन में हाथी को खदेड़ेंगे

हाथी से 10 की मौत व सात घायल, आरसीसीएफ पहुंचीं चाईबासा

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चाईबासा.

पश्चिमी सिंहभूम जिले में पांच दिनों में हाथी के हमले में 10 ग्रामीणों की मौत व सात घायल की घटना से वन विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ गयी है. विभाग की टीम अलग- अलग दो गुटों में जंगलों की खाक छान रही है. वन विभाग की आरसीसीएफ (क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक) स्मिता पंकज मंगलवार को चाईबासा में वन पाल प्रशिक्षण केंद्र पहुंचीं. झुंड से बिछड़ा हाथी आक्रामक हो गया है. जिन क्षेत्रों में हाथी विचरण कर रहा है. वहां के लोगों से अपने घरों से स्कूल या सुरक्षित भवन में शिफ्ट होने की अपील होगी. इसमें स्थानीय प्रशासन भी मदद करेगा. उन्होंने कहा कि हमें दो दिनों का समय मिल जाये, ताकि हाथी को जंगल में उसके निवास तक पहुंचाया जा सके. यदि और दुर्घटना होती है, तो हमलोग इसे बर्दाश्त नहीं कर पायेंगे.

कोल्हान के जंगल में विभाग की कई टीमें कार्य में लगीं:

उन्होंने बताया कि कोल्हान प्रमंडल में सात लोगों की जान एक दंतैल हाथी ने ली है. वहीं, चाईबासा वन प्रमंडल में हाथी के हमले में तीन लोगों की जान गयी है. उन्होंने कहा कि कोल्हान प्रमंडल में अलग- अलग टीमें सक्रिय हैं. हाथी को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है. उन्होंने कहा कि कोलकाता से टीम बुलायी गयी है.

सरकारी प्रक्रिया से देंगे मुआवजा:

उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार के मुआवजा एक्ट के तहत हताहत हुए लोगों के परिजनों को जल्द मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जा रहा है. वहीं रेंजर और डीएफओ के स्तर से तत्काल इलाज के लिए लोगों को 20 हजार तक की राशि उपलब्ध करायी जा रही है. रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में वनपट्टा भारत सरकार के फॉरेस्ट राइट एक्ट के तहत दिया जा रहा है.

‘नर हाथी जीवन में एकबार काफी गुस्से में आता है’

उन्होंने कहा कि नर हाथियों के जीवन में एक समय ऐसा आता है, जब वह काफी गुस्से में होता है. उन्होंने कहा कि वन पट्टा वाले लोग अधिक प्रभावित हैं. हाथी उस क्षेत्र में चला गया है. हमलोगों ने वनतारा की टीम को बुलाया है. बंगाल से एक्सपर्ट टीम बुलायी गयी है. हाथियों से बचाव के लिए मीडिया भी लोगों को अलर्ट कर रहा है. उन्होंने कहा कि कोल्हान प्रमंडल, सारंडा, पोड़ाहाट आदि क्षेत्र में हड़िया और महुआ का प्रचलन है. इसके गंध से भी हाथी आकर्षित होते हैं. इसके अलावा चावल के सुगंध से भी पहुंचते हैं.

वन विभाग ने वनतारा की टीम से मदद मांगी

जमशेदपुर. पश्चिमी सिंहभूम में हिंसक हुए हाथी को कंट्रोल करने के लिए अब कोल्हान वन प्रमंडल ने ”ट्रेंकुलाइज” (बेहोश) के लिए पश्चिम बंगाल से विशेषज्ञ टीम बुलायी गयी है. दूसरी ओर वन विभाग ने अंबानी परिवार के बनाये गये वनतारा की टीम से संपर्क साधा है, ताकि उक्त हाथी से लोगों को बचाया जा सके. इसके लिए सीसीएफ के स्तर पर वनतारा से रेस्क्यू टीम भेजने की अपील की गयी है. आरसीसीएफ स्मिता पंकज ने बताया कि वनतारा की टीम को कोल्हान में हाथी को नियंत्रित करने के लिए बुलाया गया है. जल्द टीम आ सकती है. हाथियों को नियंत्रित करने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है, लेकिन आम जनता से मदद जरूरी है.

हाथी को ट्रैप करने को ड्रोन का सहारा ले रही टीम

गोइलकेरा.

हाथी को ट्रैप करने के लिए बंगाल की नौ सदस्यीय टीम ने 10 किलो मीटर रेडियस वाले ड्रोन कैमरा लायी थी. पाटुंग के समीप ड्रोन को उड़ाया गया, तो अचानक आसमान में तीन और ड्रोन उड़ने लगे. किसी अनहोनी को देखते हुए वन विभाग ने अपना ड्रोन उतार लिया. इसके बावजूद रात में तीन ड्रोन ट्रैप करती रही. इस दौरान रात में इस टीम ने करीब 30 किलोमीटर तक घूमती रही. मंगलवार को रेंजर राम नंदन राम ने कहा कि वह ट्रैप पुलिस कैंप से की जा रही थी. उन्होंने कहा कि हाथी भगाने के इस अभियान की खबर स्थानीय थाने को दे दी गयी थी.

कोल्हान में दर्ज हैं सिर्फ दो हाथी कॉरिडोर :

लंबे समय से कोल्हान में सिर्फ दो ही हाथी कॉरिडोर दर्ज हैं. दोनों कॉरिडोर 7 किलोमीटर के बताये जाते हैं. पहला कॉरिडोर लेदाबेरा में है. जो रायबेड़ा से होते हुए पुलवाबुरु तक 8 किलोमीटर का है. इसमें रेल क्रॉसिंग भी आता है. इसमें पिछले 5 वर्षों से हाथी के पार होने की कोई खबर नहीं है. तीसरी लाइन बनने के बाद से उधर हाथियों का आवागमन बंद है. वहीं दूसरा कॉरिडोर डिंबुली अंकुवा में है. जो मनोहरपुर के सामने है.

पांच दिनों में हाथी ने 10 लोगों की जान ली, दहशत

कोल्हान वन क्षेत्र में 25 वर्षों में सबसे अधिक इस बार हाथियों के हमले से मौत हुई है. झारखंड अलग राज्य बनने के बाद अबतक कोल्हान वन क्षेत्र में छह लोगों की हाथी से मौत की खबर थी. पर इस बार हाथी ने बीते पांच दिनों में 10 लोगों को पटक कर मार डाला है. वहीं, सात लोगों को गंभीर रूप से घायल कर दिया है. मृतकों में चार लोग टोंटो थाना क्षेत्र के और छह लोग गोइलकेरा प्रखंड के रहने वाले थे. दो दिन पहले शुक्रवार की रात हाथी ने खलिहान में सो रहे बालक रेगा कयोम को कुचलकर मार डाला था और 10 वर्षीय बच्ची झींगी गागराई को गंभीर रूप से घायल कर दिया था. घटना गोइलकेरा थाना के बाइपी गांव में हुई थी. वहीं, इससे पहले गुरुवार की रात हाथी ने महिला समेत तीन लोगों को कुचलकर मार दिया था. सोमवार को बिला गांव के मिश्रीबेड़ा वनग्राम में महिला को पटक-पटक कर मार डाला. सोमवार रात में ही इसी हाथी ने सोवां गांव में तीन लोगों की जान ले ली और दो लोगों को घायल कर दिया. इसी रात हाथी ने टोंटो थाना क्षेत्र के कुइलीसूता गांव में एक युवक की पटक कर जान ले ली.

हर वर्ष धान कटनी के समय पहुंचते हैं हाथी:

हर वर्ष धान कटनी के समय हाथियों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं. धान की फसल को खाते हैं और नुकसान भी पहुंचाते हैं. इस बार ग्रामीणों की जान जा रही है. कोल्हान वन क्षेत्र के पदाधिकारी राम नंदन राम ने कहा कि हाथी द्वारा जान का नुकसान पहुंचाना पीड़ादायक है. विभाग घटना से मर्माहत है. हरसंभव प्रयास किया जा रहा है कि घटना दुबारा न हो. इसके लिए सभी रेंज से टीम हाथी को ट्रैप करने के लिए भेजी गयी है.

डीएफओ पहुंचे मनोहरपुर:

हाथी के उग्र हो जाने से उत्पन्न समस्या पर कोल्हान वन प्रमंडल पदाधिकारी कुलदीप मीणा मंगलवार को मनोहरपुर पहुंचे. वे वहीं से हालत पर नजर बनाये हुए हैं.

दलपोसी में हाथी का चार घंटे उत्पात, तीन घर तोड़े, परिवार ने भागकर बचायी जान

जैंतगढ़. पश्चिमी सिंहभूम जिले की जैंतगढ़ पंचायत स्थित दलपोसी गांव में सोमवार की रात झुंड से भटके एक दंतैल हाथी ने जमकर उत्पात मचाया. हाथी करीब चार घंटे (रात लगभग 10.30 बजे से ढाई बजे तक) तक गांव में विचरण करता रहा. इस दौरान ग्रामीण रूली चतर, कंडे चतर और गंगाराम लागुरी के घरों को तोड़ दिया. अंदर रखे धान व चावल खा गया. घटना के समय कंडे चतर अपने परिवार के साथ उसी कमरे में सोया था. उसने जैसे हरी दीवार गिरती देखी, परिवार समेत पीछे के दरवाजे से निकलकर जान बचायी. हाथी के कारण पूरी रात गांव वाले दहशत में रहे. टॉर्च जलाकर हाथी को भगाने का प्रयास करते रहे. हाथी के आतंक से आसपास के गांव बांसकांटा, कादोकोड़ा, ब्रह्मपुर और जैंतगढ़ में भी खौफ का माहौल बना रहा. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शोर मचाने या भगाने पर भी हाथी नहीं भाग रहा था. वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, चंपुआ वन क्षेत्र में मौजूद 23 हाथियों के झुंड से यह दंतैल हाथी भटक गया है. बीते एक सप्ताह से यह हाथी मसाबिला, जामपानी, दीदीबरू, ढकवा और कुकुरभूखा जंगलों के आसपास विचरण कर रहा है. रात्रि में यह अक्सर आबादी क्षेत्रों में घुसकर तबाही मचा देता है. सुबह इसे ब्रह्मपुर के पास जंगल में देखा गया, जिससे ग्रामीणों में भय बना हुआ है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ATUL PATHAK

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By ATUL PATHAK

ATUL PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

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