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Bokaro News : छठ को यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची में शामिल करने की कवायद तेज

Updated at : 20 Sep 2025 11:29 PM (IST)
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Bokaro News : छठ को यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची में शामिल करने की कवायद तेज

Bokaro News : भारत सरकार की विशेषज्ञ समिति में लोक गायिका चंदन तिवारी शामिल, भोजपुरी गीतों में अश्लीलता के विरोध में कर रही हैं काम.

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सुनील तिवारी, बोकारो, भारत सरकार ‘छठ महापर्व’ को यूनेस्को की मानवता की अमूर्त विरासत की सूची में शामिल करने का प्रयास कर रही है. इस पहल के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है, जिसमें चास-बोकारो की प्रसिद्ध लोक गायिका चंदन तिवारी को भी शामिल किया गया है. कुंवर सिंह कॉलोनी-चास की रहने वाली चंदन तिवारी लोकप्रिय गायिका स्वर्गीय रेखा तिवारी की पुत्री हैं. पिता ललन तिवारी एचएससीएल से रिटायर है. भोजपुरी गीत में अश्लीलता के विरोध में चंदन तिवारी के काम को सराहा गया है.

…ताकि जब यह प्रस्ताव यूनेस्को के पास जाये, तो उसे तुरंत स्वीकृति मिल जाये

चंदन तिवारी ने शनिवार को प्रभात खबर से बातचीत में बताया : यह उनके जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. इस महापर्व को यूनेस्को की सूची में शामिल करवाने के लिए न केवल भारत, बल्कि दुनिया के उन सभी देशों से भी प्रयास शुरू हो गये हैं, जहां पूर्वांचल के लोग बसे हुए हैं. समिति की ओर से छठ से जुड़े सभी सामाजिक व सांस्कृतिक पहलुओं को एक जगह इकट्ठा कर उनका दस्तावेजीकरण किया जा रहा है, ताकि जब यह प्रस्ताव यूनेस्को के पास जाये, तो उसे तुरंत स्वीकृति मिल जाय. भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और संगीत नाटक अकादमी की यह पहल बहुत ही ठोस और तर्कों पर आधारित है.

दो सालों से लोक राग गीतमाला नाम की पुस्तिका भी निकाल रही हैं चंदन

चंदन तिवारी पिछले कई सालों से छठ पर गीत गा रही हैं. पिछले दो सालों से लोकराग गीतमाला नाम की पुस्तिका भी निकाल रही हैं, जिसमें छठ से जुड़े आलेख शामिल होते हैं. पिता ललन तिवारी ने कहा : बेटी की उपलब्धि पर गर्व है. अपनी मां रेखा तिवारी के गीत-सगीत की परंपरा को आगे बढ़ा रही है.

जाति, अमीरी व गरीबी के बंधनों को तोड़ समानता का संदेश देता है छठ : चंदन

छठ को यूनेस्को में क्यों शामिल किया जाय…के सवाल पर चंदन तिवारी ने कहा : अधिकतर कठिन व्रत स्त्रियां करती हैं, वहीं छठ करने वाले पुरुषों की संख्या बढ़ रही है. यह पर्व व्यक्तिवाद को तोड़कर समाज में एकजुटता व भाईचारे को बढ़ावा देता है, जहां सभी एक ही घाट पर पूजा करते हैं. इसमें न तो पुरोहित की आवश्यकता होती है और न ही बाजार की.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ANAND KUMAR UPADHYAY

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By ANAND KUMAR UPADHYAY

ANAND KUMAR UPADHYAY is a contributor at Prabhat Khabar.

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