जेबीसीसीआई-12 के गठन की मांग को लेकर कोयला मजदूरों का प्रदर्शन
प्रदर्शन करते हुए यूनियन नेतागण | Prabhat Khabar Network
कोयला मजदूरों ने जेबीसीसीआई-12 के गठन और वेतन समझौते की मांग को लेकर कोल इंडिया के महाप्रबंधक कार्यालयों के बाहर धरना-प्रदर्शन किया. निजीकरण के विरोध में भी आवाज उठाई गई. आगे की रणनीति के लिए सम्मेलन आयोजित होगा.
कोयला मजदूरों के वेतन समझौते और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर जेबीसीसीआई-12 (ज्वाइंट बाइपार्टाइट कमेटी फॉर द कोल इंडस्ट्री) के गठन की मांग तेज हो गयी है. पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सोमवार को कोल इंडिया की सभी अनुषंगी कंपनियों के महाप्रबंधक कार्यालयों के समक्ष दो घंटे का धरना-प्रदर्शन किया गया. इसी क्रम में बेरमो क्षेत्र के सीसीएल बीएंडके, ढोरी और कथारा महाप्रबंधक कार्यालयों के समक्ष संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा के बैनर तले मजदूरों ने प्रदर्शन किया.
धरना को संबोधित करते हुए एटक नेता एवं जेबीसीसीआई सदस्य लखनलाल महतो ने कहा कि जेबीसीसीआई-11 की अवधि 30 जून 2026 को समाप्त हो चुकी है और एक जुलाई 2026 से जेबीसीसीआई-12 की अवधि शुरू हो गयी है. इसके बावजूद अब तक कोयला मंत्रालय और कोल इंडिया प्रबंधन की ओर से जेबीसीसीआई-12 के गठन की दिशा में कोई पहल नहीं की गयी है.
उन्होंने मांग की कि जेबीसीसीआई-12 का शीघ्र गठन किया जाये तथा जेबीसीसीआई-11 के लंबित मुद्दों का भी समाधान किया जाये. उन्होंने बताया कि 12 सितंबर को रांची में संयुक्त मोर्चा का सम्मेलन आयोजित होगा, जिसमें आगे के आंदोलन की रणनीति तय की जायेगी. आवश्यकता पड़ने पर कोल इंडिया में बड़े पैमाने पर हड़ताल की घोषणा भी की जा सकती है.
निजीकरण के खिलाफ भी जताया विरोध
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार कोयला उद्योग में निजीकरण को बढ़ावा दे रही है. एमडीओ, रेवेन्यू शेयरिंग और कॉमर्शियल माइनिंग जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका को कमजोर किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार जेबीसीसीआई-12 का गठन नहीं करना चाहती और उसकी जगह वार्ताकार परिषद की व्यवस्था लागू करना चाहती है, जिसे मजदूर संगठन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेंगे.
धरना-प्रदर्शन में एटक, इंटक, एचएमएस, सीटू और एक्टू से जुड़े सैकड़ों श्रमिक शामिल हुए. हालांकि भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) इस आंदोलन से अलग रहा. मजदूर नेताओं ने चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जायेगा.
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