कोलकाता से साइकिल चलाकर बोकारो पहुंचा युवक, पुलिस ने भेजा क्वारेंटाइन सेंटर

कसमार प्रखंड के बगियारी गांव निवासी एक युवक जो एक पैर से दिव्यांग है, उसने कोलकाता से 500 किलोमीटर की दूरी साइकिल से तय करते हुए 21 अप्रैल की दोपहर कसमार पहुंच गया. पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उसकी स्क्रीनिंग करने के बाद उसे क्वारेंटाइन में भेज दिया है. युवक ने बताया कि वह हावड़ा से 60 किलोमीटर दूर बादुरिया में एक प्लाइवुड फैक्ट्री में काम करता था.
बोकारो : कसमार प्रखंड के बगियारी गांव निवासी एक युवक जो एक पैर से दिव्यांग है, उसने कोलकाता से 500 किलोमीटर की दूरी साइकिल से तय करते हुए 21 अप्रैल की दोपहर कसमार पहुंच गया. पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उसकी स्क्रीनिंग करने के बाद उसे क्वारेंटाइन में भेज दिया है. युवक ने बताया कि वह हावड़ा से 60 किलोमीटर दूर बादुरिया में एक प्लाइवुड फैक्ट्री में काम करता था.
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हमारे संवाददाता दीपक सवाल को उसने बताया कि कंपनी के मालिक ने प्रत्येक सप्ताह 500 रुपये खर्च देने की बात कही थी, लेकिन एक सप्ताह के बाद जब पैसा देना बंद कर दिया तब भूख से मरने की स्थिति आ गयी. दोस्तों से उधार लेकर कुछ दिन खर्च चलाया, लेकिन बाद में उसने फैसला किया कि किसी तरह कसमार स्थित अपने घर लौट जायेगा.
उसने एक दोस्त से 1500 रुपये उधार लिये और 1200 रुपये में एक पुरानी साइकिल खरीदी और उस साइकिल से कोलकाता, आसनसोल, दुर्गापुर, धनबाद के रास्ते बोकारो पहुंच गया. लगभग 500 किलोमीटर की दूरी तय कर वह 21 अप्रैल को कसमार पहुंचा. रास्ते में कई मुश्किलों का सामना भी किया.
बंगाल-झारखंड बॉर्डर और बराकर पुल पहुंचा तो पुलिस को देखकर सड़क छोड़ नदी में साइकिल लेकर कूद गया और छाती भर पानी में साइकिल उठाकर पार हुआ. कसमार स्थित बगियारी पहुंचने के बाद स्थानीय पुलिस जब उसके घर पहुंची और उसे लेकर कसमार स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची. जहां चिकित्सा प्रभारी डॉ नवाब ने उनका चिकित्सीय जांच की. जांच में सर्दी खांसी बुखार जैसे कोई लक्षण नहीं दिखे. फिर युवक को टांगटोना पंचायत के क्वारेंटाइन सेंटर में रखा गया है.
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By AmleshNandan Sinha
अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.
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