बार-बार दिलासा से आजीज आ गये हैं ग्रामीण

Updated at : 03 Sep 2018 9:28 AM (IST)
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बार-बार दिलासा से आजीज आ गये हैं ग्रामीण

सीपी सिंह राजेंद्र नगर वासियों की बेबसी. एक किमी सड़क निर्माण की बाट जोह रहे हैं पांच हजार लोग बोकारो : आर्या बिहार व गौशनगर के बीच का जंक्शन और बोकारो के रिहायशी क्षेत्र में से एक है हैसाबातु पंचायत क्षेत्र का राजेंद्र नगर. लेकिन, एक किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए क्षेत्रवासी पिछले कई साल […]

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सीपी सिंह

राजेंद्र नगर वासियों की बेबसी. एक किमी सड़क निर्माण की बाट जोह रहे हैं पांच हजार लोग

बोकारो : आर्या बिहार व गौशनगर के बीच का जंक्शन और बोकारो के रिहायशी क्षेत्र में से एक है हैसाबातु पंचायत क्षेत्र का राजेंद्र नगर. लेकिन, एक किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए क्षेत्रवासी पिछले कई साल से इंतजार कर रहे हैं.

सड़क की स्थिति ऐसी कि यहां से वाहन ले जाने की जहमत शायद ही कोई उठाता है. अगर कोई साहस कर सड़क पार करता है, तो घंटों मशक्कत करनी पड़ती है. ग्रामीण मुखिया से लेकर सांसद जैसे जनप्रतिनिधि व डीसी जैसे प्रशासनिक अधिकारी से भी सड़क निर्माण की गुजारिश कर चुके हैं. लेकिन, क्षेत्रवासी को सड़क की जगह मिला तो सिर्फ आश्वासन. हैरानी यह कि सड़क का इस्तेमाल पांच हजार से अधिक लोग करते हैं.

आगे आने पर रोक दिया गया : जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अधिकारी से गुहार लगाने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती देख क्षेत्रवासी स्वयं आगे आये. घर-घर से चंदा एकत्र किया गया. 6950 रुपया इकट्ठा किया.

लेकिन, 24 अगस्त को बोकारो विधायक ने क्षेत्रवासियों से आग्रह कर चंदा को वापस करने की बात कही. क्षेत्रवासियों के अनुसार विधायक बिरंची नारायण ने एक बार फिर से पीडब्ल्यूडी विभाग से सड़क निर्माण कराने का आश्वासन दिया.

फंड की कमी का रोना रोती है मुखिया : क्षेत्रवासियों ने बताया : हैसाबातु पंचायत की मुखिया शकीला बानो से जब सड़क निर्माण की गुजारिश की गयी, तो मुखिया ने फंड की कमी बताते हुए पल्ला झाड़ लिया. ग्रामीणों की माने तो तेतुलिया से गौशनगर तक एक किलोमीटर की सड़क बन जाने से हैसाबातु, मखदुमपुर, रहमतनगर, सिजुआ व पुंदाग जाने वाले लोगों को फायदा होगा.ग्रामीण क्षेत्र में हैं, पर बिजली शहरी क्षेत्र का देते हैं : राजेंद्र नगर कहने के लिए हैसाबातु पंचायत में आता है.

यानी ग्रामीण क्षेत्र. लेकिन, बिजली बिल शहर की दर से लिया जाता है. लोगों की माने तो सुविधा के नाम पर कुछ नहीं, लेकिन बिल के नाम पर अधिकतम शुल्क लिया जाता है. यह अन्याय है. इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से बात की गयी है, लेकिन समस्या का निदान नहीं हो पाया.

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