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ओबी के आगोश में कॉलेज, दहशत में विद्यार्थी

Updated at : 08 Jul 2024 11:18 PM (IST)
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ओबी के आगोश में कॉलेज, दहशत में विद्यार्थी

ओबी के आगोश में कॉलेज, दहशत में विद्यार्थी

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राकेश वर्मा, बेरमो : बेरमो कोयलांचल का सबसे पुराना व प्रतिष्ठित केबी कॉलेज आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्षरत है. कहीं न कहीं इसकी मुख्य वजह सामाजिक उदासीनता और प्रबंधन की गैर जिम्मेवारी है. साढ़े तीन हजार से ज्यादा विद्यार्थी वाले इस कॉलेज के भवन से बिल्कुल सट कर सीसीएल कथारा प्रक्षेत्र अंतर्गत जारंगडीह परियोजना का माइंस विस्तारीकरण के साथ-साथ उत्पादन का काम चल रहा है. इसके तहत कुछ वर्ष पूर्व तक जारी ओवर बर्डन रिमूवल से कॉलेज के निकट ओबी का पहाड़ खड़ा हो गया है. कॉलेज के पीछे शिक्षकों के लिए बने कई आवास टूट गये तो कुछ आवास अंतिम दिन गिन रहे हैं. शिक्षकों की मानें तो सीसीएल प्रबंधन वर्ष 2010 से लेकर 2016-17 तक यहां लगातार ओबी गिराता रहा. इसके कारण कॉलेज परिसर के एक छोर में ओबी का पहाड़ खड़ा हो गया है. फिलहाल ओबी गिराना बंद है, लेकिन गिराये गये ओबी के ढेर पर से होकर ओबी लदा हाइवा पार करते हैं. इसके कारण पूरा कॉलेज परिसर में धूल आती रहती है. आंधी चलने पर काफी मात्रा में ओबी का डस्ट कॉलेज परिसर में आता है. कॉलेज परिसर में लगाये गये कई पेड़-पौधे भी सूख गये. किसी समय यह कॉलेज अपने बेहतरीन भवन व खूबसूरत लॉन के लिए जाना जाता था. लेकिन पूर्व में डीवीसी बीटीपीएस की चिमनियों से निकलने वाली छाई व सीसीएल के द्वारा गिराये गये ओबी के डस्ट के कारण कॉलेज की सूरत बिगड़ गयी.

जंतु विज्ञान विभाग से बिल्कुल सटा है ओबी का पहाड़

कॉलेज में कुछ भवन निर्माणाधीन हैं तो कई नये भवन बन कर तैयार हो गये हैं. करीब 60 लाख रुपये की लागत से छात्राओं के लिए बनाये गये दो मंजिला छात्रावास का उद्घाटन आठ फरवरी 2023 को किया गया था. यूजीसी के फंड से इसका निर्माण कराया गया है. छात्रावास से सटे कॉलेज परिसर के अंतिम छोर में भौतिकी विभाग का भी नया भवन करीब 50 लाख रुपये की लागत से बन रहा है. यह भवन भी ओबी के ढेर के निकट है. इसका निर्माण कार्य दूसरी किस्स के अभाव में कई साल से बंद है. इसके अलावा वर्ष 2015-16 में इस कॉलेज में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रुसा) की ओर से दो करोड़ रुपये के आवंटित फंड में कई भवनों का रिनोवेशन के अलावा करीब 60 लाख की लागत से जरूरत के सामानों की खरीदारी की गयी थी. इसमें से कॉलेज का रिनोवेशन अधूरा पड़ा है. बाथरूम व गेस्ट हाउस अधूरा है.

वनस्पति व रसायन विभाग पर भी खतरा

फिलहाल कॉलेज के परिसर के एक छोर में जहां ओबी का ढेर है उसी स्थान पर झारखंड सरकार के एचआरडी विभाग की ओर से 50 लाख रुपये की लागत से जंतु विज्ञान तथा 10 लाख की लागत से वनस्पति विज्ञान विभाग का नया भवन कुछ साल पहले बनाया गया है. साथ ही पांच-पांच लाख की लागत से रसायन विज्ञान विभाग का नया भवन बनाया गया है. उक्त सभी भवनों पर ओबी का खतरा मंडरा रहा है. दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. अगर किसी कारण ओबी का यह पहाड़ धंसा तो इसमें बड़े-बड़े बोल्डर भवनों के निकट तक आकर गिरेंगे. भविष्य में अगर ओबी में भूमिगत आग लग गयी तो इसका खामियाजा कॉलेज परिसर को भुगतना पड़ेगा. शिक्षक व छात्रों की माने तो कॉलेज का एक भाग ओबी के पहाड़ से घिरा रहने के कारण ना यहां इंटरनेट और मोबाइल सेवा भी ठीक से काम नहीं करता है.

कॉलेज प्रबंधन ने वाइस चांसलर को लिखा था पत्र

कॉलेज परिसर में सीसीएल द्वारा लगातार ओबी गिराये जाने को लेकर वर्ष 2017 में कॉलेज प्रबंधन ने विभावि के वाइस चांसलर को पत्र लिखा था. कॉलेज को शिफ्ट करने का आग्रह भी किया गया था. वाइस चांसलर ने इस मामले से सीसीएल कथारा प्रबंधन को अवगत कराया था. बाद में सीसीएल प्रबंधन ने अधिकारियों के साथ बैठक कर कॉलेज शिफ्ट करने को लेकर चर्चा भी की. बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया. जानकारी के अनुसार सीसीएल ने इस पर गंभीरता नहीं दिखायी. इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने जिला के तत्कालीन उपायुक्त को कॉलेज परिसर में गिराये जा रहे ओबी के कारण हो रहे नुकसान व प्रदूषण को लेकर पत्राचार किया था. डीसी ने सीसीएल कथारा प्रबंधन को कड़ा निर्देश दिया था. उस समय वन विभाग की टीम यहां स्थिति देखने आयी थी और सीसीएल प्रबंधन को ओबी के चारों ओर तार की फेसिंग करने और मिट्टी फिलिंग कर पौधरोपण करने का निर्देश दिया था. बाद में सीसीएल ने कुछ काम कर पल्ला झाड़ लिया. उस वक्त सीसीएल जारंगडीह परियोजना के तत्कालीन पीओ केके पंडा का कहना था कि प्रबंधन ने जहां ओबी गिराया गया है, उसके आसपास कंटीले तार की फेसिंग करा दिया है. ओबी से कॉलेज में किसी तरह का नुकसान नहीं हो रहा है. इसके बाद बेरमो के तत्कालीन एसडीओ ने भी निरीक्षण किया था तथा प्रबंधकीय पहल पर संतुष्टि जाहिर की थी.

क्या कहना है प्राचार्य का

केबी कॉलेज के प्राचार्य प्रो लक्ष्मी नारायण का कहना है कि फिलहाल कुछ वर्षों से ओबी गिराना तो बंद है लेकिन खतरा मौजूद है. कॉलेज के पीछे कई विभाग के भवन ओबी के पहाड़ के नीचे बिल्कुल सट गये हैं. कॉलेज शिफ्टिंग की गुजाइंश कम है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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