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BOKARO NEWS : बेरमो में कई जगह दशकों से की जा रही सामूहिक रूप से चित्रगुप्त पूजा

Updated at : 01 Nov 2024 11:38 PM (IST)
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BOKARO NEWS : बेरमो में कई जगह दशकों से की जा रही सामूहिक रूप से चित्रगुप्त पूजा

BOKARO NEWS : बेरमो अनुमंडल में कई जगह सामूहिक रूप से चित्रगुप्त पूजा का आयोजन छह दशक से ज्यादा समय से किया जा रहा है.

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राकेश वर्मा, बेरमो : बेरमो अनुमंडल में कई जगह सामूहिक रूप से चित्रगुप्त पूजा का आयोजन छह दशक से ज्यादा समय से किया जा रहा है. बेरमो व गोमिया प्रखंड में लगभग एक दर्जन स्थानों पर हर साल सामूहिक रूप से प्रतिमा स्थापित कर धूमधाम से पूजा की जाती है. शाम में सामूहिक भोज का भी आयोजन होता है. कई जगह बच्चों व महिलाओं के लिए प्रतियोगिताएं सहित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये जाते हैं. तेनुघाट : पहले तेनुघाट एक व दो नंबर कॉलोनी में अलग-अलग पूजा की जाती थी. 1980 के बाद से दो नंबर कॉलोनी में पूजा बंद हो गयी तथा तेनुघाट एक नंबर कॉलोनी में ही दो जगह पूजा होने लगी. बाद में चित्रगुप्त महापरिवार बेरमो व बोकारो के प्रयास से एक जगह पूजा होने लगी. पहले यहां सिंचाई विभाग के कार्यालय में पूजा होती थी. 2010 से तेनुघाट एफ टाइप चौक दुर्गा मंडप के बगल स्थित चित्रगुप्त मंदिर में विधिवत रूप से पूजा होने लगी. लोग बताते हैं कि तेनुघाट में 1965 से सामूहिक रूप से चित्रगुप्त पूजा किये जाने की शुरुआत हुई. इसमें लाला लाल मोहन लाल, अशोक कुमार सिन्हा, राजेश्वर प्रसाद का अहम योगदान रहा. सुभाषनगर : चित्रगुप्त भवन सुभाषनगर में करगली बेरमो समिति के तत्वाधान में हर साल पूजा की जाती है. यहां 1985 में स्व मदन प्रसाद सिन्हा, अवधेश प्रसाद, पपन, सुनील कुमार आदि ने सीसीएल के सामुदायिक भवन में पूजा की शुरुआत की. बाद में संजय सिन्हा, रतन लाल, जितेंद्र प्रसाद, संजय कुमार सिन्हा, जय प्रकाश सिन्हा, जितेंद्र सिन्हा, शंभू नाथ वर्मा आदि ने सामुदायिक भवन के बगल में निर्मित अलग भवन में 1987 से पूजा शुरू की. गिरिडीह के पूर्व सांसद स्व टेकलाल महतो ने यहां सांसद मद से एक भवन बनवाया. पूर्व मंत्री स्व राजेंद्र प्रसाद सिंह ने भवन व एसी दिया. करगली बाजार : करगली बाजार में वर्ष 2017-18 से करगली बाजार, फुसरो समिति के तत्वाधान में पूजा की जा रही है. पहले इस कमेटी के लोग सुभाषनगर पूजा समिति से जुड़े थे. यहां पूजा शुरू कराने में संजय सिन्हा, लव कुमार अम्बष्ठ, अनिल श्रीवास्तव, डॉ शकुंतला कुमार, नंद किशोर प्रसाद, रमेश सिन्हा आदि का अहम योगदान रहा. ढोरी स्टाफ क्वार्टर : ढोरी स्टाफ क्वार्टर से पहले करगली बाजार में ही सीपीओ के सीसीएलकर्मी विजय सिन्हा अपने आवास में 1967 के आसपास चित्रगुप्त पूजा करते थे. 70 के दशक में ढोरी स्टाफ क्वार्टर में पूजा की जाने लगी. यहां पूजा शुरू कराने में रघू बाबू, चाकू बाबू, ध्रुवदेव प्रसाद, आरके रंजन, केपी सिन्हा, बेरमो इंसपेक्टर लाल साहब, केएम प्रसाद, सुबोध सिन्हा आदि का योगदान रहा. 1988 में यहां चित्रगुप्त मंदिर का निर्माण हुआ. कथारा : कथारा में 80 के दशक से पूजा की जा रही है. पहले मध्य विद्यालय कथारा के निकट पूजा की जाती थी. बाद में कथारा स्टाफ रिक्रियेशन क्लब में पूजा की जाने लगी. यहां पूजा शुरू कराने में यूपी सहाय, एसएस दत्ता, ओबी नारायण, शशि भूषण प्रसाद, केपी वर्मा संत, विनय सिन्हा, संजीत सहाय, मदन सिन्हा, रंजीत लाल, शंकर लाल, उपेंद्र प्रसाद आदि की भूमिका रही संडे बाजार : संडे बाजार बड़ा क्वार्टर स्थित दुर्गा मंडप प्रांगण में वर्ष 1969 से पूजा की शुरुआत की गयी. यहां पूजा शुरू कराने में राम लखन प्रसाद, ब्रजकिशोर प्रसाद, नरेश प्रसाद सिन्हा, नंद किशोर प्रसाद हरि शंकर प्रसाद, श्यामाकांत झा का योगदान रहा. गोमिया : गोमिया में पूजा 1990 से शुरू हुई थी. स्वांग वाशरी में कार्यरत श्यामसुंदर प्रसाद, बीके श्रीवास्तव, पी कुमार, बीएन प्रसाद, एनके चन्द्रा आदि ने हजारी मोड़ स्थित मनोरंजन केंद्र में पूजा की शुरुआत की थी. वर्ष 2005 से स्वांग ऑफिसर क्लब में पूजा होने लगी और अनूप कुमार सिन्हा, ललन सिन्हा, प्रशांत सिन्हा, अभय सिन्हा आदि के प्रयास से धूमधाम से आयोजन किया जाने लगा. इस दौरान स्वांग एवं आइइएल के लोग मिलजुल कर कर पूजा करने लगे और पूजा 2020 तक की गयी. इसके बाद स्वांग कोलियरी से कई चित्रांश परिवार के लोग सेवानिवृत्त हो गये और अपने गांव चले गये. चंद्रपुरा : चंद्रपुरा में वर्ष 1965 से पूजा का आयोजन किया जा रहा है. वर्तमान में हिंदी साहित्य परिषद में डीवीसी का विद्यालय चलता था, वहां वर्ष 1965 में पहली बार सामूहिक रूप से पूजा की गयी. आयोजन में इंजीनियर विजय सिन्हा के अलावा जमुना प्रसाद, आरपी सिन्हा, डॉ मुनेश्वर प्रसाद सिन्हा, एएम सहाय, शत्रुजीत सहाय आदि का योगदान था. दस साल बाद वेलफेयर सेंटर बनने पर वहां पूजा की जाने लगी. बोकारो थर्मल : बोकारो थर्मल में सामूहिक रूप से पूजा का आयोजन वर्ष 1953 से डीवीसी सिविल के अभियंता पांडेय, कुंज बिहारी प्रसाद, बीपी कर्ण द्वारा शुरू किया गया था. वर्ष 1975 में बेसिक स्कूल में मूर्ति स्थापित कर पूजा की जाने लगी. 1981 में बेसिक स्कूल के बगल में स्थित त्रयोदश मंदिर में स्थायी प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाने लगी. प्रतिमा स्थापित करने में मुख्य अभियंता केबी सिन्हा, कुंदन प्रसाद, जीएन सिन्हा (सुरक्षा अधिकारी), उपेंद्र प्रसाद वर्मा, सुधांशु कुमार वर्मा, अरुण कुमार वर्मा, एमपी कर्ण, कपलेश्वर नारायण, कामेश्वर प्रसाद, एसएस सिन्हा, रंजीत प्रसाद सिन्हा, केसीएल कर्ण, विश्वनाथ लाल श्रीवास्तव, बिपिन बिहारी कर्ण, पीपी श्रीवास्तव, आनंद प्रकाश मेहता, अजय सिन्हा, अजीत सिन्हा का अहम योगदान रहा था.

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