ePaper

Naxal News: खेती के लिए एक जोड़ा बैल के लालच में एक गरीब आदिवासी कैसे बन गया नक्सली? अंजाम देख हैरत में थी पुलिस

Updated at : 02 Nov 2025 1:57 PM (IST)
विज्ञापन
naxal news gomiya

नक्सली फूलचंद किस्कू का घर और बहू से बात करते पुलिस पदाधिकारी

Naxal News: नक्सलियों ने 10 साल पहले एक गरीब आदिवासी परिवार को खेती के लिए एक जोड़ा बैल देने का वादा कर उग्रवादी संगठन में शामिल कराया था. इस दौरान वह कई नक्सली वारदातों में संलिप्त रहा. हालांकि अब तक न तो उसे बैल मिले और न वादा करनेवाले रहे. आज परिवार भी बदहाल है. आखिरकार पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

विज्ञापन

Naxal News: गोमिया (बोकारो) नागेश्वर-बोकारो जिले के गोमिया थाना क्षेत्र का कुख्यात उग्रवादी फूलचंद किस्कू उर्फ राजू जिसे 10 वर्ष पहले नक्सलियों ने खेती करने के लिए एक जोड़ा बैल देने का वादा कर नक्सली संगठन में शामिल कराया था, लेकिन उसे आज तक न तो खेती करने के लिए एक जोड़ा बैल मिला और न ही संगठन में शामिल करने वाला कोई सदस्य बैल देने के लिए आज जीवित है. नक्सली संगठन के लगभग सभी सदस्य पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं. कुछ बच गया है तो वो है फूलचंद किस्कू से किया हुआ वादा और फूलचंद किस्कू के पर 15 से अधिक हत्या, लूट, डकैती, रंगदारी, सरकारी संपत्ति को क्षति करने जैसे संगीन आपराधिक मामले. आखिरकार पुलिस ने विशेष छापेमारी कर फूलचंद किस्कू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया.

घने जंगल में है फूलचंद किस्कू का घर


फूलचंद किस्कू का घर गोमिया थाना क्षेत्र के सुदूरवर्ती घने जंगल के बीचों-बीच धमधरवा गांव में है. फूलचंद किस्कू का घर गांव से करीब एक किलोमीटर सुनसान जंगल में है. गांव से फूलचंद के घर जाने का केवल पैदल मार्ग है.

ये भी पढ़ें: Critical Metals Congress: जमशेदपुर में क्रिटिकल मेटल्स कांग्रेस छह नवंबर से, नीति-निर्माताओं और वैज्ञानिकों का होगा जुटान

जब घर पहुंची पुलिस


आज से करीब दो माह पूर्व विशेष अभियान के तहत फूलचंद किस्कू के घर गोमिया पुलिस गयी थी. जब उसके घर पुलिस पहुंची तो परिवार की हालत देख विश्वास नहीं हुआ. प्रश्न यही आया कि नक्सलवाद ने इसे इतना दरिद्र बनाया या फिर दरिद्रता ने इसे नक्सली बना दिया. उसके घर की दीवारें मिट्टी की हैं. छत पर बांस और पुराने टीन के टुकड़े किसी तरह टिके हैं, जो हवा के झोंके में हिलते हैं, मानो गिर पड़ेंगे. दरवाजे की जगह फटे कपड़े का पर्दा लटका है और टीन का गेट लगा हुआ है. घर में पुलिस को फूलचंद नहीं मिला.

आखिरकार पुलिस गिरफ्त में आया फूलचंद किस्कू


पुलिस को आवास में मिली उसकी बहू. फूलचंद के नक्सली होने के कारण न ही उसके परिवार के किसी सदस्य का आधार कार्ड बन पाया है और न ही कोई सरकारी योजना का लाभ मिल पा रहा है. फूलचंद के परिवार को गांव वाले तिरस्कार की भावना से भी देखते हैं. पुलिस ने फूलचंद की बहू को झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण नीति की जानकारी दी और फूलचंद को पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कराने का निर्देश दिया, लेकिन बहू के चेहरे का हाव-भाव और बोल-चाल कुछ और ही इशारे कर रहे थे, जैसे फूलचंद आत्मसमर्पण करने के पक्ष में नहीं दिखाई दे रहा हो. 3-4 दिन बीत जाने पर भी कोई जवाब नहीं मिलने पर एक टीम का गठन कर फूलचंद किस्कू के विरुद्ध छापामारी की गयी. फूलचंद को उसके घर के समीप जंगल से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया.

विज्ञापन
Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola