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Bokaro News : राजस्व वसूली में बोकारो शीर्ष पांच में, पर ट्रांसपोर्ट नगर नहीं

Bokaro News : चास-बोकारो में औसतन 4000 से अधिक मालवाहकों का प्रतिदिन होता है ठहराव, 35 वर्ष बाद भी ट्रांसपोर्ट नगर का प्रस्ताव अधर में.

सीपी सिंह, बोकारो, बोकारो जिला ट्रांसपोर्टिंग के लिहाज से बहुत आगे है. कोल इंडिया, सेल, डीवीसी, ओएजनीसी, इंडियन ऑयल जैसे पीएसयू के अलावा इलेक्ट्रोस्टील (वेदांता) जैसे संस्थान हैं. इसके अलावा खाद सामग्री व निजी सामग्री की उपलब्धता के लिए भी ट्रांसपोर्ट सेक्टर का वृहत पैमाने पर इस्तेमाल होता है. हर दिन औसतन 3500-4000 से अधिक मालवाहक का ठहराव चास-बोकारो में होता है. लेकिन, जिले में एक भी ट्रांसपोर्ट नगर नहीं है. लेकिन, 35 वर्ष बाद भी बोकारो में ट्रांसपोर्ट नगर का प्रस्ताव अधर में है.

बोकारो रेवेन्यू क्लेक्शन में राज्य के टॉप पांच जिला में शुमार है. बोकारो जिला बनने के बाद से परिवहन विभाग ने 5,84,800,18, 485 का रेवेन्यू जेनरेट हुआ है. वहीं जिला से 57,1372 वाहनों का रजिस्ट्रेशन जिला कार्यालय से हुआ है, जो राज्य में टॉप फाइव में शामिल है.

जगह चिन्हित कर भूल गया प्रशासन

चास में ट्रांसपोर्ट नगर बनाने के लिए कई बार जगह चिन्हित की गयी है. 2017-18 में जेल मोड़ के पास जगह चिन्हित की गयी थी. इसके लिए वन विभाग व जिला पदाधिकारी से वार्ता भी हुई थी. लेकिन, कोई फैसला नहीं हो सका. चास के कांड्रा में भी जगह चिन्हि्त की गयी थी. लेकिन, वहां स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया था. इसके अलावा भी कई बार इस दिशा में प्रयास किया गया. पूर्व में कई उपायुक्त की ओर से इस दिशा में पहल की गयी. लेकिन, यह धरातल पर उतर नहीं पाया.

जाम व चोरी का अंदेशा

शहर में लंबे समय से ट्रांसपोर्ट नगर की मांग की जा रही है. चास नगर निगम क्षेत्र के गुरुद्वारा रोड, धर्मशाला मोड़ से आइटीआइ मोड़ तक, एनएच 32, तलगड़िया रोड, एनएच 23 पर माल वाहकों का जमावड़ा लगा रहता है. इसी तरह हर व्यवसायिक क्षेत्र मसलन, बालीडीह, जैनामोड़ व अन्य जगहों पर सड़क किनारे ही वाहन खड़े रहते हैं. चास नगर निगम क्षेत्र से 2021 में दो भारी मालवाहक वाहन की चोरी हुई.

दर्जनों बार विभिन्न संगठन ने किया है प्रयास

ट्रांसपोर्ट नगर बनाने को लेकर जिला के विभिन्न व्यवसायिक संगठनों ने दर्जनों बार प्रयास किया. बोकारो चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने ट्रांसपोर्ट नगर बनाने के लिए 50 बार कोशिश की है. डीसी से लेकर मुख्यमंत्री, डीटीओ से लेकर सचिव स्तर तक बात की गयी. चेंबर के संजय वैध ने बताया कि हर स्तर पर मांग के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई. जबकि, हर कोई ट्रांसपोर्ट नगर का महत्व जानता है.

ट्रांसपोर्ट नगर बनने से होंगे कई फायदे

ट्रांसपोर्ट नगर बनने से वाहन चालक व व्यापारियों को एक ही जगह ईंधन, मरम्मत, भोजन व आराम जैसी सभी सुविधा मिलती है. इससे समय बचता है. शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुचारू होती है. यह ई-कॉमर्स व कोल्ड स्टोरेज जैसी इंडस्ट्रीज़ को बढ़ावा देता है, जिससे लॉजिस्टिक्स बेहतर होते हैं. ट्रांसपोर्ट नगर के आसपास कई सहायक व्यवसाय (जैसे ढाबा, वर्कशॉप) के खुलने से रोजगार के नये अवसर खुलेंगे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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