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सीसीएल की बंद खदान की मछली का स्वाद चख रहा सासाराम

Updated at : 26 Apr 2024 12:36 AM (IST)
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सीसीएल की बंद खदान की मछली का स्वाद चख रहा सासाराम

बेरमो की प्रसिद्ध व्यावसायिक मंडी जरीडीह बाजार के कुछ युवा मछली पालन कर न सिर्फ आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि हजारों रुपये का मुनाफा भी कमा रहे हैं.

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राकेश वर्मा, बेरमो. बेरमो की प्रसिद्ध व्यावसायिक मंडी जरीडीह बाजार के कुछ युवा मछली पालन कर न सिर्फ आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि हजारों रुपये का मुनाफा भी कमा रहे हैं. 27 युवाओं की टोली सीसीएल की एक बंद पड़ी खदान, जो करीब 150 फीट गहरा है, में केज कल्चर के जरिये मछली पालन कर रही है. टोली में शामिल युवा जरीडीह बाजार पूर्वी पंचायत तथा कुछ बेरमो पश्चिमी पंचायत के रहनेवाले हैं. इन युवाओं ने एक संगठन बनाया तथा केज कल्चर के माध्यम से मछली पालन करने की ठानी. युवाओं के अनुसार, उनलोगों ने चांडिल डैम, कोनार डैम व तेनुघाट डैम में केज कल्चर से कई लोगों को मछली पालन करते देखा. इससे इनलोगों में भी मछली पालन करने की जिज्ञासा बढ़ी. करीब 10-11 माह पहले इसका प्रपोजल बनाकर समिति ने झारखंड सरकार से सहयोग की मांग की. समिति में पंकज साहनी, कुणाल साहनी, चंदन साहनी, राजू साहनी, सुजीत निषाद, राजेश निषाद, धर्मेंद्र निषाद, विक्की निषाद सहित कुल 27 युवक शामिल हैं. सभी ने मत्स्यजीवी सहयोग समिति के माध्यम से एक प्रपोजल बनाकर बोकारो जिले के डीएफओ तथा मत्स् जीवी के कार्यालय में अधिकारियों से मिलकर केज कल्चर से जुड़ने का प्रस्ताव रखा. समिति ने मंत्री बादल पत्रलेख से भी पत्राचार किया था. श्री पत्रलेख ने इस बाबत एक आदेश दिया था. विभाग ने प्रदान किया 30.96 लाख रुपये का लोन : आवेदन करने के कुछ माह बाद ही जिला मत्स्य विभाग ने करीब 30.96 लाख रुपये का लोन प्रदान करते हुए केज कल्चर के लिए मत्स्यजीवी सहयोग समिति, जरीडीह बाजार को सामान दिया. इसमें 10 फीसदी राशि लगभग साढ़े तीन लाख रुपये 27 युवकों ने आपस में मिलकर इकट्ठा किये. राशि मत्स्यजीवी बोकारो जिला कार्यालय को बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से दी गयी. समिति के कुणाल साहनी के अनुसार फिलहाल इसमें नौ केज डाले गये हैं. एक केज की कीमत 3.44 लाख रुपये है. एक केज 8 मीटर गुणा 6 मीटर का है. इसमें चारों तरफ जाली लगायी गयी है. सरकारी स्तर पर तीन बोट और नौ सुरक्षात्मक जैकेट प्रदान किये गये हैं. प्रत्येक केज के लिए 3-3 युवाओं का रजिस्टर्ड संगठन है. रांची में लिया जरूरी प्रशिक्षण : मत्स्यजीवी सहयोग समिति, जरीडीह बाजार से जुड़े युवकों ने केज कल्चर के माध्यम से मछली पालन करने के लिए रांची के धुर्वा में चार बार पांच दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त किया. ट्रेनिंग समाप्त होने के बाद सभी को सर्टिफिकेट प्रदान किया गया. कुल 50 युवकों ने इसका ट्रेनिंग लिया, ताकि वे कही भी मछली पालन कर सकते है. ट्रेनिंग के बाद जिला मत्स्य विभाग ने समिति को केज कल्चर का सामान उपलब्ध कराया तथा विभाग से जुड़े लोगों ने ही जरीडीह बाजार रेलवे फाटक से सटे सीसीएल की बंद पड़ी खदान के किनारे केज कल्चर बनाकर दिया. इसके बाद विभाग ने 55 हजार पीस एक से डेढ़ इंच साइज का पकेसियर्स (बचवा मछली) का जीरा उन्हें दिया गया. छह माह में तैयार हुई 15 टन मछली : छह माह बाद मछली एक-एक किलो की हो गयी. करीब 15 टन मछली 110 रुपये किलो की दर से डेढ़ माह पहले बिहार के सासाराम भेजी गयी थी. मछली की बिक्री से जो पैसे आये, उसमें से कुछ राशि समिति सदस्यों बीच बांट दी गयी. पंकज साहनी के अनुसार, युवकों को 2-3 हजार करके राशि दी गयी तथा शेष राशि बैंक में जमा कर रखी गयी है. दूसरे खेप की मछली निकालने की तैयारी है. अभी केज में काफी मछलियां हैं. कोरोना संकट में बाहर से लौटे युवाओं को मिला स्वरोजगार : क्षेत्र के कई युवक रोजगार के लिए बाहर के राज्यों में पलायन करते हैं. कोरोना संकट के समय अधिकांश युवक अपने घर लौट आये. रोजगार छूटने पर भी हिम्मत नहीं हारी. कई युवकों ने स्वरोजगार से जुड़ने का मन बनाया और मछली पालन से जुड़े. मत्स्यजीवी सहयोग समिति का कहना है कि सरकार से अगर मदद मिले तो बेरोजगार युवक मछली पालन के व्यापार को बढ़ा सकते हैं. समिति का कहना है कि जिस सीसीएल के हजारों गैलन पानी से भरी खदान में केज कल्चर के माध्यम से मछली पालन किया जा रहा है, वहां से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है. इस कारण उन्हें काफी परेशानी होती है. फिलहाल केज कल्चर तक वे लोग किसी तरह बोट के सहारे पहुंच पाते हैं, क्योंकि सभी को बोट चलाना नहीं आता है. अगर वहां तक पहुंचने के लिए इलेक्ट्रिक बोट उपलब्ध हो जाये, तो काफी सहूलियत होगी. उनका कहना है कि फिलहाल समिति को 9 केज मिले हैं. अगर 40 केज रहेंगे तो मछली उत्पादन बढ़ेगा और व्यापार भी बढ़ेगा. इससे सैकड़ों लोग रोजगार से जुड़ सकेंगे. वे कहते हैं कि बेरमो में दूसरे राज्यों से मछली आती है. हम सभी की कोशिश है कि यहीं पर मछली उत्पादन करें जिससे बोकारो व धनबाद की मछली की डिमांड पूरी हो सके.

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