Bokaro News : विस्थापित गांव में पूर्व मुख्यमंत्री ने चलाया हल

Bokaro News : पूर्व सीएम चंपाई सोरेन ने बोकारो के विस्थापित गांवों में जनसंवाद किया.
झारखंड के पूर्व सीएम चंपाई सोरेन गुरुवार को बोकारो पहुंचे. विस्थापित गांव मोदीडीह व शिबुटांड़ में जनसंवाद किया. शिबूटांड़ में हल चला कर जमीन पर विस्थापितों का हक जताया. अप्रेंटिस संघ ने उन्हें ज्ञापन सौंपा. श्री सोरेन ने कहा कि अप्रेंटिसशिप पूरा कर चुके युवाओं को नौकरी नहीं दी गयी और विस्थापितों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो लाखों लोग रैयतों के साथ मिलकर बीएसएल की खाली पड़ी हजारों एकड़ जमीन पर हल चलायेंगे. विस्थापितों के हक के लिए जन आंदोलन होगा. बोकारो स्टील प्लांट बना, लेकिन विस्थापितों को कोई लाभ नहीं मिला. प्लांट के लिए करीब 34,000 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गयी थी, लेकिन इसमें से आधा जमीन पर ही प्लांट बना. हजारों एकड़ जमीन आज भी खाली पड़ी है. राज्य सरकार या कंपनी ने भूमि अधिग्रहण के समय किये वादे पूरे नहीं किये. हजारों विस्थापित परिवारों को मुआवजा नहीं मिला. जब 60 वर्षों तक भूमि का इस्तेमाल नहीं कर पाये और उसके कई हिस्सों पर आपका कब्जा भी नहीं है, तो उस जमीन को रैयतों को क्यों नहीं लौटाया जा रहा है?
श्री सोरेन ने कहा कि विस्थापितों का नाम वोटर लिस्ट में तो है, लेकिन जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र तक बनवाना इनके लिए मुश्किल है. क्योंकि इनके गांव-टोला को सरकारी रिकॉर्ड्स में गायब कर दिया गया है. अब सवाल बहुत हो गया, अब समाधान की दिशा में पहल करना है. इससे पहले नया मोड़ में चंपाई सोरेन का स्वागत किया गया. मौके पर दर्जनों की संख्या में विस्थापित मौजूद थे.ललपनिया में जाला के विस्थापितों से संबंधित मुद्दों पर की चर्चा
पूर्व मुख्यमंत्री ललपनिया भी पहुंचे. इस दौरान बैंक मोड़ स्थित भाजपा व विस्थापित नेता धनीराम मांझी के आवास पहुंचे. टीटीपीएस के निर्माण के दौरान अधिग्रहित ग्राम जाला के विस्थापितों के पुनर्वास से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की. धनीराम मांझी ने कहा कि जाला के विस्थापित तीस वर्षों से पुनर्वास के आस में हैं. लेकिन प्रबंधन और प्रशासन चुप है. अब आर-पार की लड़ाई शुरू कर दी गयी है. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि विस्थापितों के साथ यह सरासर अन्याय है. विस्थापितों के सवाल पर वर्तमान सरकार पूरी तरह फेल है. अगर शीघ्र ही जाला विस्थापितों को पुनर्वासित नहीं किया गया तो अधिग्रहीत खाली पड़ी जमीन पर हल चलाया जायेगा. मौके पर रामजी मरांडी, जगेश्वर ठाकुर, मजलूम अंसारी, प्रेमलाल साव, त्रिभुवन महतो, पीएन तिवारी, बिंदेश्वर साव, सुगन साव, आरडी साहू आदि थे. श्री सोरेन ने लुगुबुरु घांटाबाड़ी धोरोमगाढ़ के दोरबार चट्टानी स्थित पुनाय थान में देव मरांग बुरु, लुगुबुरु और लुगु आयो आदि के समक्ष मत्था टेका और पूजा की. इस अवसर पर वीर शहीद सिदो-कान्हू के वंशज मंडल मुर्मू, फूलचंद किस्कू, लुगुबुरु घांटाबाड़ी धोरोमगाढ़ समिति के सचिव लोबिन मुर्मू, विनोद कुमार, गोविंद हांसदा, दुर्गा टुडू, बबलू सोरेन आदि थे.
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