जरीडीह में लाइसेंसधारी निजी दुकानों पर यूरिया डीएपी बेचने में दुकानदारों को हो रहा है नुकसान

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जरीडीह में लाइसेंसधारी खाद दुकानदारों को सरकारी दर पर यूरिया और डीएपी बेचने से प्रति बैग 60 रुपये का नुकसान हो रहा है। जानें पूरी समस्या और दुकानदारों का दर्द।
जरीडीह में धान की रोपाई के बाद फसल में यूरिया खाद की आवश्यकता के बीच किसानों को इसकी उपलब्धता और कीमत को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. जहां लाइसेंसधारी निजी दुकानों पर यूरिया व डीएपी उपलब्ध होने के बावजूद, किसानों को निर्धारित दर पर खाद देने के बाद बेहद कम कमीशन से दुकानदारों के मुनाफे न होने का मुख्य कारण बन गया है.वर्तमान व्यवस्था में सरकार द्वारा निर्धारित दर पर यूरिया एवं डीएपी की बिक्री करना दुकानदारों के लिए घाटे का सौदा बन गया है.उन्होंने कहा कि 45 किलोग्राम यूरिया का सरकारी बिक्री मूल्य 266 रुपये प्रति बैग निर्धारित है, जबकि खाद खरीदी रांची,दुमका देवघर व हाजारीबाग से दुकानदार सरकार से 251 रुपए में खरीदने हैं इसी में दुकानदार खरीद, परिवहन, लोडिंग एवं अनलोडिंग सहित एक बैग पर करीब 380 रुपये तक की लागत पड़ रही है.उतना ही नहीं एक ट्रक पर लगभग 1 लाख रुपए का अन्य उत्पाद लेने के लिए बाध्य करके के यूरिया दिया जाता है.वही एक ट्रक ट्रक डीएपी लेने पर एक लाख पंचास हजार अन्य उत्पाद लेने के लिए मजबूर किया जाता है अगर दुकानदार नहीं लेते हैं तो उनका डीलरशिप रद्द कर देने की बात करता है. 50 से 60 रुपये तक हो रहा है दुकानदारों का घाटदुकानदारों को निर्धारित मूल्य पर खाद बेचना आर्थिक रूप से संभव नहीं रह गया है.दुकानदारों ने बताया कि प्रत्येक बैग पर 50 से 60 रुपये तक परिवहन खर्च के साथ लोडिंग और अनलोडिंग का अतिरिक्त व्यय भी दुकानदारों को स्वयं वहन करना पड़ता है.इसके बावजूद प्रशासन द्वारा निर्धारित मूल्य पर बिक्री का दबाव बनाया जाता है, जिससे दुकानदारों को प्रति बैग लगभग 60 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है.इसके अलावा ढुलाई खर्च, लाइसेंस के कड़े नियम और पीओएस मशीन के जरिए तय दाम पर ही बिक्री की बाध्यता के कारण व्यापार में लागत निकलना भी मुश्किल हो रहा है.
अगर वर्षा नहीं हुई तो किसानों से ज्यादा दुख दुकानदारों होता है. भले ही बारिश नहीं होने से किसानों के लिए दुख की घड़ी होती है लेकिन उससे भी ज्यादा दुख बीज दुकानदारों को होने के साथ घटा भी सहाना पड़ता है क्योंकि अगर बारिश नहीं हुई तो दुकानों से यूरिया व डीएपी भी नहीं बिकेगी जिसके चलते गोदाम में ही माल पड़ा रह जायेगा.अगर हल्का सा भी पानी व हवा लग जाए तो पूरा पैकेट जाम हो जाएगा साथी एक्सपायरी डेट को अभी ख्याल रखना पड़ता है उससे पहले ही माल को बेचना पड़ता है नहीं तो फिर व माल के साथ पैसे का नुक़सान दुकानदारों को उठाना पड़ता है.
क्या कहते हैं दुकानदार
यूरिया और डीएपी पर डीलर कमीशन प्रति बोरा कुछ ही रुपये बैठता है जो दुकान के किराए और बिजली खर्च को भी पूरा नहीं कर पाता है. सुरेश महतो बीज विक्रेता संघ बोकारो जिला सचिव सह नई हरा भरा बीज दुकान
गोदाम तक खाद लाने का ढुलाई और लोडिंग-अनलोडिंग का खर्च मार्जिन से ज्यादा हो जाता है.खाद को बड़े गोदाम में रखने का भाड़ा भी बहुत अधिक लागत है. - वीरेंद्र कुमार सिंह न्यू प्रसाद बीज भंडार जैनामोड़
किसानों को यूरिया एवं डीएपी की आपूर्ति पैक्स के माध्यम से कराई जाए, ताकि निजी विक्रेताओं को होने वाले नुकसान से राहत मिल सके. - दशरथ साव शांति बीज भण्डार तुपकाडीह
सरकार द्वारा अधिकतम खुदरा मूल्य कड़ाई से तय होने के कारण दुकानदार अपनी तरफ से दाम नहीं बढ़ा सकते.अगर अच्छी बारिश नहीं हुई तो हम लोगों को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है. - दीपक सिंह हाइब्रिड बीज भंडार जैनामोड़
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