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जंगल सटे स्कूल में सांप-बिच्छू घुसने से दहशत में बच्चे

Updated at : 25 Aug 2024 1:01 AM (IST)
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जंगल सटे स्कूल में सांप-बिच्छू घुसने से दहशत में बच्चे

44 साल पुराने मध्य विद्यालय लकड़ाखंदा में शौचालय व शुद्ध पानी की भी व्यवस्था नहीं

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धर्मनाथ कुमार, बोकारो.

एक तरफ सरकार जहां शिक्षा के स्तर को ठीक करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर जोशी काॅलोनी स्थित राजकीयकृत मध्य विद्यालय लकड़ाखंदा बदहाली का शिकार है. 1980 में स्थापित इस स्कूल से पढ़ कर दर्जन स्टूडेंट्स डॉक्टर, इंजीनियर के साथ सरकारी संस्थानों में सेवारत हैं, लेकिन स्थापना के 44 साल बाद भी स्कूल मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. स्कूल में पीने के लिए स्वच्छ पानी, शौचालय की बेहतर व्यवस्था नहीं है. पहले से बना जो शौचालय पूरी तरह जर्जर हो गया है. इमरजेंसी के समय सबसे ज्यादा परेशानी लड़कियों को होती है. उन्हें छुट्टी लेकर घर जाना पड़ता है. इतना ही नहीं, विद्यालय जंगल से सटा हुआ और बाउंड्रीविहीन भी है. बताते चलें कि विद्यालय में करीब 100 बच्चे नामांकित हैं, जबकि चार शिक्षक कार्यरत हैं.

स्कूल बंद होते ही लग जाता है असामाजिक तत्वों का जमावड़ा :

प्राचार्य दशरथ दास सहित शिक्षकों ने बताया कि स्कूल बंद होते ही असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है. लोग जुआ खेलते हैं और विद्यालय में गंदगी फैलाकर व तोड़-फोड़ कर जाते हैं. इस स्कूल में कोई मूलभूत सुविधाएं भी नहीं है. बच्चियों के लिए शौचालय की सुविधाएं सही नहीं है. विद्यालय में बाउंड्री नहीं होने से बच्चियों की सुरक्षा के लिए पूरे दिन ध्यान रखना पड़ता है. वहीं कई बार सांप और बिच्छू भी स्कूल परिसर में प्रवेश कर जाते हैं. जिससे बच्चों में भय बना रहता है. इससे पढ़ाई भी बाधित होती है. यदि यह विद्यालय दूसरे स्थान पर स्थानांतरित कर दिया जाये तो अच्छा होगा.

बांस के सहारे स्कूल पहुंचा है बिजली का तार :

विद्यालय में बिजली कनेक्शन है, लेकिन बांस के माध्यम से बिजली तार गया है. बारिश में बांस में करंट आने का डर रहता है. विद्यालय की ओर से बिजली विभाग के एसडीओ को समस्याओं से भी अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई भी पहल नहीं की गयी. ऐसे में कभी भी कोई अप्रिय घटना होने का डर बना रहता है.

कच्चे रास्ता से होकर बच्चे पहुंचे हैं स्कूल :

विद्यालय में प्रवेश के लिए शिक्षकों के साथ बच्चों को भी कच्चे रास्ता से होकर ही आना पड़ता है. बारिश में रास्ता कीचड़मय हो जाता है. ऐसे में कई बार बच्चे गिरकर चोटिल भी जाते हैं.

बोले डीएसइ :

डीएसइ अतुल कुमार चौबे ने कहा कि राजकीयकृत मध्य विद्यालय लकड़ाखंदा का निरीक्षण कर सभी जानकारी ली जायेगी. प्राथमिकता के साथ बच्चों को बेहतर शिक्षा देनी है. विद्यालय की सभी समस्याओं को दूर किया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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