बोकारो कंकाल कांड: DNA जांच पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, माता-पिता का सैंपल लेने की समय सीमा बढ़ी

Published by :Sameer Oraon
Published at :26 Apr 2026 6:22 PM (IST)
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Bokaro Missing Girl Case

सुप्रीम कोर्ट

Bokaro Missing Girl Case: बोकारो की 18 वर्षीय लापता युवती और बरामद कंकाल की गुत्थी सुलझाने के लिए चल रही कानूनी प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा बदलाव किया है. सैंपल कलेक्शन के लिए हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित 48 घंटे की समय सीमा को बढ़ाकर अब एक सप्ताह कर दिया गया है. झारखंड हाईकोर्ट की कड़ी निगरानी में चल रही इस जांच में अब कोलकाता स्थित केंद्रीय लैब (CFSL) में डीएनए मिलान कराया जाएगा.

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Bokaro Missing Girl Case, बोकारो (सतीश सिंह): बोकारो की लापता युवती के बरामद कंकाल की शिनाख्त के लिए चल रही डीएनए जांच प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा बदलाव किया है. शीर्ष अदालत ने झारखंड हाईकोर्ट द्वारा युवती के माता-पिता का सैंपल लेने के लिए निर्धारित 48 घंटे की समय सीमा को बढ़ाकर अब एक सप्ताह कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने यह बदलाव इसलिए किया है ताकि जांच प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक, त्रुटिहीन और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो सके. गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 48 घंटे की अवधि को व्यावहारिक रूप से कम बताते हुए विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की थी.

हाईकोर्ट की मॉनिटरिंग में ‘दूध का दूध और पानी का पानी’

इस हाई-प्रोफाइल मामले की निगरानी झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ कर रही है. अदालत के सख्त रुख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछली सुनवाई में डीजीपी, बोकारो एसपी और एफएसएल डायरेक्टर को व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ा था. हाईकोर्ट ने बरामद कंकाल का डीएनए टेस्ट केंद्र सरकार के कोलकाता स्थित सीएफएसएल (CFSL) लैब में कराने का निर्देश दिया है. साथ ही, राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है.

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31 जुलाई से लापता है बेटी, कंकाल पर मचा है बवाल

पूरा मामला बोकारो के पिंडराजोड़ा थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां एक 18 वर्षीय युवती 31 जुलाई 2025 से लापता है. युवती की मां रेखा देवी ने अपनी बेटी की तलाश के लिए हाईकोर्ट में हेवियस कॉपस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दायर की है. पुलिस को जांच के दौरान एक कंकाल मिला है, जिसे वह लापता युवती का बता रही है. दूसरी ओर, परिजनों के अधिवक्ता विनसेंट रोहित मार्की और शांतनु गुप्ता का कोर्ट में दावा है कि बरामद कंकाल उनकी बेटी का नहीं है. इसी विवाद को सुलझाने के लिए डीएनए टेस्ट की मदद ली जा रही है.

अधिकारियों की बढ़ी मुश्किलें, अगली सुनवाई में भी हाजिरी अनिवार्य

हाईकोर्ट ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है. अगली सुनवाई की तिथि पर भी डीजीपी, बोकारो एसपी और नई एसआईटी टीम को सभी संबंधित दस्तावेजों के साथ हाजिर रहने का निर्देश दिया गया है. अदालत का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो और युवती की वास्तविक स्थिति का पता चल सके. आर्मी हॉस्पिटल नामकुम को भी सैंपल कलेक्शन में सहयोग करने का निर्देश दिया गया है.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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