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केंद्रीय कृषि मंत्री ने श्री अयप्पा मंदिर में 1008 बाती वाले दीपस्तंभ को किया प्रज्वलित

Updated at : 30 Aug 2024 11:40 PM (IST)
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केंद्रीय कृषि मंत्री ने श्री अयप्पा मंदिर में 1008 बाती वाले दीपस्तंभ को किया प्रज्वलित

आस्था और विश्वास के साथ शुरू हुआ श्री अयप्पा मंदिर सेक्टर पांच का 2024-2025 का वार्षिक महोत्सव, पूजा-अर्चना को उमड़े श्रद्धालु

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बोकारो, श्री अयप्पा मंदिर सेक्टर पांच में शुक्रवार को 1008 बाती वाला दीपस्तंभ प्रज्वलित हुआ. मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सपरिवार मंदिर पहुंचे. दीप जलाकर दीपस्तंभ को प्रज्वलित किया. इसके बाद मंदिर का भ्रमण किया. इस दौरान मंदिर कमेटी के पी राजगोपाल, शशिधरन करात ने बताया कि भारत में इस तरह का विशालकाय दीपस्तंभ पहली बार प्रतिष्ठित हुआ है. यह बोकारो वासियों के लिए गौरव की बात है. जिस समय दीपस्तंभ प्रज्वलित हुआ, उस समय भक्त आह्लादित हो उठे. मौके पर बोकारो विधायक बिरंची नारायण, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य कुमार अमित, मंदिर कमेटी के मोहन नायर, इएस सुशीलन, सुरेश कुमार केए, श्री अय्यपा पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल पी शैलजा जयाकुमार सहित मंदिर के सदस्य व स्कूल के दर्जनों शिक्षक उपस्थित थे.

यहां उल्लेखनीय मंदिर का वर्ष 2024-2025 का वार्षिक महोत्सव 29 अगस्त की शाम 05.30 से शुरू हुआ है. 29 की शाम को प्रासाधाशुद्धि पूजा व दीप आराधना के साथ पूजा की शुरुआत हुई है. शुक्रवार की सुबह 05.30 बजे मंदिर खुलने के बाद महागणपति हवन, विग्रह शुद्धि, चतुरशुद्धि, धारा, पंचगव्यं, पंचकर्म, कलश पूजा, उषा पूजा के साथ कलश अभिषेक और मध्याह्न पूजा कर पट बंद हो गया. शाम को 05.30 बजे पट खुलने के बाद 06.30 बजे दीप आराधना, 1008 बाती वाला दीपस्तंभ को प्रथम बार प्रज्वलित, ध्वजारोहण, धान रोपाई पूजा, अठारह सीढ़ियों की पूजा (शडिपूजा), रात्रि भोग पूजा, श्रीभूतबली के साथ हरिवरासनम हुआ.

महागणपति हवन, कलश पूजा, उषा पूजा के साथ कलश अभिषेक और मध्याह्न पूजा

शनिवार की सुबह 05.30 बजे मंदिर खुलने के बाद महागणपति हवन, कलश पूजा, उषा पूजा के साथ कलश अभिषेक और मध्याह्न पूजा करके पट बंद हो जायेगा. दो सितंबर शाम को 05.30 को पट खुलने के बाद 06.30 बजे दीप आराधना, अंकुर पूजा, अठारह सीढ़ियों की पूजा (पडिपूजा), रात्रि भोग पूजा, श्रीभूतबली के साथ हरिवरासनम और पट बंद हो जायेगा. तीन को सुबह 05.30 बजे मंदिर खुलने के बाद महागणपति हवन, कलश पूजा, उषा पूजा के साथ कलश अभिषेक और मध्याह्न पूजा करके पट बंद हो जायेगा. शाम को 05.30 बजे पट खुलने के बाद 06.30 बजे दीप आराधना, अंकुर पूजा, अठारह सीढ़ियों का पूजा (पडिपूजा), पल्लीवेटा (गर्भ गृह से निकलकर मंदिर प्रांगण में शोभयात्रा), शय्या पूजा के साथ हरिवरासनम और पट बंद हो जायेगा.

चार को मुख्य वार्षिक पूजा का होगा समापन

चार सितंबर को सुबह श्रद्धा के साथ विधि-विधान के साथ मुख्य वार्षिक पूजा का समापन होगा. महागणपति हवन, भागवत परायण, उषापूजा, कलश पूजा, भगवान का स्नान पूजा, शोभायात्रा के साथ गर्भ गृह में वापसी, “तायम्बका (केरल का मुख्य वाध्य उपकरण के साथ ) श्री पल्लसेना नंदकुमार और टीम ” , मध्याह्नपूजा, प्रीति भोग, पट बांध होने साथ वार्षिक पूजा का समापन होगा. इस दौरान मंदिर में पूजा का समय सुबह 05.30 से 11.00 बजे तक और शाम को 05.30 से 09.00 बजे तक होगा. सभी पूजा शबरीमला के मुख्या तान्त्रिवर्य ब्रह्मश्री महेश मोहनरू कंडरु के नेतृत्व में होगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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