तारीख पर तारीख, विभाग पर विभाग, पर नहीं बदली किस्मत
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 Feb 2019 6:59 AM
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टू लेन का काम भी चुनाव से हो सकता है प्रभावित बोकारो : बोकारो जिला के दो अनुमंडल को जोड़ने, कोयला क्षेत्र को स्टील सेक्टर से जोड़ने व उत्पाद को बाजार क्षेत्र से जोड़ने वाली सड़क की किस्मत ऐसी बिखरी है कि जुड़ने का नाम ही नहीं ले रही है. बात हो रही है जैनामोड़-डुमरी […]
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टू लेन का काम भी चुनाव से हो सकता है प्रभावित
बोकारो : बोकारो जिला के दो अनुमंडल को जोड़ने, कोयला क्षेत्र को स्टील सेक्टर से जोड़ने व उत्पाद को बाजार क्षेत्र से जोड़ने वाली सड़क की किस्मत ऐसी बिखरी है कि जुड़ने का नाम ही नहीं ले रही है. बात हो रही है जैनामोड़-डुमरी सड़क की. दशकों से 48 किमी लंबी सड़क को फोर लेन बनाने की बात हो रही थी. इसके लिए कभी विभाग का झंझट सामने आया, तो कभी रूट पर मामला अटका. जब दोनों समस्या का समाधान हो गया, तो अब सरकार फंड की कमी का बहाना बनाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल रही है.
सड़क को फोर लेन बनाने की जिम्मेदारी पथ निर्माण विभाग को दी गयी थी. विभाग ने 20 मीटर चौड़ी सड़क निर्माण कार्य के लिए लगभग 400 करोड़ रुपया का अनुमानित खर्च बताया था. सरकार ने इतना पैसा देने से साफ इन्कार कर दिया. जमीन के मामले पर विभाग का दावा था कि जमीन का अधिग्रहण 1956 में ही हो गया है. सर्वे का काम भी पूरा हो गया था, लेकिन सरकार की झोली में पैसे की कमी से सड़क की किस्मत जस की तस हो गयी. अब सड़क को टू लेन सर्किट में ही बनाया जायेगा.
दर्द और भी है… चुनाव बन सकता है रोड़ा : तय हो चुका है कि जैनामोड़-डुमरी सड़क अब टू लेन सर्किट का ही रहेगा. मौजूदा लेन में ही निर्माण होगा. लेकिन, इसके बाद भी सड़क की बदहाली जल्द नहीं सुधरने वाली. कारण होगा आम चुनाव 2019. विभाग ने टू लेन सड़क निर्माण में 50 करोड़ 67 लाख रुपया का अनुमानित खर्च का खाका तैयार किया है. लेकिन, प्रशासनिक (सरकारी) सहमति नहीं मिली है. विभाग की माने तो सरकार की ओर से फौरन एक्शन लेने पर निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो सकती है, अन्यथा आम चुनाव के लिए आचार संहिता लगने से काम अगले वित्तीय वर्ष के लिए टाला जा सकता है.
जरा इतिहास पर गौर कर लें : 2016 में सड़क को फोर लेन बनाने की जिम्मेदारी सबसे पहले झारखंड एक्सलेरेटेड रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड को दी गयी थी. लेकिन दो साल में सर्वे का काम पूरा नहीं कर पाने के कारण इसे जिम्मेदारी मुक्त कर दिया गया था. 2018 नवंबर में फिर पथ निर्माण विभाग को जिम्मेदारी दी गयी. विभाग ने सर्वे का काम मात्र एक माह में ही पूरा कर लिया. लेकिन, अब फंड की कमी ने सड़क के चौड़ीकरण के भविष्य पर रोड़ा अटका दिया है.
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