2021 तक जीरो डिस्चार्ज प्लांट बनेगा बीएसएल
Updated at : 26 Aug 2019 6:56 AM (IST)
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सुनील तिवारी, बोकारो : बोकारो स्टील प्लांट जल खपत में वैश्विक बेंचमार्क प्राप्त करने में सफल हुआ है. जल प्रबंधन के समग्र प्रयासों से जल संरक्षण की दिशा में नया आयाम कायम किया है. जल खपत को कम करने के साथ ही जल संरक्षण, रिसाइकल, पुन: उपयोग को बढ़ावा दिया है. बीएसएल का स्पेसिफिक वॉटर […]
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सुनील तिवारी, बोकारो : बोकारो स्टील प्लांट जल खपत में वैश्विक बेंचमार्क प्राप्त करने में सफल हुआ है. जल प्रबंधन के समग्र प्रयासों से जल संरक्षण की दिशा में नया आयाम कायम किया है. जल खपत को कम करने के साथ ही जल संरक्षण, रिसाइकल, पुन: उपयोग को बढ़ावा दिया है.
बीएसएल का स्पेसिफिक वॉटर कनजम्पशन 4.0 से अधिक प्रति टन क्रूड स्टील के स्तर से घटकर 3.47 प्रति टन क्रूड स्टील पर पहुंचना जल संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है. इधर, रेन हार्वेस्टिंग योजना पर भी काम चल रहा है. बीएसएल ने पानी के लीकेज, वाष्पीकरण व पानी की बर्बादी को रोकने के समुचित प्रयासों को अमलीजामा पहनाने में अग्रणी रहा है.
आज बोकारो स्टील प्लांट जीरो डिस्चार्ज को प्राप्त करने के लिए तेजी से अग्रसर है. बीएसएल का वर्ष 2021 तक जीरो डिस्चार्ज बनने का लक्ष्य है. इसके तहत प्लांट के अंदर व बाहर कई तरह की योजनाओं पर काम किया जा रहा है. यहां उल्लेखनीय है कि सेल अध्यक्ष अनिल कुमार चौधरी ने अगस्त महीने में कंपनी में जल संरक्षण माह की शुरुआत की थी.
जल शुद्धीकरण व रिसाइकिलिंग परियोजना पर काम : बोकारो स्टील प्लांट में इस्तेमाल के बाद पानी को पुन: रिसाइकिलिंग कर इस्तेमाल में लाने के लिए आउट फॉल 2 बी में 200 घन मीटर प्रति घंटा व ऑउट फॉल 1 बी से 1500 घन मीटर प्रति घंटा पानी के शुद्धीकरण व रिसाइकिलिंग की सुविधा है.
ऑउट फॉल 2 ए में भी यह कार्य प्रगति पर है. ऑउट फॉल 1 ए में भी जल्द ही यह सुविधा लायी जायेगी. परियोजना पूरा होने पर बीएसएल पूर्ण रूप से जीरो डिस्चार्ज प्लांट बन जायेगा. इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है.
नगर जलापूर्ति में जल्द लगेगी जीरो डिस्चार्ज प्रणाली
बीएसएल के नगर जलापूर्ति विभाग पानी की बचत व री-साइकिलिंग के लिए जल्द ही नयी परियोजना पर काम शुरू करेगी. फिलहाल, नगर जलापूर्ति में पानी का शुद्धीकरण कर नगर में सप्लाई की जाती है, जिसके लिए यहां वाटर ट्रीटमेन्ट प्लांट की सुविधा है.
पानी के शुद्धिकरण की प्रक्रिया में नियमत: 10 प्रतिशत तक गंदे पानी के वेस्टेज का प्रावधान है. आमतौर पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में जल की शुद्धीकरण के क्रम में इससे भी कम ही पानी वेस्ट वाटर के तौर पर उपयोग में नहीं लायी जाती थी.
भारत सरकार ने जल संरक्षण की पहल को स्वच्छता अभियान की ही तरह एक अभियान के रूप में लिया है. जलसंकट की मौजूदा गंभीर स्थिति को देखते हुए व्यापक जल अभियान, संरक्षण, रि-साइकिलिंग समेत कुशल जल प्रबंधन व सबसे महत्वपूर्ण जल उपयोग के प्रति हमारे रोजमर्रा के व्यवहार में एक बड़ा बदलाव लाने की जरूरत है. इस दिशा में सेल-बीएसएल ने कदम बढ़ा दिया है. निश्चित रूप से इसमें सफलता मिलेगी.
पवन कुमार सिंह, सीइओ-बोकारो स्टील प्लांट
1.5 मिलियन गैलन पानी की खपत में कमी आयेगी
वेस्ट वाटर की बर्बादी को पूरी तरह से रोकने के लिये बीएसएल पानी की बचत व री-साइकिलिंग की नयी परियोजना को ला रहा है. इस परियोजना के आ जाने से अब शुद्धिकरण के बाद बचे गंदे पानी को 100 प्रतिशत री-साइकिल कर पुन: साफ किया जायेगा.
पानी को पीने योग्य बना कर नगर में सप्लाई की जायेगी. इस प्रकार जहां एक ओर पानी की बर्बादी कम होगी, वहीं वेस्ट वाटर के पुन: इस्तेमाल से प्रतिदिन लगभग 1.5 मिलियन गैलन पानी की खपत में कमी आयेगी.
टाउनशिप व आसपास सवा लाख पौधरोपण
नगर जलापूर्ति में अत्याधुनिक लैब की सुविधा भी है, जहां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पानी के गुणवत्ता की जांच होती है और इसके बाद ही नगर में उपयोग के लिए सप्लाई की जाती है.
इसी क्रम में टाउनशिप व आस-पास के क्षेत्रों में इस साल सवा लाख पौधे लगाये जा रहे हैं. नगर के जलाशयों को भी जल शक्ति अभियान के तहत दुरुस्त किये जाने की योजना है. इसके लिए विभिन्न सेक्टरों व आस-पास के जलाशयों का सर्वे बीएसएल की ओर से किया जा रहा है.
पानी के संरक्षण व नुकसान को रेट्रोफिट
इस्पात उत्पादन में अत्यधिक जल की आवश्यकता होती है. इस कारण पानी की भारी मात्रा का उपयोग इस्पात उद्योग में किया जाता है. बोकारो स्टील प्लांट के विभिन्न विभागों में उपयोग होने वाले अपशिष्ट जल को रिसाइकल कर पुन: उपयोग में लिया जा रहा है.
बीएसएल की आधुनिक परियोजनाओं के स्थापना काल से ही वैज्ञानिक जल प्रबंधन के उपाय किये गये हैं. आधुनिकीकरण करते समय नयी प्रौद्योगिकी को पानी के संरक्षण व नुकसान को रेट्रोफिट किया जा रहा है.
वॉटर सर्कुलेशन सिस्टम का नियमित अनुरक्षण
पानी की बर्बादी रोकने व लीकेज और सीपेज को समाप्त करने के लिए वॉटर सर्कुलेशन सिस्टम का नियमित अनुरक्षण किया जा रहा है. इसके तहत पाइप लाइन को बदलने व जैकेटिंग करने जैसे कार्य हाथ में लिये गये हैं. इसके तहत प्लांट के अंदर व बाहर दोनों जगहों पर काम हो रहा हैं.
उधर, जल संरक्षण के प्रति जागरूकता के लिए बीएसएल प्रबंधन की ओर से शहर में जगह-जगह होर्डिंग, बैनर, पोस्टर लगाये गये हैं. सरकारी व निजी स्कूलों के बच्चों के बीच भी कार्यक्रम करने योजना है.
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