फ्लैश बैक : बेरमो से पांच बार जीते थे बिंदेश्वरी दुबे
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Oct 2019 3:14 AM
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रांची : अविभाजित बिहार में मुख्यमंत्री (12 मार्च, 1985-13 फरवरी, 1988) रहे बिंदेश्वरी दुबे ने बेरमो सीट से पांच बार चुनाव जीता था. श्री दुबे ने (1952-57, 1962-67, 1967-69, 1969-72 और 1972-77) में बेरमो का प्रतिनिधित्व किया था. इसके बाद 1985 का चुनाव शाहपुर सीट से जीता था. तीन साल के मुख्यमंत्री के अपने पहले […]
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रांची : अविभाजित बिहार में मुख्यमंत्री (12 मार्च, 1985-13 फरवरी, 1988) रहे बिंदेश्वरी दुबे ने बेरमो सीट से पांच बार चुनाव जीता था. श्री दुबे ने (1952-57, 1962-67, 1967-69, 1969-72 और 1972-77) में बेरमो का प्रतिनिधित्व किया था. इसके बाद 1985 का चुनाव शाहपुर सीट से जीता था. तीन साल के मुख्यमंत्री के अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने बिहार के विकास के लिए उल्लेखनीय काम किये थे.
1940-50 के दशक में दक्षिण बिहार (वर्तमान झारखंड) में राजा कामाख्या नारायण सिंह का दबदबा था. 1951 में हुए पहले बिहार विधानसभा चुनाव में राजा कामाख्या नारायण सिंह खुद छह सीटों से चुनाव लड़े और चार पर जीते थे. इन सीटों में से एक पेटरवार सीट भी थी.
वहां से उन्होंने कांग्रेस के काशीश्वर प्रसाद चौबे को हराया था. लेकिन, चार सीटों से विधायक निर्वाचित होने के कारण उनको तीन सीटों से इस्तीफा देना पड़ा. छोड़ी हुई तीन सीटों में एक पेटरवार भी थी. इसी बीच पेटरवार सीट का नाम बदल कर जरीडीह-पेटरवार रख दिया गया. 1952 में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने युवा बिंदेश्वरी दुबे को इस सीट से टिकट दिया. श्री दुबे चुनाव जीत गये. 1957 के चुनाव के पहले हुए परिसीमन में जरीडीह पेटरवार सीट का नाम बदल कर बेरमो हो गया. यह चुनाव श्री दुबे बहुत मामूली अंतर से राजा कामाख्या नारायण सिंह के संबंधी ठाकुर ब्रजेश्वर प्रसाद सिंह से हार गये.
लेकिन, उसके बाद उन्होंने वापसी की. उन्होंने बेरमो से ही 1962 के चुनाव में ठाकुर ब्रजेश्वर प्रसाद सिंह को हराया. 1967 में एनपी सिंह को, 1969 में जमुना सिंह व 1972 में रामदास सिंह को हराया. कांग्रेस विरोधी लहर में 1977 का चुनाव वह मिथिलेश सिन्हा से हार गये. इसके साथ ही उन्होंने बेरमो सीट भी हमेशा के लिए छोड़ दी. 1984 में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनने के बाद 1985 का चुनाव अपने गृह क्षेत्र शाहपुर से लड़ा और शिवानंद तिवारी को हरा कर भारी अंतर से जीता.
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