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कोयला उद्योग में मजदूरों के लिए आनेवाला समय संकटपूर्ण : आरपी सिंह

Updated at : 23 Aug 2024 12:33 AM (IST)
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कोयला उद्योग में मजदूरों के लिए आनेवाला समय संकटपूर्ण : आरपी सिंह

एनसीओइए सीटू बीएंडके एरिया की खासमहल में हुई जीबी बैठक

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प्रतिनिधि, गांधीनगर.

एनसीओइए सीटू बीएंडके एरिया की जीबी बैठक गुरुवार को खासमहल में एकेके ओसीपी रेस्ट सेंटर में हुई. अध्यक्षता यूनियन के क्षेत्रीय अध्यक्ष मनोज पासवान ने की. बैठक में केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों एवं कोयला उद्योग को एमडीओ एवं रेवेन्यू शेयरिंग में देने की केंद्र सरकार की तैयारी पर रोष जताया गया. यूनियन के केंद्रीय महामंत्री आरपी सिंह ने कहा कि कोल इंडिया में अब मात्र 20 फीसदी संगठित मजदूर बचे हैं. 80 फीसदी उत्पादन का कार्य ठेका मजदूरों से कराया जा रहा है. इसलिए अब आपकी मांगों पर प्रबंधन की नीतियां नकारात्मक ही रहेंगी. कहा कि स्थायी मजदूरों को ठेका मजदूरों के साथ खड़ा रहने की जरूरत है. समान काम के समान वेतन की मांग को जोरदार ढंग से उठाना होगा. सभी यूनियन को एकजुटता दिखानी होगी, तभी कोयला उद्योग में मजदूरों का अस्तित्व बचेगा.

ठेका मजदूरों का हो रहा शोषण : उन्होंने कहा कि वर्तमान में 2 लाख 10 हजार संगठित मजदूर कोयला उद्योग में बचे हुए हैं, जिनमें 1 लाख 44 हजार वैसे कामगार हैं, जिन्होंने या तो मृत्यु उपरांत या फीमेल वीआरएस के तहत नौकरी पायी है, वहीं 61 हजार ऐसे कर्मी हैं, जिन्हें अपनी जमीन के बदले नौकरी मिली है. यह भी यूनियनों के संघर्ष के कारण संभव हो पाया है. स्थायी कर्मियों का नियोजन पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया है. ठेका मजदूरों का आउटसोर्सिंग कंपनियों में शोषण किया जा रहा है.आने वाला समय संकटपूर्ण है. इस चुनौती का सामना करने के लिए मजदूरों को आगे आना होगा.

कोयला खदानों को एमडीओ व रेवेन्यू शेयरिंग की तैयारी :

उन्होंने कहा कि अब कोयला खदानों को एमडीओ एवं रेवेन्यू शेयरिंग में देने की तैयारी शुरू हो गई है. फिलहाल आउटसोर्सिंग कंपनियों को 5-6 सालों के लिए खदानों को दिया जाता है, परंतु एमडीओ में 20 से 25 वर्षों के लिए कंपनियों को खदान दिये जायेंगे. देश के 160 कोयला खदानों को चिह्नित किया गया है. अब कोयला निकालने से लेकर बेचने का अधिकार निजी मालिकों के हाथों में होगा. कंपनियां बाहर से मजदूरों को लाकर काम करेगी, स्थानीय लोगों का रोजगार भी छिनेगा. सरकार की मंशा देश के सारे पब्लिक सेक्टर को बेचने की है, जिसका उदाहरण कोयला उद्योग के साथ-साथ रेल, भेल स्टील, रेलवे सहित अन्य प्रतिष्ठानों में देखने को मिल रहा है. कहा कि अब जेबीसीसीआइ और बोनस होगा कि नहीं इस पर भी संशय है. आजादी के बाद इस सरकार के कार्यकाल में बेरोजगारी भयंकर रूप से बढ़ी है. सीटू इन मुद्दों को लेकर देशव्यापी आंदोलन कर रही है.

विस्थापित रैयतों के साथ हो रहा भेदभाव : वहीं केंद्रीय उपाध्यक्ष रामचंद्र ठाकुर ने कहा कि कोयला उद्योग में विस्थापित रैयतों के साथ भी भेदभाव किया जा रहा है. वे अपनी जमीन देकर ठगा महसूस कर रहे हैं. क्षेत्र में कोयला जनित उद्योग-धंधे को विकसित करने की जरूरत है.

कोयला उत्पादन बढ़ा, मजदूर सुविधाओं में कटौती :

यूनियन के संयुक्त महामंत्री प्रदीप कुमार विश्वास ने कहा कि कोयला उत्पादन 10 गुना बढ़ गया है, परंतु मजदूर सुविधाओं में लगातार कटौती हो रही है. ठेका मजदूर के साथ मिलकर संघर्ष करने की जरूरत है. संचालन करते हुए क्षेत्रीय सचिव विजय कुमार भोई ने कहा कि बेरमो में यूनियन की ताकत लगातार बढ़ रही है मजदूर भी जुड़ रहे हैं संगठित के साथ-साथ असंगठित मजदूरों को भी यूनियन से जोड़ा जा रहा है. बैठक को समीर विश्वास, अख्तर खान आदि ने भी संबोधित किया.

कौन-कौन थे उपस्थित :

मौके पर श्याम नारायण सतनामी, कमलेश गुप्ता, गोवर्धन रविदास, शिव शंकर तांती, तपन गोस्वामी, एनुल, मुश्ताक अहमद, मनोज तांती, केशव चंद्र मंडल, सुरेश कुमार, सूरज नाथ, दीपक राय, वीरेंद्र कुमार, चंद्रिका मलाह, भोला रजक, मो समीर अंसारी, गुल मोहम्मद, मनोज शर्मा, सुरेश शर्मा, मिन्हाज, हरभजन सिंह, नारायण महतो, मेहतरु, मुकेश तांती, अजय शाह, अशरफ अली, प्रकाश सहित कई कामगार उपस्थित थे.

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