Bokaro News: हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ विस्थापितों का प्रदर्शन, विस्थापित गांवों को पंचायत का दर्जा देने की कर रहे हैं मांग
Published by : Guru Swarup Mishra Updated At : 28 Jul 2024 9:03 PM
विरोध प्रदर्शन करते विस्थापित
Bokaro News: बोकारो में 20 गांवों के विस्थापितों ने रविवार को चेतावनी सभा कर आक्रोश जताया. भाजपा नेता डॉ प्रकाश सिंह के नेतृत्व में लोगों ने अर्धनग्न प्रदर्शन कर कहा कि आज भी विस्थापित संवैधानिक अधिकारों से वंचित हैं.
Bokaro News: बोकारो: कमर में काली धोती…सिर पर काली पट्टी और हाथ में काला बैलून के साथ 20 गांवों के विस्थापितों ने रविवार को अर्धनग्न प्रदर्शन किया. भाजपा नेता डॉ प्रकाश सिंह के नेतृत्व में विस्थापित गांवों को पंचायत का दर्जा देने की मांग को लेकर सेक्टर-09 हटिया मोड़ पर जुटे दर्जनों विस्थापितों ने चेतावनी सभा की और प्रतीकात्मक तरीके से ग्रामीणों ने अपने दर्द को बयां किया. इन्होंने कहा कि सीएम हेमंत सोरेन ने उन्हें इस संदर्भ में आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया.
झारखंड सरकार के खिलाफ जता रहे थे आक्रोश
बोकारो में विस्थापित गांव के प्रतिनिधि हाथों में संविधान की प्रति लेकर‘ हमें संवैधानिक आजादी झारखंड सरकार को देनी होगी,’ ‘विस्थापित गांव को पंचायत का दर्जा देना होगा,’ ‘अधिकार नहीं तो वोट नहीं…जैसे नारे लगाकर झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ आक्रोश जता रहे थे. मौके पर आदिवासी भाजपा जिला अध्यक्ष रामलाल सोरन, नजमुल होदा, गोपी दडे, रामपद सिंह, मुकेश महतो, फिरोज अंसारी, छोटू टूरी सहित दर्जनों विस्थापित उपस्थित थे.
हेमंत सोरेन ने दिया था आश्वासन
भाजपा नेता डॉ प्रकाश सिंह ने कहा कि सीएम हेमंत सोरेन ने विस्थापित गांव को पंचायत का दर्जा देने की बात कही थी. सरकार के पांच साल विस्थापितों के लिए ‘काला कार्यकाल’ रहा. आज भी विस्थापित संवैधानिक अधिकारों से वंचित हैं. झारखंड सरकार विस्थापित गांवों को पंचायत का दर्जा दे. पिछले विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन ने विस्थापित गांव को पंचायत का दर्जा देने की बात कही थी, जो पांच साल पूरा होने के बाद भी पूरे होने के आसार नहीं लग रहे हैं. इससे विस्थापितों में जबर्दस्त आक्रोश है. इसलिए विस्थापित आज अर्धनग्न प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतरे हैं.
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लेखक के बारे में
By Guru Swarup Mishra
मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.
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