Bokaro News : जारंगडीह माइंस के लिए नया माइन प्लान तैयार

Published at :12 Feb 2025 12:37 AM (IST)
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Bokaro News : जारंगडीह माइंस के लिए नया माइन प्लान तैयार

Bokaro News : सीसीएल कथारा क्षेत्र : अगले 13 साल के लिए बने पीआर में 12.5 मिलियन टन है रिजर्व कोल

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Bokaro News : राकेश वर्मा, बेरमो. सीसीएल कथारा प्रक्षेत्र अंतर्गत जारंगडीह खुली खदान को लॉन्ग टर्म जिंदा रखने के लिए सीसीएल मुख्यालय गंभीर है तथा इसके लिए नया माइन प्लान बनाया गया है. आगामी 13 साल तक सुचारू रूप से कोयला खनन के लिए मुख्यालय ने प्रोजेक्ट रिपोर्ट(पीआर) तैयार किया है. 13 साल के लिए कुल 12.5 मिलियन टन कोल रिजर्व का नया पीआर बनाया गया है. प्रत्येक साल 15 लाख टन तथा अधिकतम 25 लाख टन (इसी एक्सपेंशन के बाद) कोयला खनन किया जायेगा. 2019 में नया पीआर इम्प्लीमेंट हुआ तथा दिसंबर 2023 में इसकी पर्यावरणीय स्वीकृति मिली. जनवरी 2024 से विधिवत रूप से इस पर काम शुरू हुआ. इस नये पीआर के तहत जारंगडीह माइंस का विस्तारीकरण शुरू होगा, जिसके तहत कई स्थानों की शिफ्टिंग की प्रक्रिया तेज होगी. फिलहाल शिफ्टिंग प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है.

ढोरी माता तीर्थालय को नये स्थान पर किया जायेगा शिफ्ट : शिफ्टिंग के पहले फेज में जारंगडीह स्थित चर्चित ढोरी माता तीर्थालय को शिफ्ट किया जाना है. ढोरी माता तीर्थालय परिसर में बने चर्च के अलावा उच्च विद्यालय व मध्य विद्यालय, सिस्टरों का आवास, गेस्ट हाउस, मेस, डिस्पेंशरी, किचेन, शौचालय आदि को एक साथ एक स्थान पर शिफ्ट किया जाना है. इसके लिए जारंगडीह 16 नंबर के निकट नया ढोरी माता तीर्थालय का निर्माण कार्य शुरू है. तीर्थालय के निर्माण में करीब 26 करोड़ की लागत आयेगी.

टाटा ब्लॉक से 67 लोगों को किया जाना है शिफ्ट :

तीर्थालय व अन्य के अलावा जारंगडीह स्थित टाटा ब्लॉक को भी शिफ्ट किया जाना है. प्रबंधन के अनुसार टाटा ब्लॉक से कुल 67 लोगों को दूसरे स्थान पर शिफ्ट किया जाना है. कुल 67 लोगों में 11 कोलकर्मी हैं. शेष लोगों को शिफ्टिंग के एवज में 40-40 हजार रुपये दिये जाने का एप्रूवल सीसीएल बोर्ड ने दिया है. ढोरी माता तीर्थालय, टाटा ब्लॉक के अलावा जारंगडीह स्थित स्वामी विवेकानंद स्कूल और पूरा जारंगडीह परियोजना पदाधिकारी का कार्यालय को भी माइंस विस्तारीकरण के क्रम में फेज बाइ फेज शिफ्ट किया जायेगा.

दो पार्ट में बंटा हुआ है जारंगडीह परियोजना का खनन कार्य :

मिली जानकारी के अनुसार जारंगडीह परियोजना का खनन कार्य दो पार्ट में बंटा हुआ है. एक पूर्वी भाग तथा दूसरा पश्चिमी भाग. फिलहाल जारंगडीह माइंस का खनन कार्य पश्चिमी पार्ट में चल रहा है. पश्चिमी पार्ट में 60 लाख टन कोल रिजर्व है. इसमें चार साल काम करना है. जबकि पूर्वी भाग में कोल प्रोपर्टी की जरूरत आने वाले समय में पड़ेगी. इसमें सात साल तक काम करना है.

पौने दो माह शेष, लक्ष्य का आधा भी प्रोडक्शन नहीं :

प्रबंधकीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जारंगडीह परियोजना में फिलहाल दो आउटसोर्स पैच से कोयला खनन किया जा रहा है. दोनों आउटसोर्स पैच मिला कर एक साल में 15 लाख टन तथा दो साल में 30 लाख टन कोयला उत्पादन किया जाना है. चार साल में यहां से 60 लाख टन उत्पादन किये जाने की योजना है. इसके बाद शिफ्टिंग वाले स्थान से कोयला खनन का काम शुरू किया जायेगा. चालू वित्तीय वर्ष में परियोजना का कोयला उत्पादन लक्ष्य 15 लाख टन निर्धारित है. जबकि वित्तीय वर्ष के समापन में पौने दो माह का समय शेष बचा है और उत्पादन लक्ष्य का आधा भी नहीं हुआ है. अभी तक मात्र छह लाख टन उत्पादन हुआ है, जिसमें करीब 80 हजार टन विभागीय उत्पादन हुआ है. मालूम हो कि परियोजना का मैन पावर लगभग 650 है.

गत वित्तीय वर्ष में परियोजना ने किया था बेहतर प्रदर्शन :

वित्तीय वर्ष 2023-24 में जारंगडीह परियोजना ने कोयला उत्पादन में बेहतर प्रदर्शन किया था. गत वित्तीय वर्ष में परियोजना ने 14 लाख 81 हजार टन कोयला उत्पादन किया था, जबकि लक्ष्य 6 लाख 50 हजार टन का था. मालूम हो कि गत वित्तीय वर्ष में कथारा एरिया ने 28.61 लाख टन कोयला उत्पादन किया था. जबकि चालू वित्तीय वर्ष में उत्पादन लक्ष्य 44 लाख टन निर्धारित है. इस लक्ष्य को प्राप्त करने में जारंगडीह का जो सहयोग होना चाहिए था, उसमें परियोजना सफल नहीं हो पा रही है.

उत्पादन में जल्द सुधार किया जायेगा : पीओ

जारंगडीह परियोजना के पीओ बिनोद कुमार ने कहा कि आउटसोर्स कंपनी का परफॉरमेंस खराब रहने के कारण उत्पादन में थोड़ी कमी आयी है, लेकिन जल्द सुधार कर लिया जायेगा. आने वाले समय में माइंस विस्तारीकरण के बाद परियोजना का भविष्य आगामी कई वर्षों तक के लिए उज्ज्वल हो जायेगा.

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नियन हर तरह से सहयोग को तैयार : सचिव

आरसीएमयू के कथारा एरिया सचिव विल्सन फ्रांसिस उर्फ बबलू, ने कहा कि प्रबंधक विभागीय उत्पादन पर जोर दे तथा शिफ्टिंग प्रक्रिया में तेजी लाये. यूनियन प्रबंधन को हर तरह से सहयोग करने को तैयार है.

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