Bokaro News : शनिवार की शाम चांद नजर आते ही इस्लाम धर्म का पवित्र महीना रमजान की शुरुआत हो गयी. रविवार को मुस्लिम समुदाय के लोग पहला रोजा रखेंगे. इसी के साथ एक माह तक मस्जिदों और घरों में विशेष इबादतें की जायेगी. रमजान का मुबारक महीना इस बार मोमिनों के सब्र का पूरा इम्तिहान लेगा. गर्मी में 15 घंटे से अधिक समय तक भूख और प्यास बर्दाश्त करना होगी. खुदा के दरबार में अपनी अर्जी लगाने के लिए रोजेदारों ने भी पूरी तैयारी कर ली है. माह-ए-रमजान समूची मानव जाति को प्रेम, भाईचारे और इंसानियत का संदेश भी देता है.रमजान का महीना एक ऐसा पवित्र महीना है, जिसमें इस्लाम धर्म को मानने वाले पूरे एक महीने रोजा रखते हैं, जिसमें सुबह शहरी और शाम को इफ्तार होता है, लोग सुबह शहरी करके दिन भर रोजा(उपवास) रखते हैं और शाम को इफ्तार करते हैं.
माह-ए रमजान रहमत की बारिश का पाक माह : मौलाना मंजूर
धनगरी के मौलाना मंजूर आलम मदनी ने कहा कि रमजान उल मुबारक रमज़ान मुसलमानों के लिए पाक और पवित्र महीना है. इस दौरान रोज़े रखे जाते हैं, इबादत की जाती है और नेक कार्यों पर जोर दिया जाता है. रोजा सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है. रोजा आंख, हाथ, पैर, दिल, मुंह सभी का होता है, ताकि रोजा रखने वाला इंसान हमेशा बुराई से तोबा करता रहे और बुराइयों से बचता रहे. रोजे की शुरुआत में फर्ज की नमाज होती है. रोजा खोलने के वक्त मगरिब की नमाज होती है.
रहमत, बरकत और मगफिरत का है महीना : रिजवानुल होदा
उकरीद के रिजवानुल होदा ने कहा कि रमजान रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना है. इबादत कर सभी गुनाह माफ कर दिये जाते हैं. रमजान में रोजेदार की दुआ खाली नहीं जाती है. यह महीना स्वयं के अनुशासन पर जोर देने का है. यदि कोई बुराई है तो उसे त्यागने का महीना है. रमजान का पहला हिस्सा माह के 1-10 दिन का रहमत, दूसरा हिस्सा 11-20 दिन का मगफिरत और 21 से 30 दिन का हिस्सा दोजख से आजादी का है. छोटा हो या बड़ा प्रत्येक मोमीन अकीदत के साथ रोजा रखते हुए रमजान माह के प्रति अपनी आस्था प्रकट करता है.
प्रेम, भाईचारे व इंसानियत का संदेश देता है रमजान : हाजी इरशाद
सेक्टर-9 अंजुमन जामा मस्जिद के अध्यक्ष हाजी इरशाद अहमद खान ने कहा कि पाक महीना माह-ए-रमजान खुद को खुदा की राह में समर्पित कर देने का प्रतीक है. यह समूची मानव जाति को प्रेम, भाईचारे और इंसानियत का संदेश भी देता है. मौजूदा हालात में रमजान का संदेश और भी प्रासंगिक हो गया है. पाक महीने में अल्लाह अपने बंदों पर रहमतों का खजाना लुटाता है और भूखे-प्यासे रहकर खुदा की इबादत करने वालों के गुनाह माफ हो जाते हैं. इस माह में दोजख के दरवाजे बंद कर दिये जाते हैं और जन्नत की राह खुल जाती है.
रमजान में सभी बुराइयों को छोड़ सिर्फ अल्लाह की करें इबादत : निजाम
गौशनगर, चास के निजाम अंसारी ने कहा कि मुसलमानों के लिए रमजान का महीना बेहद पवित्र है. इस पूरे माह लोग रोजा रखते हैं और नमाज पढ़कर अल्लाह की इबादत करते हैं. मुसलमान पूरे 30 दिनों तक रोजा रखते हैं, जिसका पालन सख्ती के साथ करना पड़ता है. रमजान में रोजा रखना सबसे महत्वपूर्ण है. इस महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग सूर्योदय से सूर्यास्त तक कुछ नहीं खाते-पीते हैं. इसके बाद शाम में रोजा खोलते हैं. इफ्तार के रूप में इस पवित्र समय की एक बड़ी दावत होती है, जिसमें परिवार के सभी सदस्य और करीबी लोग शामिल होते हैं.
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