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कथारा एरिया को पटरी पर लाना नये जीएम के लिए चुनौती

जारंगडीह व स्वांग-गोविंदपुर माइंस का विस्तारीकरण व कथारा कोलियरी के 2 नंबर माइंस की डी वाटरिंग की बढ़ानी होगी गति

राकेश वर्मा, बेरमो.

सीसीएल कथारा एरिया को उत्पादन-उत्पादकता के मामले में पटरी पर लाना नये महाप्रबंधक संजय कुमार के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य होगा. खासकर कई माइंसों का विस्तारीकरण जरूरी है. प्रक्षेत्र अंतर्गत जारंगडीह माइंस का विस्तारीकरण को लेकर पिछले दो-तीन साल से प्रबंधकीय कवायद चल रही है, लेकिन इसमें अभी कोई ठोस प्रगति नहीं दिखती. जारंगडीह परियोजना विस्तार के लिए जारंगडीह टाटा ब्लॉक को शिफ्ट किया जाना है. यहां से कुल 67 लोगों को शिफ्ट करना है. प्रत्येक व्यक्ति शिफ्टिंग के एवज में सीसीएल बोर्ड ने 40 हजार रुपये का एप्रूवल प्रदान किया है. पिछले दो साल से यह राशि एरिया आकर पड़ी हुई है, लेकिन अभी तक किसी का भुगतान नहीं हुआ है. यहां के लोगों को जारंगडीह पुराना माइंस (बंद यूजी माइंस) के निकट शिफ्ट किया जाना है. यहां शिफ्टिंग के लिए डोजरिंग का काम हो चुका है. सिर्फ बिजली-पानी की सुविधा मुहैया कराना बाकी है. इसके अलावा जारंगडीह स्थित बेरमो का चर्चित ढोरी माता तीर्थालय को भी जारंगडीह 16 नंबर के निकट शिफ्ट करना है. इसके लिए करीब 25 करोड़ रुपये का टेंडर हो चुका है. गत 23 जून को एरिया के नये महाप्रबंधक संजय कुमार ने तमाम एसीसी सदस्यों के साथ जारंगडीह परियोजना के विस्तारीकरण को लेकर अहम बैठक भी की थी. इस बैठक में जीएम ने एसीसी सदस्यों को आश्वस्त किया था कि यहां डिपार्टमेंटल कार्य बंद नहीं होगा. इसके लिए आरआर शॉप की विस्तारीकरण का काम शुरू कर दिया गया है. साथ ही टाटा ब्लॉक कॉलोनी के लोगों के पुनर्वास के लिए बंद यूजी माइंस की ओर जगह एलॉट कर भूमि समतल कार्य जारी है. इसके अलावा ढोरी माता तीर्थालय शिफ्टिंग के लिए टेंडर हो चुका है. महाप्रबंधक श्री कुमार ने इस बैठक में यह भी कहा था कि चालू वित्तीय वर्ष के निर्धारित उत्पादन लक्ष्य को पूरा करना एक बड़ी चुनौती है. सभी को इस चुनौती को स्वीकार करते हुए लक्ष्य को पूरा करना है.

मजबूत टास्क है स्वांग-गोविंदपुर माइंस विस्तारीकरण :

प्रक्षेत्र अंतर्गत स्वांग-गोविंदपुर परियोजना में भी मोंटिको नाला का डायवर्सन किया जा चुका है. इसके बाद माइंस का बाउंड्री का एडजस्टमेंट होगा तथा माइंस विस्तारीकरण के लिए नया कांट्रेक्ट होगा. फिलहाल परियोजना के जिस स्थान से कोयला उत्पादन किया जा रहा है, वहां आगामी 2026-27 तक का कोल रिजर्व है. फिलहाल यह माइंस सालाना 1.5 लाख टन का पीआर है, जिसे बढ़ा कर सालाना 2.5 लाख टन तक किया जाना है. सीसीएल बोर्ड से इसका पीआर एप्रूव हो गया है. अब आगे इन्वायरमेंटल क्लीयरेंस के लिए प्रोसेस करना है. प्रबंधन के अनुसार इसमें कहीं किसी तरह की बाधा नहीं है. सारी जमीन परियोजना की अधिग्रहित जमीन है. इसके अलावा एक स्वांग-पिपराडीह रेलवे साइडिंग को चालू किया जाना है. इसके लिए सीटीइ मिल गया है. अब रेलवे से लाइजिंग कर रेललाइन के काम को आगे बढ़ाना है. वहीं एक अन्य पिपराडीह-स्वांग माइंस को लॉन्ग टर्म आउटसोर्स में चलाने के लिए कार्य प्रगति पर है. 12 साल के लिए आउटसोर्स में चलने वाले इस माइंस से सालाना दो मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य है. इधर, कथारा एरिया के कई माइंसों का इसी कैपीसिटी को भी गत वर्ष बढ़ाया गया है, जिसमें जारंगडीह परियोजना में पहले 8.80 लाख टन उत्पादन का सालाना इसी (इनवायरमेंट क्लीयरेंस) था, जिसे बढ़ा कर 15 लाख टन तक किया गया है. स्वांग-गोविंदपुर परियोजना का इसी भी 12.5 लाख टन से बढ़ाकर 15 लाख टन किया गया है.

सीसीएल के डीटी ने किया था माइंस का निरीक्षण :

सीसीएल के डायरेक्टर टेक्निकल हरीश दुहान ने गत दिनों क्षेत्र के अधिकारियों के साथ कथारा कोलियरी के माइंस का निरीक्षण किया था. श्री दुहान ने निरीक्षण के दौरान दो नंबर क्वायरी में भरे पानी से काफी चिंतित हुए एवं कहा कि गर्मी में भी माइंस का पानी सूखा नहीं पाये तो अब बरसात आ जाने पर आप क्या करेंगे. उन्होंने पीओ को तत्काल पानी निकासी का निर्देश दिया. इसके बाद तीन नंबर क्वायरी आउटसोर्सिंग आर ए माइनिंग पैच गये. यहां भी पानी भर जाने से पिछले डेढ़ दो माह से कोयला उत्पादन ठप है. उन्होंने मोटर पंप क्षमता को बढ़ाने का निर्देश दिया. इसलिए कथारा कोलियरी के उत्पादन गति को बढ़ाने के लिए पानी से भरे खदानों का डी-वाटरिंग तेज गति से करना जरूरी है.

गत वित्तीय वर्ष में एरिया ने किया था 28.61 लाख टन कोल प्रोडक्शन :

वित्तीय वर्ष 2022-23 में कथारा एरिया ने कुल 28.61 लाख टन कोयले का उत्पादन किया था. जबकि लक्ष्य 27 लाख टन का था. इसके अलावा 30.04 लाख टन कोल डिस्पैच (ऑफटेक) तथा 71.87 लाख घन मीटर टन ओबी का निस्तारण किया था. प्रक्षेत्र अंतर्गत कथारा ओसीपी ने 4.2 लाख टन, जारंगडीह परियोजना ने 14.81 लाख टन तथा स्वांग-गोविंदपुर परियोजना ने 9.6 लाख टन उत्पादन किया था. गत वित्तीय वर्ष में एरिया ने कोयला उत्पादन में 106 फीसदी, ऑफटेक में 111.3 फीसदी तथा ओबी निस्तारण में 112.3 फीसदी का ग्रोथ किया था. चालू वित्तीय वर्ष में एरिया का कोयला उत्पादन लक्ष्य 42.20 लाख टन निर्धारित है. इसमें प्रथम तिमाही (अप्रैल से जून तक) एरिया ने 5.06 लाख टन उत्पादन किया है.

2015-16 में हुआ था रिकार्ड कोयला उत्पादन :

पिछले डेढ़ दशक के अंतराल में कथारा एरिया ने वित्तीय वर्ष 2015-16 में रिकार्ड 36,62,357 लाख कोयला उत्पादन किया था. वित्तीय वर्ष 2016-17 के बाद से एरिया ने कभी भी 30 लाख टन से ज्यादा उत्पादन नहीं किया. दो वर्ष पूर्व एरिया 250 करोड़ से ज्यादा के घाटे में चल रही थी, लेकिन गत वित्तीय वर्ष में बेहतर उत्पादन कर एरिया ने अपने घाटे में लगभग 100 करोड़ की कमी की थी. गत वित्तीय वर्ष में कथारा प्रक्षेत्र अंतर्गत कथारा वाशरी में पड़े 2.48 लाख टन रिजेक्ट कोल की बिक्री कर एरिया ने 140 करोड़ से ज्यादा का मुनाफा अर्जित किया था. साथ ही एरिया ने हजारों टन स्क्रैप का डिस्पोजल कर चार करोड़ का राजस्व अर्जित किया था. गत वर्ष एरिया ने अपने पूर्व से चले आ रहे घाटे में कुल 21 फीसदी की कमी की थी.

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