बोकारो में हाथी आए तो बजेगा सायरन! 6 कैमरों से होगी निगरानी, 50 हजार हेक्टेयर का सर्वे
बैठक में मौजूद डीसी व विभागीय अधिकारी जानकारी देते वन अधिकारी संदीप शिंदे | Prabhat Khabar Network
बोकारो में मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए प्रशासन ने हाथियों के सुरक्षित गलियारे, पौधरोपण और समय पर चेतावनी देने की नई व्यवस्था पर जोर दिया है।
बोकारो: समाहरणालय कार्यालय कक्ष में उपायुक्त अजय नाथ झा ने मानव-हाथी संघर्ष को कम करने और हाथियों के आने-जाने वाले रास्तों को सुरक्षित रखने को लेकर संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की. साथ ही, नमामि गंगे के तहत तेलमोच्चो पुल के पास प्रस्तावित घाट और रिवरफ्रंट विकास योजना की भी समीक्षा की गई.
गोमिया में 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र का सर्वेक्षण
मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए अब तक किए गए कार्य और प्रगति की जानकारी वन पदाधिकारी संदीप शिंदे ने दी. उन्होंने बताया कि गोमिया प्रखंड में करीब 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र का सर्वेक्षण किया गया है. हाथियों के आने-जाने के रास्तों, उनके प्रवेश और निकलने के स्थानों तथा पूर्व में हुई जनहानि, घायल होने, मकान क्षति और फसल नुकसान वाले स्थानों की पहचान की गई है.
उन्होंने बताया कि लुगुबुरू, झुमरा पहाड़ के निचले क्षेत्र, मिर्जापुर और तेनुघाट डैम के आसपास के क्षेत्रों को हाथियों के आने-जाने वाले प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया है. हाथियों के लुगुबुरू क्षेत्र से हजारीबाग की ओर जाने वाले रास्ते पर भी नजर रखी जा रही है.
समय पर मिलेगी हाथियों की जानकारी
संदीप शिंदे ने बताया कि मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को कम करने के लिए कैमरे, थर्मल कैमरा उपकरण, सूचना संदेश और सायरन की मदद से समय पर चेतावनी देने की व्यवस्था तैयार की जा रही है. गोमिया क्षेत्र में छह कैमरे लगाए जा रहे हैं. इसका नियंत्रण कक्ष लालपनिया में बनाया जा रहा है.
हाथियों के रास्ते में बाधा नहीं बनें विकास कार्य
उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सड़क, पुल, राजमार्ग, खनन और अन्य निर्माण कार्यों के दौरान हाथियों के पुराने रास्ते प्रभावित नहीं होने चाहिए. जहां जरूरत हो, वहां हाथियों के सुरक्षित आवागमन के लिए नीचे से या ऊपर से रास्ता बनाने की व्यवस्था की जाए. निर्माण के दौरान हाथियों के रास्ते में मलबा और निर्माण सामग्री नहीं रखने का भी निर्देश दिया गया.
हाथियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था पर जोर
हाथियों को जंगल के अंदर ही पर्याप्त भोजन मिल सके, इसके लिए बांस और स्थानीय पौधों का अधिक से अधिक रोपण करने पर जोर दिया गया. मिर्जापुर और तेनुघाट डैम के आसपास करीब 50 एकड़ क्षेत्र में बांस लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है. जंगल के बाहर खाली जमीन की पहचान कर वहां भी पौधरोपण करने को कहा गया.
सोलर फेंसिंग और मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने का सुझाव
हाथियों के आने-जाने वाले संवेदनशील क्षेत्रों में सोलर से चलने वाली फेंसिंग लगाने तथा मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने का सुझाव दिया गया. फूलदार पौधे और झाड़ियां लगाने से मधुमक्खियों को भोजन मिलेगा. साथ ही, स्थानीय लोगों के लिए आय का साधन भी विकसित होगा.
आसपास के जिलों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर
उपायुक्त ने बोकारो, रामगढ़ और हजारीबाग सहित आसपास के जिलों के बीच हाथियों की गतिविधियों की जानकारी साझा करने की व्यवस्था मजबूत करने को कहा. इससे किसी क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी की सूचना दूसरे क्षेत्र को समय पर मिल सकेगी और लोगों को पहले से सावधान किया जा सकेगा.
तेलमोच्चो में बनेगा आकर्षक घाट और रिवरफ्रंट
बैठक में चास के तेलमोच्चो पुल के पास प्रस्तावित घाट और रिवरफ्रंट की योजना भी प्रस्तुत की गई. करीब 280 मीटर क्षेत्र में घाट एवं पैदल चलने का रास्ता, पार्किंग, प्रवेश द्वार, बैठने की जगह, बच्चों के लिए खुला स्थान, सेल्फी स्थल, प्रतीक्षालय, महिला-पुरुष शौचालय, कपड़े बदलने की जगह और हरित क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव है.
रिवरफ्रंट में बोकारो की औद्योगिक पहचान के साथ झारखंड की संस्कृति, सोहराय कला और दामोदर नदी समेत जिले से होकर गुजरने वाली जानकारी को प्रदर्शित किया जाएगा. बारिश के पानी की निकासी और हरियाली का विशेष ध्यान रखा जाएगा.
मौके पर जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी नीतीश कुमार, उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार, प्रशिक्षु आईएएस अरविंद राधाकृष्णन, अपर नगर आयुक्त संजीव कुमार, जिला खनन पदाधिकारी रवि कुमार, नमामि गंगे के नोडल पदाधिकारी शक्ति कुमार, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी अविनाश कुमार सिंह समेत विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधि, तकनीकी विभागों के कार्यपालक अभियंता और अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे.
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